यह गीत संसार की नश्वरता और जीवन की सच्चाई को दर्शाता है। इस दुनिया में कोई भी रिश्ता हमेशा साथ नहीं रहता। मृत्यु के बाद पत्नी, पुत्र और भाई कुछ समय तक शोक करते हैं लेकिन समय के साथ संसार अपनी गति से चलने लगता है। मनुष्य अकेला ही इस संसार में आता है और अकेला ही चला जाता है। इस गीत में माँ के प्रेम और उसकी पीड़ा को विशेष महत्व दिया गया है। माँ का संबंध सबसे गहरा और त्यागपूर्ण होता है क्योंकि वह अपनी संतान के लिए जीवनभर प्रेम और चिंता रखती है। धन सुंदरता शरीर और सांसारिक वस्तुएँ स्थायी नहीं हैं। इनका मोह मनुष्य को दुख देता है। सच्ची शांति आत्मज्ञान अच्छे कर्म सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने से मिलती है। इस गीत का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को संसार के मोह में फँसने के बजाय अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाना चाहिए और जीवन की वास्तविकता को समझते हुए प्रेम करुणा और ज्ञान के मार्ग पर चलना चाहिए। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #तीन दिन तिरिया रोवै कुछ दिन बेटा भाई, #Tin Din Tiriya Rovai Kuchh Deen Beta Bhai, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Tin Din Tiriya Rovai Kuchh Deen Beta Bhai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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इस दुनियां की अहम सच्चाई देखा दिल लगाकर
तीन दिन तिरिया रोवै कुछ दिन बेटा भाई
कोई साथ में जाता ना कोई साथ में रहता ना
जीवन है थोड़े दिन का मूर्ति कोई किसी को भाता ना
सीमित समय का साथ है गुरुवर सीमित समय का शोक
जनम जनम तक माता रोवै पिता रोवै विभोर
आस पराई होती है विश्वास जुदाई होती है
जन्म-जन्म तक माता रोवै कोख जुदाई होती है
स्वीकार ना होता दिल कि जोड़ी प्रेम विरह में जलता
जला देता है तन मन को जैसे आग धधकता
इस दुनियां की अहम सच्चाई देखा दिल लगाकर
तीन दिन तिरिया रोवै कुछ दिन बेटा भाई
अंतरा
सृष्टि की परिवर्तन गुरुवर सब कुछ अलग हो जाते है
रिश्ते नाते चलते ना एक दिन टूट बिखरते हैं
कोई ना आता साथ में गुरुवर कोई ना जाता साथ में
मिल जाता है मिट्टी में एक दिन भरी बरसात में
साज बाज सब रह जाती है कौन किसे अब पूछे
ये नश्वर शरीर को कैसे कोई अब बुझे
कुछ ना है स्थाई यहां पे पल में मिटने वाला है
थोड़े समय का साथी गुरुवर जल्दी हटने वाला है
मोह माया की दुनियां में सुंदरता सबको भाती है
टूट जाती है बीच में जब दर्द उभर कर आती है
इस दुनियां की अहम सच्चाई देखा दिल लगाकर
तीन दिन तिरिया रोवै कुछ दिन बेटा भाई
कोई ना किसको पूछे गुरुवर सब कोई मतवाला
पत्थर पानी ढूंढ रहा है जो बिखरने वाला
तन के साथ ना दोस्ती रहती ना रहती सुंदरता
एक दिन मौत ले जाएगी सब रहेगा इहवा
सच्चा धर्म सिखाता है आत्मज्ञान की राह
ध्यान ज्ञान की शरण सिखाता देता है सुख शाम
जो अपने कामों में लगता उसका दिल ना रोता
छोड़ देता उस रिश्तों को जो दुख का है फीता
कौन भागे पूरा जीवन उस जीवन के साथ में
जो छोड़ जाए बीच रास्ते में इस को प्यास
इस दुनियां की अहम सच्चाई देखा दिल लगाकर
तीन दिन तिरिया रोवै कुछ दिन बेटा भाई
गहरी प्रेम में माँ रोती है किसी से कुछ ना कहती
सोच सोच कर दुखी हो जाती कैसे दिल को रहती
कोई रास्ता सुझे ना उसको अपनी कोख बचाने में
हो जाती है अलग बलग वो दूजा दुख मिटाने में
तन और धन दौलत ने कितने दिल को तोड़ दिया
साज बाज की दुनियां ने रिश्तों की आहट मोड़ दिया
बुरा बुराई मत करना ये सारी दुनियां कहती है
सच्चाई अपनाकर जग में कितने दिल बिखरती है
अन्दर की आत्मा को जिसने देखा अपनी आत्मा से
तोड़ दिया सारा नाता जग में चला गया है सपनों में
इस दुनियां की अहम सच्चाई देखा दिल लगाकर
तीन दिन तिरिया रोवै कुछ दिन बेटा भाई
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