मृत्यु प्रकृति का अटल सत्य है, इसलिए उससे डरने के बजाय उसे शांति और परिवर्तन के रूप में स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि मृत्यु को भय नहीं बल्कि शांति, विश्राम और आत्मा की मुक्ति का माध्यम है। जैसे दिन के बाद रात आकर शरीर को आराम देती है, वैसे ही जीवन के संघर्षों और थकान के बाद मृत्यु आत्मा को शांति प्रदान करती है मृत्यु को भय नहीं बल्कि शांति, विश्राम और आत्मा की मुक्ति का माध्यम है। जैसे दिन के बाद रात आकर शरीर को आराम देती है, वैसे ही जीवन के संघर्षों और थकान के बाद मृत्यु आत्मा को शांति प्रदान करती है।मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए मार्ग और दिव्य यात्रा की शुरुआत माना गया है। अच्छे कर्म करने वाला मनुष्य मृत्यु के बाद परमात्मा और स्वर्ग की ओर जाता है, जहाँ दुख, चिंता और पीड़ा समाप्त हो आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को, #Kyun Kehte Ho Use Daraavni Jo Aati Hai Aaraam Dene ko, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत =} #क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
#Kyun Kehte Ho Use Daraavni Jo Aati Hai Aaraam Dene ko
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
जब थकता तन मन इस दुनियां में आती हैं विश्राम देने को
आत्मा की शान्ति सुख है आत्मा की स्वागत
नया द्वार खोल देती आते घर पे सागर
अन्त का ये घटना ना है एक शान्ति गरिमा
परिवर्तन के रूप में दिखाती ये परिवर्तन है
शान्ति सम्मान स्वागत करती है ये आत्मा का
गहरे आध्यात्मिक पहलू छिपा रखी है यात्रा का
जीवन का ये ऐसा क्षण है सबके पास आती है
आगे पीछे आती है पर सबके पास आती है
क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
जब थकता तन मन इस दुनियां में आती हैं विश्राम देने को
जैस आती दिन जग में वैसे आती रात है
साम सवेरे खुशियां आती आती है विश्राम देने
इस जीवन का अलग पड़ाव है जो दिखाती निधन
जीवन के बाद मृत्यु आती है ले जाती है तन मन
मिल जाती है मुक्ति जीवन को दुनियां की झंझट से
वो संघर्ष थकान से उठा था पीड़ा जो जीवन में
थक जाता जब तन मन जग में छाया ढूंढता फिरता
ढूंढता है विश्राम आराम इधर उधर भटकता
जैसे सोता तन आराम से वैसे सोता आत्मा है
रात सुलाती तन मन को तो मृत्यु सुलाती आत्मा है
क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
जब थकता तन मन इस दुनियां में आती हैं विश्राम देने को
पवित्र घटना है मृत्यु जीवन में जो आत्मा को शान्ति देती
आत्मिक घर को वापिस कर ब्रम्ह की द्वार दिखाती
जीवन का ये सार्थक पल है आत्मा का लाभप्रद
ले जाती है अपने साथ में स्वर्ग सफर पे पथ
सत्य के साथ जीता है जो वो अच्छे कर्म को करता हैं
चला जाता है स्वर्ग में वो वापस नहीं आता है
मृत्यु एक सुन्दर है अनुभव जिसने इसको देखा
हंसता और मुस्काता वो जो इसके साथ में चलता
शान्ति का प्रतीक निवारण स्वर्गवास से जाना जाता
मरण देहान्त के नाम से आता अपने साथ ले जाता
क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
जब थकता तन मन इस दुनियां में आती हैं विश्राम देने को
जीवन यात्रा की गहन कहानी लक्ष्य की ओर है बढ़ता
जब पूरी हो जाती लक्ष्य जीवन का विश्राम जगह को ढूंढता
शान्त सुन्दर वो क्षण ढूंढता है जो समय उपलब्धि लाती
जीवन की इस अन्त में एक नया कहानी आता
छोड़ देता जब तन को प्राण दिव्य लोक में जाता है
ईश्वर के वो पास जाता है अपनी व्यथा सुनाता है
परम सत्य है स्वर्ग की दुनियां जहां कोई ना चिंता
गूंज रहे है गीत वहां पे जहां मिलते है आत्मा
मधुर धुन बजती है स्वर्ग में आगम भव्य पवित्र का
करता है स्वागत स्वर्ग अपने लोक परलोक में
क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
जब थकता तन मन इस दुनियां में आती हैं विश्राम देने को
गीत =} #क्यों कहते हो उसे डरावनी जो आती है आराम देने को
#Kyun Kehte Ho Use Daraavni Jo Aati Hai Aaraam Dene ko
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