यह रचना बताती है कि अत्यधिक सोच और अतीत में जीना मनुष्य को उलझन में डाल देता है जबकि विश्वास संतुलन और वर्तमान में जीना जीवन को सरल बनाता है कवि अपने मन की बेचैनी यादों निर्णयहीनता और मानसिक संघर्ष को माँ के सामने व्यक्त करता है। कवि बीती हुई बातों और पुरानी यादों में इतना उलझ गया है कि उसे रातों में नींद नहीं आती और वह सही-गलत तथा जीवन के प्रश्नों में खो जाता है कवि हर बात को बहुत गहराई से सोचता है, जिसके कारण वह छोटे-छोटे निर्णय भी नहीं ले पाता। यादें उसके मन को बार-बार विचलित करती हैं और उसकी कार्यक्षमता रुक जाती है। अंत में वह अपनी माँ से मार्गदर्शन, शांति और सहारा माँगता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बड़ी उलझन में फंसी है मेरी प्राण रे माई #Badi Uljhan Men Fanshi Hai Meri Pran Re Mai,, Writer ✍️ #Halendra Prasad ,
#Badi Uljhan Men Fanshi Hai Meri Pran Re Mai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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कैसे तुझको मैं बताऊं अपनी हाल रे माई
बड़ी उलझन में फंसी है मेरी प्राण रे माई
अच्छे बुरे की बातों ने मुझे घेर लिए है रातों को
सही गलत को सोचता हूँ मैं जाग जाता हूँ रातों को
निंद ना आती ध्यान में आती बीती हुई सारी बातें
सोच कर मनवा भ्रमित हुआ है कटती ना अब राते
यादों की सागर में मैं तो डूबता जाता हूं
बीती हुई बातों में अपने मन को मैं अझूराता हूँ
कैसे तुझको मैं बताऊं अपनी हाल रे माई
बड़ी उलझन में फंसी है मेरी प्राण रे माई
मन मन्दिर के घर में माता कितने याद आते है
दोस्तों की पुरानी यादें यादों में रह जाते है
कितना ज्यादा सोच रहा मैं बाहर ना आ पाऊं
यादों की दलदल में फंसकर यादोंको समझाऊं
साम सुबह में आता यादें रातों को भी आता है
पल पल आता मन के अन्दर मन को ही फुसलाता है
जो बीत गया वो आएगा ना यादों में केवल आए
तड़प देता है दिल को मेरे दिल को ही बंटवाए
कैसे तुझको मैं बताऊं अपनी हाल रे माई
बड़ी उलझन में फंसा है मेरा प्राण रे माई
प्रश्नों के उलझन में फंसकर निर्णय को अब ढूंढू
नैतिक क्या है सत्य क्या है जीवन क्या है पूछूं
मन मेरा ऐसा है माता हर बातों को ढूंढे
गहराई में उत्तरकर मईया आपने आप से उलझे
परफेक्ट निर्णय ना लेता है सोच विचार में डूबकर
उलझ जाता है उलझन में साफ रास्ता को ढूंढकर
हर पहलू को जाँच रहा है जैसे चलनी चाले
टल जाता है एक्शन सारा जब कोशिश पे धावे
कैसे तुझको मैं बताऊं अपनी हाल रे माई
बड़ी उलझन में फंसा है मेरा प्राण रे माई
रुक गई मेरी क्षमता सारी सोचते सोचते यादों को
निर्णय ना ले पाता हूँ मैं याद आती ओ यादों को
मैं अनपढ़ अनाड़ी मईया समय बिताया फ़ाजुल
जीने और करने में कमियां आई याद आई है जीने में
सोच जरूरी सीमित ना होती पल पल मुझे सताती है
अनुभव से समझाकर मुझको मुझमें ही दिखाती है
छोटे छोटे निर्णय को भी अब ना मैं ले पाता
पूछ रहा हूँ तुझसे मईया कैसे कुछ कर पाता
कैसे तुझको मैं बताऊं अपनी हाल रे माई
बड़ी उलझन में फंसा है मेरा प्राण रे माई
वोगीत=} #बड़ी उलझन में फंसी है मेरी प्राण रे माई
#Badi Uljhan Men Fanshi Hai Meri Pran Re Mai
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