जब हम स्वार्थ और तृष्णा से ऊपर उठकर निष्पक्ष और निर्मल दृष्टि से संसार को देखेंगे तब मनमस्ति और मुक्ति का अनुभव होगा क्योंकि स्वार्थ और लालसा जीवन को उलझाते हैं व्यक्ति अपनी इच्छाओं और मोह में फंसकर असली आनंद और शांति से दूर हो जाता है अवलोकन का दृष्टि अपनाना आवश्यक है क्योंकि स्वार्थ पक्षपात और मोह से ऊपर उठकर देखना ही मन को वास्तविक आनंद मनमस्ति देता है माया और लालच भ्रम फैलाते हैं वे अंदर की शक्ति बुद्धि और आत्मिक प्रकाश को ढक देते हैं।जीवन का उद्देश्य आत्मिक जागरण है और ज्ञान आत्मा का प्रकाश है और जीवन का दिव्य गुण ही असली सुख हैं।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे, #Manmast Ho Jayega Jab Tum Nirekha Karoge, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Manmast Ho Jayega Jab Tum Nirekha Karoge
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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जब तुम स्वार्थ से ऊपर उठकर देखा करोगे
मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे
मोह का ये दुनियां सारा माया में विलीन है
लालसा के लोभ में गंवाया सारा दिन है
भीतरे भीतर टूटता कुछ नहीं बोलता
मुक्ति का रास्ता ढूंढता मुक्ति ही सोचता
पल पल गुजरता दिन ये पल पल बताता
उमर गिरता जाता है समझ में ना आता
तृष्णा प्रलोभन तृषा चाहत पेठाया
लालच को भरकर मन में मन को दौड़ाया
जब तुम स्वार्थ से ऊपर उठकर देखा करोगे
मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे
व्यक्तिगत इच्छाओं का जब बाढ़ मार देता है
गिरते कुम्हला कर नभ से दिल को जार देता है
आशा के विरह में सब निराशा घेर आता
जीवन आत्मकेंद्रित होता लोभ जाग जाता
दुनियां का मोह माया भ्रम और आकर्षण है
वश में कर लेता जब ये धूमिल सत हो जाता है
मानव का तेज दीप्ति मानव रहता जो
आत्मा में रहकर आत्मा से कहता नो
ज्ञान का वो वास्तविक रूप आत्मा का प्रकाश है
जीवन का दिव्य गुण है जीवन का उजास है
जब तुम स्वार्थ से ऊपर उठकर देखा करोगे
मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे
स्वार्थ है सतरंगी भ्रम मन को विचलित करता
जादू चलाकर दिल पे मन को मुग्ध करता
कभी बहलाता है तो कभी फुसलाता है
मोहित करता मन को जब माया को बुलाता है
कितने दिखावों को ये खींच कर ले आता
आत्मा के प्रकाश को छुपाकर दिल जलाता
मतिभ्रम करता है ये उलझन को पेठाता
शंका में डालकर मन को धारणा दर्शाता
कभी मांगें कभी कभी दुख मांगे
दिल की बेचैनी पर दिलवे को डांटे
जब तुम स्वार्थ से ऊपर उठकर देखा करोगे
मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे
स्वार्थ की इच्छाएं जब डूबाए गी बुलाकर
तोड़ देगी अंदर से दिल को कुम्हला कर
माया का प्रभाव है ये ढोंग खूब रचती
दिल में फैलाकर छल जादू टोना करती
बल बुद्धि शक्ति हरती मायाजाल फैला कर
हर लेती धन दौलत रूप को सजाकर
वास्तविक तेज को ये दुर्गुण बताती है
दुर्गुण को वास्तविक कहकर वास्तविक हटाती है
रंग बिरंग चाहत लाती दिल को ये भरमाकर
मार देती तलवार से दिल को दिल से दिल निकाल कर
जब तुम स्वार्थ से ऊपर उठकर देखा करोगे
मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे
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