अहंकार और इच्छाओं का त्याग करके सच्चे समर्पण और भक्ति से ही भगवान का अनुभव और जीवन का परम आनंद प्राप्त होता है क्योंकि यह भक्ति-गीत एक साधक की भगवान के प्रति गहरी पुकार जिज्ञासा और समर्पण को दर्शाता है वह बार-बार भगवान को याद करता है और उनकी लीला को समझना चाहता है लेकिन उसे स्पष्ट अनुभव नहीं हो रहा इसलिए वह प्रश्न करता है भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि उसका अहंकार भय स्वार्थ और चिंता मिटा दें और उसे अपने प्रेम व दिव्यता में लीन कर दें वह स्वीकार करता है कि इच्छाएँ और मोह उसे भ्रमित करते हैं और सच्चे ज्ञान से दूर कर देते हैं सच्चा आनंद और शांति केवल भगवान में ही है इसलिए वह उनसे आत्म-शुद्धि और ब्रह्म में विलीन होने की प्रार्थना करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना, #Bhagawan Kaisi Teri Lila Too Dikhata Kahe Naa, Writer ✍️ #Halendra Prasad ,
#Bhagawan Kaisi Teri Lila Too Dikhata Kahe Naa
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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तुझे बार बार मैं याद करु तू बताता काहे ना
भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना
विनती निवेदन किया तेरे पास आया
अर्जी लगाकर मैं अपनी बात पेठाया
डूबना है मुझको तुम डूबा दो आपने राग में
जीवन पूरा दिव्य कर दो जिंदगी के साज में
मेरे अहंकार को तुम जड़ से मिटा दो
भय स्वार्थ चिन्ता को तुम मिट्टी में मिला दो
तुझे बार बार मैं याद करु तू बताता काहे ना
भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना
चाहतों की चाह ने मुझे तेरे पास भेजा
दिल की अमानत को मै दिल में समेटा
तुझमें विलीन होकर तुझे मैं ना देखूं
आती समझ में ना मुझे तुझसे मैं पूछूं
कैसे पाऊं समझ मैं दुनियां संसार का
सच्ची समझ आती ना मुझे तेरे प्यार में प्यार का
कैसे मैं स्पर्श करु हाथों को बढ़ाकर
दिव्य अनुभूति का मुझे याद आता आकर
तुझे बार बार मैं याद करु तू बताता काहे ना
भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना
पूरापन आनन्द का मुझे अनुभव कराया तू
जीवन का स्वाभाविक रूप जीवन को दिखाया तू
आत्मा की शुद्धि भगवन इच्छा की प्रतीक है
मन और विचार जीवन तुझमें विलीन है
अजबे प्रचंड रूप धरती है जब कामना
मार देती बुद्धि को ये तीव्र दिल मनोकामना
पाने की चाहत ने सब कुछ भुलाता
जोड़ देता सुख को दिल से दिल को भरमाता
तुझे बार बार मैं याद करु तू बताता काहे ना
भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना
सुना हूँ मैं लोगों से क्या क्या बताते है
अनुभव और ज्ञान का चूल्हा संभव पर जलाते है
मिलता जो एक बार जीवन को बदलता
छूता है जब दिव्य तो आत्मा निखरता
करते है प्रार्थना लोग फल फूल चढ़ाते
तुझ में विलीन हो कर तुझमें समाते
मैं भी तुझसे मांगू भगवन ब्रम्ह में समा दो
पूरा कर दो इच्छा मेरी जग को जना दो
तुझे बार बार मैं याद करु तू बताता काहे ना
भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना
गीत=} #भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना
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