यह गीत माँ के प्रति अटूट श्रद्धा, पूर्ण समर्पण और निष्काम भक्ति का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण है। इसमें भक्त अपने आत्मानुभव के आधार पर व्यक्त करता है कि उसने सोच-समझकर संसार के मोह माया अहंकार और आकर्षण का त्याग कर माँ की शरण ग्रहण की है। संसार में अनेक प्रकार के भ्रम मतभेद और प्रलोभन विद्यमान हैं किन्तु सच्चा भक्त अपने अटल विश्वास अनुभव और आस्था के बल पर केवल ईश्वर का मार्ग ही चुनता है।गीत यह संदेश देता है कि संसार के क्षणभंगुर बंधनों से ऊपर उठकर यदि मनुष्य सच्चे प्रेम श्रद्धा और समर्पण के साथ माँ की भक्ति में लीन हो जाए तो उसका जीवन सार्थक शांतिमय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो जाता है। बाहरी आभूषणों और सांसारिक सुखों की अपेक्षा मन की पवित्रता प्रेम विनम्रता और भक्ति कहीं अधिक मूल्यवान हैं। जब मनुष्य अपने अहंकार, लालसा और मोह का त्याग कर पूर्ण समर्पण के साथ स्वयं को माँ के चरणों में अर्पित कर देता है तभी उसे वास्तविक शांति आनंद और आत्मिक मुक्ति की प्राप्ति होती है। यही इस गीत का मूल संदेश और आध्यात्मिक सार है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैय, #Chhodkar Duniya Ke Bandhan Ko Teri Bhakti Me Duba Hun Maiya, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत=} #छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
#Chhodkar Duniya Ke Bandhan Ko Teri Bhakti Me Duba Hun Maiya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मैं सोच समझकर तेरी अंगुली पकड़कर अब चला हूँ मैया
छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
चुना हूँ मैं रास्ता तेरी तेरे पास आने को
चाहे कोई कुछ भी कहे तेरे में मिट जाने को
अलग अलग राय मिलता अलग बातें
दुनियां के लोग भरम बांटते सौगातें
कोई कहता प्रेम भक्ती हल्की होती है
बड़ी ही कठिनाई की रस्सी होती है
मैं सोच समझकर तेरी अंगुली पकड़कर अब चला हूँ मैया
छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
अं
मैने परखा जब दिल को प्रेम की तराजू में
तुझे अपनाया मईया आत्मा की आरजू में
मेरी अनुभव अब मुझसे बार बार कहती
ममता के सागर बीच दिलवे में रहती
तन की गहना तो माँ मन की आकर्षण है
अहंकार और शारीरिक सुख का दिखता एक दर्पण है
त्याग दिया दिल मेरा सारी बन्धन को
दर्पण में झलकता था अहंकार की शरण को
मैं सोच समझकर तेरी अंगुली पकड़कर अब चला हूँ मैया
छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
बाजूबंद तोड़ दिया तोड़ दिया बन्धन को
मोह माया की दुनियां तोड़ा तोड़ दिया भरम को
सारे बंधनों से मुक्ति मुझको मिली है
तेरी शरण में माता जिन्दगी खड़ी है
लालसा की आडम्बर को मैं दिल से निकला
त्याग दिया आकर्षण को मैं तुझको पुकारा
तुझमें समर्पित दिल है तुझमें समाया
अब ना कोई प्रवाह मुझको तुझे आत्मा में बसाया
मैं सोच समझकर तेरी अंगुली पकड़कर अब चला हूँ मैया
छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
दिल मेरा बोले माता तेरे पास आऊं
चरणों में सोकर अपनी दुखड़ा मिटाऊं
जब जब चाहा तुझे तब तब बुलाया
बिना पानी की मछली जैसे हृदय को तड़पाया
तेरी यादों में मैं सारी रात गुजारूं
काली काली रातों में माँ तुझको पुजारू
आसमान में देखता हूँ मैं तेरी वो तस्वीर को
दिखता है तन मन बीच मुझे तेरी तस्वीर वो
मैं सोच समझकर तेरी अंगुली पकड़कर अब चला हूँ मैया
छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
गीत=} #छोड़कर दुनियां के बन्धन को तेरी भक्ति में डूबा हूँ मैया
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