यह गीत मँझली माँ के प्रेम त्याग ममता और निःस्वार्थ स्नेह का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण करता है। कवि का मानना है कि समाज प्रायः सौतेली माँ को संदेह और पूर्वाग्रह की दृष्टि से देखता है जबकि उसका हृदय भी सगी माँ की भाँति प्रेम करुणा वात्सल्य और अपनत्व से परिपूर्ण होता है। वह भी परिवार तथा बच्चों के सुख-दुःख में समान रूप से सहभागी बनकर अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वाह करती है। गीत यह संदेश देता है कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन केवल एक घटना या एक पक्ष के आधार पर नहीं करना चाहिए बल्कि उसके त्याग कर्तव्य परिस्थितियों और व्यापक उद्देश्य को भी समझना आवश्यक है। जीवन में सुख-दुःख सफलता-असफलता तथा मिलन-वियोग समय के साथ आते-जाते रहते हैं। इसलिए मनुष्य को निराश हुए बिना धैर्य कर्म प्रेम और मानवता के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।इस गीत का मूल संदेश है कि माँ केवल जन्म देने वाली ही नहीं होती बल्कि पालन-पोषण स्नेह ममता और त्याग करने वाली प्रत्येक स्त्री सम्मान और आदर की अधिकारी है। साथ ही जीवन में प्रेम कर्तव्य सहनशीलता सकारात्मक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों को अपनाकर ही सच्चे और सार्थक जीवन का निर्माण किया जा सकता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,मँझली माँ भी होती है जीवन की वो थाली, #Manjhli Maa Bhi Hoti Hai Jiwan Ki Vo Thali, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Manjhli Maa Bhi Hoti Hai Jiwan Ki Vo Thali
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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जाने कोई ना जग में माँ की ममता की प्याली
मँझली माँ भी होती है जीवन की वो थाली
जिसको दुनियां सौतन कहती वो भी कितनी प्यारी है
ठोक देती है पीठ बेटा का दिल की कितनी न्यारी है
करती है दुलार जिगर से कितनी प्यारी दिल है
केकई हो चाहे गौतमी हो कितनी प्यारी माँ है
दुनियां की व्यंग्यों ने वो सच को नाही देखा
पूज रहे है आज उसी को सच को नाही हभेखा
इस धरती को शान्ति मिली है उस माता के कारण
दुनियां को सन्देश मिला है उस माता के प्यारण
जाने कोई ना जग में माँ की ममता की प्याली
मँझली माँ भी होती है जीवन की वो थाली
कैसे देखूं उस माता को जो छोड़ गई उस राह में
बोल ना पाती मुझसे मै तो तड़प देखूं दिल प्यार में
एक तरफ था एक ही तड़पन दूजा दुनियां तड़पें
एक तरफ था माँ की वचन दूजा पिता है तड़पें
कर्मों के उस डोर में मैने बाध दिया था अपने को
अब कोई क्यों रोता है जो बांध दिया था सपने को
वन भी मेरी माता है दुनियां भी मेरी अपना है
सब के लिए मैं जीता हूँ जीवन भी मेरी सबका है
दुख की टोली देखी ना जाती इस दुनियां के रंगों में
मैं जोगी अब निकल पड़ा हूँ ढूंढने के चक्कर में
जाने कोई ना जग में माँ की ममता की प्याली
मँझली माँ भी होती है जीवन की वो थाली
हर जीवन का अपना समय है सब जीते है अलग अलग
जैसे कमल कुमुंद खिलते अपने समय अलग अलग
जीवन में अवसर मिलता है सबको ज्ञान पाने को
निराश नहीं होना है दशहरे को बहकाने दो
मन में बसने वाला भी एक दिन छोड़ देता
दूसरे की तुलना में जीवन को मोड़ देता
हर व्यक्ति के जीवन में सफल निराशा आता है
दोनों श्रेष्ठ है इस दुनियां में जीवन बनाने आता है
हर समय ना श्रेष्ठता मिलती ना मिलती है खुशियां
कभी कभी है ठोकर मिलती इस जीवन की दुनिया
देखो उन रातों को जो कितनी खुशियां देती है
आँखों में ठंडक को देती कितने दुख को हरती है
जाने कोई ना जग में माँ की ममता की प्याली
मँझली माँ भी होती है जीवन की वो थाली
गीत =} #मँझली माँ भी होती है जीवन की वो थाली
#Manjhli Maa Bhi Hoti Hai Jiwan Ki Vo Thali
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