इस गीत में कवि अपनी विनम्रता गुरु-भक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास को व्यक्त करता है। वह मानता है कि उसके भावपूर्ण गीत उसकी अपनी प्रतिभा का परिणाम नहीं बल्कि गुरु की कृपा और ईश्वर की प्रेरणा का प्रसाद हैं। उसके शब्द भाव और विचार स्वतः हृदय से प्रस्फुटित होते हैं तथा उनमें प्रेम करुणा और संवेदना का स्वाभाविक प्रवाह दिखाई देता है। कवि के अनुसार मनुष्य केवल एक माध्यम है जबकि वास्तविक सृजनकर्ता परमात्मा है। समाज में ईर्ष्या तिरस्कार और उपहास जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियाँ होने पर भी कवि विचलित नहीं होता। गुरु की शिक्षा और ईश्वर का स्मरण उसे धैर्य सहनशीलता और मानसिक शांति प्रदान करते हैं। इस गीत का मुख्य संदेश है कि सच्ची प्रतिभा अहंकार से नहीं बल्कि विनम्रता गुरु-कृपा, ईश्वर-विश्वास और पवित्र भावनाओं से विकसित होती है। मनुष्य को हर परिस्थिति में प्रेम धैर्य और सहनशीलता का मार्ग अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,लोग हमसे पूछे आकर गीतों का वो साज गुरुवर, #Log Hamse Pooche Aakar Geeto Ka Vo Saj Gurvar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #लोग हमसे पूछे आकर गीतों का वो साज गुरुवर
#Log Hamse Pooche Aakar Geeto Ka Vo Saj Gurvar
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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कैसे उनको हम समझाए अपने गीतों का अल्फ़ाज़ गुरुवर
लोग हमसे पूछे आकर गीतों का वो साज गुरुवर
गीतों में क्या कहना चाहूं कैसे मैं लिख लेता हूँ
जानना चाहे दिल की बातें कैसे मैं सोच लेता हूँ
ना मैं जानू ना मैं सोचूं ना मैं जनता दिल की हाल
कहा से आती दिल में मेरे शब्दों की बरसात
कौन मुझे अब ज्ञान देता है कौन मुझसे लिखवाता
कैसे भरता मेरे अन्दर कौन मुझे सिख लाता
कैसे उनको हम समझाए अपने गीतों का अल्फ़ाज़ गुरुवर
लोग हमसे पूछे आकर गीतों का वो साज गुरुवर
भीतर की भावों में मेरे कहा से करुणा आती है
कैसे आती कब कब आती कैसी भाव बनाती है
ना जानू मैं अन्तर भाव को कब कहा ढल जाता
कैसे बाहर आता है वो कौन सा रूप दिखाता
प्रकट करता अभिव्यक्ति को जब अंतर मन से लाकर
मन में हलचल कर देता है आँखो से बुलवा कर
क्या क्या रचता कैसे रचता कुछ नहीं मैं जानू
कैसा होगा अर्थ लिखन का उसको ना पहचानूं
कैसे उनको हम समझाए अपने गीतों का अल्फ़ाज़ गुरुवर
लोग हमसे पूछे आकर गीतों का वो साज गुरुवर
इस दुनियां में लोग गुरुवर नफरत में भरे है
तिरस्कार करते है अंदरे अंदर जलते है
मौज मजाक उड़ाते है नीचा हमे दिखाते
चुपकी में मिस्काकर गुरुवर आगे नीकल जाते
इस दुनियां में ऐसा देखा अपनी मजा उड़ाते
तोड़ देते है दूसरे को फिर हंसकर मुस्काते
हमने तो उस ईश्वर को याद किया है
जिसने हमको शांत सहनशील बना दिया है
कैसे उनको हम समझाए अपने गीतों का अल्फ़ाज़ गुरुवर
लोग हमसे पूछे आकर गीतों का वो साज गुरुवर
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