यह गीत मनुष्य को मोह-माया लोभ छल-कपट और सांसारिक आकर्षणों से सावधान रहने की प्रेरणा देता है। यहाँ 'नागन' किसी वास्तविक सर्प का प्रतीक नहीं है बल्कि उन मानसिक और सांसारिक विकारों का प्रतीक है जो मनुष्य के विवेक सत्य और आत्मिक चेतना को नष्ट कर देते हैं। कवि माँ से संवाद करते हुए बताता है कि संसार बाहर से अत्यंत आकर्षक और प्रकाशमय दिखाई देता है, किंतु उसके भीतर मोह का विष छिपा हुआ है। जो व्यक्ति इस मोह में फँस जाता है, वह अपने जीवन का सही मार्ग खो देता है। वह सत्य को पहचानते हुए भी उससे दूर होता चला जाता है और अंततः दुःख अशांति तथा पश्चाताप से भरा जीवन जीने लगता है। जहाँ प्रेम और सत्य का अभाव है, छल-कपट बढ़ रहा है तथा प्रकृति और मानवीय मूल्यों का निरंतर पतन हो रहा है। यदि मनुष्य समय रहते विवेक प्रेम भक्ति और सत्य के मार्ग को नहीं अपनाएगा, तो वह जीवन में सच्चे सुख संतोष और शांति को प्राप्त नहीं कर सकेगा। इस प्रकार यह गीत केवल एक भावपूर्ण रचना नहीं बल्कि मानव जीवन के लिए एक गहन आध्यात्मिक और नैतिक संदेश है जो आत्मजागरण ईश्वर-भक्ति और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #जिसको डस लेती है नागन वो मर जाता बावरी , #Jisko Das Leti Hai Magan Vo Mar Jata Bavari, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत=} #जिसको डस लेती है नागन वो मर जाता बावरी
#Jisko Das Leti Hai Magan Vo Mar Jata Bavari
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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मईया देखा मैं दुनियां कुछ अलबेला रोशनी
जिसको डस लेती है नागन वो मर जाता बावरी
दो फन की नागन भी कितनी जहरीली विषाद है
मार देती है उस आत्मा को जो जीवन का संसार है
रूप चालाकियां अद्भुत उसके पार ना कोई पाता है
कर लेती है वश में अपनी रूप समझ में आता ना
मोह के वो चतुराई में जब बांध देती है मानव को
मर ना पाता वो मानव जब काट देती जुदाई से
मईया देखा मैं दुनियां कुछ अलबेला रोशनी
जिसको डस लेती है नागन वो मर जाता बावरी
मोह माया का ऐसा रूप है जो समझ ना पाता दुनियां
आकर्षण में खींचता जाता बोल ना पाता दुनियां
स्पष्ट खतरा दिखते है पर वो कुछ नहीं कर पाता है
जलते आग में चलता है पर जल नहीं वो पाता है
कितनी फन है उसके माता कोई नहीं जान पाता
स्वभाव प्रभाव की दुनियां में समझ नहीं वो पाता
बंध जाता है मोह बन्धन में अपने को समझाकर
रोगी जैसा रोग भोगे वो आंखों से आँसू बहाकर
मईया देखा मैं दुनियां कुछ अलबेला रोशनी
जिसको डस लेती है नागन वो मर जाता बावरी
जीवन की महत्वपूर्ण चेतावनी आन पड़ी है जीवन में
भटक रहा है जग में दुनियां प्रेम नहीं है खेवन में
छल कपट का आया जमाना मिलता ना सच्चाई
कहा जायेगा अब जमाना आगे गढ़ा पीछे है खाई
मौत सर पे आई है जीवन में उलझन लाई है
लुप्त हुई गंगा की करुणा बालू ने आग लगाई है
ये बादल भी अब रूठ गया आसमा भी अब टूट गया
कहा से आए सुकून ये धरती भी अब सुख गया
मईया देखा मैं दुनियां कुछ अलबेला रोशनी
जिसको डस लेती है नागन वो मर जाता बावरी
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