यह गीत सामाजिक समरसता आध्यात्मिक समानता और सच्ची भक्ति का प्रेरणादायक संदेश प्रस्तुत करता है। इसमें माँ के समान प्रेम करुणा और निष्पक्षता का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है। कवि के अनुसार माँ के दरबार में सभी भक्त समान हैं वहाँ अमीर-गरीब राजा-रंक ऊँच-नीच अथवा किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। माता भक्त की धन-संपत्ति या बाहरी वैभव को नहीं बल्कि उसकी सच्ची श्रद्धा अटूट आस्था प्रेम विनम्रता और निष्कपट हृदय को स्वीकार करती हैं। माँ अपनी कृपा सभी पर समान रूप से बरसाती हैं तथा मानवता समानता भाईचारे और पारस्परिक सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देती हैं। इस प्रकार यह गीत स्पष्ट करता है कि सच्ची भक्ति का वास्तविक आधार बाहरी ऐश्वर्य नहीं बल्कि शुद्ध भाव सच्ची निष्ठा और निर्मल हृदय है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया, #Bina Bhedbhav Ke Leti Hai Maa Sabka Upahar Jogiya, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Bina Bhedbhav Ke Leti Hai Maa Sabka Upahar Jogiya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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माँ के मन्दिर में चढ़ावा एक समरूप जोगिया
बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया
एक समान है सब दुनिया उसके दरबार में
राजा हो या रंक भिखारी सब जाते है प्यार में
धन दौलत का कोई महत्त्व ना ना कोई वैभव का
आस्था निष्ठा ही भक्ति है प्रधानता की उस लौ का
सम्मान आदर सब देती है माँ सबको एक समान
जैसी करनी वैसी देती सबको एक प्रसाद
माँ के मन्दिर में चढ़ावा एक समरूप जोगिया
बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया
ऊंच नीच का भेद नहीं है ना अमीर गरीब का
सोना हो या चांदी हो चाहे भेट छोटा गरीब का
दोनों का स्वीकार करे माँ भाव एक समान
मूल्य नहीं है उन भेंटों जो चढ़ावे सोने का उपहार
हृदय की भावना बहुत महत्वपूर्ण है भक्तों की
सबके भेंट स्वीकार करती माँ जिसका दिल है सच्चे की
हर व्यक्ति को सम्मान मिले यहीं माता का नियम है
भाव समानता में भक्ति की समान महिमा है
माँ के मन्दिर में चढ़ावा एक समरूप जोगिया
बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया
माँ की मन्दिर केवल एक धार्मिक स्थल ना
सभा समानता और निष्पक्षता की एक प्रोत्साहना है
सबको देती आध्यात्मिक दार्शन स्वतंत्रता और सम्मान
आस्था के अनुसार देती सबको पूजा का विधान
ना कोई भेदभाव करती है ना कोई पक्षपात
सबसे प्रेम करती है माता दृष्टिकोण एक समान
किसी का दर्जा कुछ भी हो पर माँ के पास एक समान
सबको माता अपनाती है जो करता सम्मान
माँ के मन्दिर में चढ़ावा एक समरूप जोगिया
बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया
माँ के सामने सभी बराबर कोई अमीर गरीब ना
फले फुले सारे लोग जहां में कोई रोवे फकीर ना
सब लोग एक समान है माँ के दरबार में
कोई नहीं है छोटा बड़ा माँ के उपकार में
माँ ममता की सागर है माँ जीवन का आसमा
मैं से चहके ये बगिया भूल ना पाए आत्मा
आहट जग से कहती है जीवन की रोटी कहती है
खुशियों की सागर में माँ की आहट बोलती है
माँ के मन्दिर में चढ़ावा एक समरूप जोगिया
बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया
गीत=} #बिना भेदभाव के लेती हैं माँ सबका उपहार जोगिया
#Bina Bhedbhav Ke Leti Hai Maa Sabka Upahar Jogiya
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