यह गीत जीवन की अस्थिरता प्रकृति की सुंदरता समय की गति और आत्मिक आनंद का संदेश देता है तथा मनुष्य को प्रेम विवेक और सदाचारपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। क्योंकि गीत का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा सुख और आनंद बाहरी संसार में नहीं बल्कि मन और आत्मा के भीतर छिपा है। जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए समय का सदुपयोग करते हुए प्रेम, सत्य और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलना ही मानव जीवन की सार्थकता है। गीत में कवि संसार की सुंदरता, जीवन की नश्वरता और आत्मिक सत्य का वर्णन करता है। कवि स्वयं को ईश्वर या माता द्वारा भेजा हुआ एक संदेशवाहक मानता है, जो मनुष्यों को जीवन का वास्तविक स्वरूप दिखाने आया है। गीत में प्रकृति की अद्भुत रचना सूर्य, वर्षा, जल, वायु, पशु-पक्षी और समस्त सृष्टि की सुंदरता का गुणगान किया गया है। साथ ही यह बताया गया है कि संसार में सब कुछ परिवर्तनशील है। सुख-दुःख, जन्म-मृत्यु, मिलन-विछोह और जीवन की हर अवस्था समय के साथ बदलती रहती है। कवि मनुष्य को स्मरण कराता है कि धन, वैभव और सांसारिक वस्तुएँ स्थायी नहीं हैं। मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। इसलिए अहंकार, मोह और लालसा में उलझने के बजाय प्रेम, करुणा और सद्कर्मों से जीवन को सजाना चाहिए! आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ, #Sundar Sukh Dukh Duniya Ka Mai Ise Sajane Aaya Hun, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Sundar Sukh Dukh Duniya Ka Mai Ise Sajane Aaya Hun
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मैं तुझे बताने आया ना ना मैं तुझे दिखाने आया हूँ
सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ
मेरी माता मुझे भेजी है आँचल की दहलीजो से
देख रहा मैं दुनियां को इन आँखों की तिजो से
कैसी सृष्टि तूने बनाई पानी पत्थर हवा बहाई
दिल दिया है आँख दिया है बारिश का सौगात दिया है
कितना सुन्दर सृष्टि तेरा मोर मैना का यहां है डेरा
सूरज रोज जगाते है नई सवेरा लाते है
मैं तुझे बताने आया ना ना मैं तुझे दिखाने आया हूँ
सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ
भली भांति मैं जानता हूँ शतदल कि कहानी को
सदा बन्द ना रहता है पल पल रूप बदलता है
जीवन का यहीं हाल है माता परिवर्तन की साज है माता
एक आता दूजा जाता है यही जीवन का राग है माता
सुन्दर सुख सब ढूंढ रहा है रस सुख का सब भूल रहा है
कुछ नहीं जाता है साथ में सब यही रह जाता है
कोई नहीं यहां अचल अमर है ना कभी ऐसा हुआ है
चला गया सब छोड़कर दुनियां यही जीवन का जुवा है
मैं तुझे बताने आया ना ना मैं तुझे दिखाने आया हूँ
सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ
देखा जब मैं ध्यान से इसको ऐसी स्थिति आएगी
कुछ नहीं जब शेष बचेगा मन यहीं कुम्हलाएगा
प्रीतम प्रेम की चाह में दुनियां कितने रंग बदलती है
चाहत को पूरा करने को कितने जंग को लड़ती है
कमल की फूल के जैसा जीवन सुन्दर सुन्दर दिखता जो
क्षण में नष्ट हो जाता है फिर नहीं वो आता है
कुदरत का ये नियम अटल है परिवर्तन का समय सफल है
कुछ नहीं है यहां स्थिर में सब कुछ चलता फिरता है
मैं तुझे बताने आया ना ना मैं तुझे दिखाने आया हूँ
सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ
जीवन का सारा रस छिपा है तन मन के भीतर में
प्रेम आनन्द सौन्दर्य भरा है आत्मा के अन्दर में
कभी ना रहता एक समान हर पल हर वक्त बदलता है
एक दिन होता लुप्त कहा पे ये कोई नहीं जानता है
सब नश्वर है इस दुनियां में एक दिन टूटकर बिखर जाता
सदा न रहता नित्य ना होता एक दिन ये तो निकल जाता
देख समय के तीव्र गति को चलता कितना तेज है
पल पल बदल जाता है सब कुछ यही दुनियां की रीत है
मैं तुझे बताने आया ना ना मैं तुझे दिखाने आया हूँ
सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ
गीत =} #सुन्दर सुख दुख दुनियां का मैं तो इसे सजाने आया हूँ
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