गीत में संसार की मोह-माया, स्वार्थ, दुःख और करुणा की कमी का वर्णन है। भक्त बताता है कि जीवन के अनुभवों ने उसे भीतर से तोड़ दिया है, लेकिन उसकी आस्था अभी भी माता के चरणों में अटल है। अंत में वह माँ काली, दुर्गा, भवानी, शारदा, गायत्री आदि सभी दिव्य रूपों को एक ही आदिशक्ति मानकर पूर्ण श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करता है। मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता एक करुणामय भक्ति-गीत है जिसमें एक भक्त अपनी माँ आदिशक्ति के सामने अपने हृदय की वेदना व्यक्त करता है। वह कहता है कि उसके जीवन में इतना दुःख और संघर्ष है कि उसे शब्दों में बताना कठिन है। वह स्वयं को हनुमान जी जैसा नहीं मानता जो सीना चीरकर अपनी भक्ति और प्रेम का प्रमाण दे सके, इसलिए अपनी भावनाओं को माता के सामने व्यक्त करने में असमर्थ महसूस करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता, #Main Hanuman Na Hoon Satyug Ka Kaise Tujhe Samjhaun Main Mata, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Main Hanuman Na Hoon Satyug Ka Kaise Tujhe Samjhaun Main Mata
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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अब तुझे मनाने आऊंगा ना दिल चिरकर दिखाऊं मैं माता
मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता
मोह माया सब बन्धन टूटा टूट गया मेरा दिल
भर लिया हूँ दुख की झोली घूमता मैं फकीर
दुनियां से कोई मतलब ना मुझे मैं रोता हूँ दुनियां में
दुनियां रोती दुनियां में तो मैं रोता हूँ दुनियां में
खाली है मेरा दिल माता इसमें कुछ ना रहता
दुख दुनियां की भरी हुई है इसमें सुख ना रहता
अब तुझे मनाने आऊंगा ना दिल चिरकर दिखाऊं मैं माता
मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता
लोग कहे अब मुझसे माता दर्द तेरा झलकता है
जैसे बजती बांसुरी में वैसे दुख निकलता है
इतना ज्यादा दुःख है कि माँ कह नहीं मैं पाता हूँ
पसीज जाएगा भगवन देखकर उससे नहीं बताता हूँ
सुन नहीं पाएगी दुख को इतनी गहरी पीड़ा है
पत्थर दिल भी पिघल जाएगा दिल मेरा जहरीला है
तोड़ दिया मुझे अन्दर से अब तो टूट जुड़ा हूँ
रुला देगा तुझे अन्दर से इतना कष्ट झेला हूँ
अब तुझे मनाने आऊंगा ना दिल चिरकर दिखाऊं मैं माता
मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता
गुरुओं की मैं बात सुना जब मोह माया का कारण था
दुख की बन्धन टूटा गया यही जीवन का धारा था
दिल था खाली खाली मेरा ना कोई असमंजस था
प्रेम पीड़ा है इस दुनियां में यही जीवन का राजेश था
सुना हूँ मैं इस जीवन में कितने लोग बताते है
अपनी रोटी शेकर खाते दूसरे को भगाते है
रोता बचा पूछ रहा था इस दुनियां की ममता से
कहा गई तेरी करुणा माता काली की उस महिमा से
अब तुझे मनाने आऊंगा ना दिल चिरकर दिखाऊं मैं माता
मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता
मेरा जीवन तेरा है माँ तू दुनियां की माँ है
मैं ना जानू उस करुणा को जो तेरी दया है
रोज रोज मैं आता हूँ दर पे शीश नवाता हूँ
देख नहीं पाता हूँ तुझको तेरी रूप सजाता हूँ
तूही काली तूही दुर्गा तूही खप्पर वाली है
मर्दन करने वाली माँ शारदा माँ भवानी है
शक्ति स्वरूपा वेद की माता तूही देवी गायत्री है
सती सावित्री गौरी शंकर तूही गणेश की माता है
अब तुझे मनाने आऊंगा ना दिल चिरकर दिखाऊं मैं माता
मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता
गीत =} #मैं हनुमन ना हूँ सतयुग का कैसे तुझे समझाऊं मैं माता
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