इस गीत का मूल संदेश यह है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक परिवर्तन है। इस संसार में जो जन्म लेता है, उसे एक दिन जाना भी होता है। इसलिए मृत्यु को भय और शोक की दृष्टि से नहीं, बल्कि समझ, प्रेम और स्वीकार के भाव से देखना चाहिए। जीवन और मृत्यु वास्तव में एक ही यात्रा के दो पड़ाव हैं ये गीत मृत्यु को शत्रु नहीं, बल्कि एक परिचित मित्र के रूप में प्रस्तुत करता है। जिस प्रकार एक माँ अपने शिशु को पोषण देने के लिए एक स्तन से दूसरे स्तन पर ले जाती है और शिशु अज्ञानवश रो पड़ता है, उसी प्रकार प्रकृति मनुष्य को जीवन से मृत्यु की ओर ले जाती है। किंतु मनुष्य इस परिवर्तन के वास्तविक अर्थ को न समझ पाने के कारण भयभीत हो जाता है। जीवन और मृत्यु दोनों ही ईश्वर तथा प्रकृति की व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। मृत्यु उतनी ही स्वाभाविक, आवश्यक और सार्थक है जितना जीवन। इसलिए मनुष्य को निर्भय होकर जीवन जीना चाहिए और समय आने पर मृत्यु का भी सहज भाव से स्वागत करना चाहिए। जीवन का वास्तव में कोई अंत नहीं होता जीवन केवल एक अवस्था से दूसरी अवस्था में रूपांतरित होता है। इसलिए मृत्यु के प्रति भय नहीं, बल्कि प्रेमपूर्ण स्वीकार का भाव रखना ही जीवन की गहरी समझ और वास्तविक आध्यात्मिकता का प्रतीक है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,करलो प्रेम से स्वीकार मौत को आना जाना रहता है, # Karlo Prem Se Svikar Mout Ko Aana Jana Rahata Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Karlo Prem Se Svikar Mout Ko Aana Jana Rahata Hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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जीवन का कोई अन्त नहीं एक परिवर्तन मुखड़ा है
करलो प्रेम से स्वीकार मौत को आना जाना रहता है
क्यों डरना इस मौत से हमको ये सृष्टि का नियम है
जो आया उसे जाना है यही जीवन का सिस्टम है
हम जानते है दिल से मौत को हमे अपरिचित लगता
जब आयेगी लेने हमको दोस्त हमारा लगता
आत्मा की आंखों से देखा जब मैने यमराज को
जानी सी पहचानी लगते बहुत पुरानी प्यार को
जीवन का कोई अन्त नहीं एक परिवर्तन मुखड़ा है
करलो प्रेम से स्वीकार मौत को आना जाना रहता है
जीवन से मैं प्रेम किया हूँ जीवन को मैं देखा
प्रेम करूंगा मौत आने पर मौत से बात करूंगा
निर्भयता से रहता हूँ मैं ना डरता हूँ मौत से
आयेगा तो प्रेम करूंगा चला जाऊंगा गर्व से
इस दुनियां में आया हूँ इस दुनियां से जाना है
आयेगा जब पल तो उसको गले लगाना है
धरती अम्बर और दिगम्बर सबके दिल से दिल लगाया
आंखों में तस्वीर सजाकर दिल में उनका जगह बनाया
जीवन का कोई अन्त नहीं एक परिवर्तन मुखड़ा है
करलो प्रेम से स्वीकार मौत को आना जाना रहता है
ममता की सागर को देखा करुणा की आभा से
कितना प्यारी माँ होती है भूख मिटाती छाती से
ये सृष्टि है माँ भवानी ये सृष्टि है ईश्वर
शिशु मनुष्य है इस सृष्टि में एक स्तन है जीवन
रो देता है बच्चा जब माँ दूध पिलाते हटा देती
एक स्तन है जीवन तो दूजा मृत्यु नया जीवन
बच्चे का भी सोच देखा मैं अपनी वो अधिकारों पे
भूख मिटाती माँ पर बच्चा रो देता अज्ञाने में
जीवन का कोई अन्त नहीं एक परिवर्तन मुखड़ा है
करलो प्रेम से स्वीकार मौत को आना जाना रहता है
जैसे माँ दूध पिलाने खातिर एक स्तन से दूजे पे लेजाती है
वैसे है प्राकृति जीवन से मृत्यु ओर ले जाती है
रोता बचा परिवर्तन को समझे ना
उसी तरह डर जाता मानव परिवर्तन को जाने ना
मृत्यु स्वाभाविक उतनी है जितनी पोषण देने वाली
जीवन भी उतना ही प्यारा जितना मौत है प्यारी
माँ शिशु का जीवन है तो मृत्यु जीवन का दर्शन
सब है सत्य इस दुनियां में जो होता है हरदम
जीवन का कोई अन्त नहीं एक परिवर्तन मुखड़ा है
करलो प्रेम से स्वीकार मौत तो आता जाता रहता है
गीत =} #करलो प्रेम से स्वीकार मौत को आना जाना रहता है
# Karlo Prem Se Svikar Mout Ko Aana Jana Rahata Hai
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