बाहरी संसार की सुंदरता क्षणिक है, जबकि प्रेम, करुणा और आत्मबोध से प्राप्त होने वाला आनंद मनुष्य के हृदय में सदैव विद्यमान रहता है। गीत यह शिक्षा देता है कि सच्चा सुख और आनंद बाहरी वस्तुओं परिस्थितियों या उपलब्धियों में नहीं बल्कि मनुष्य के अपने हृदय प्रेम करुणा और आत्मचेतना में विद्यमान है। जो व्यक्ति अपने भीतर के आनंद को पहचान लेता है वही जीवन का वास्तविक सुख प्राप्त करता है। यह गीत बताता है कि सृष्टि का मूल स्वरूप आनंद प्रेम और पवित्रता से भरा हुआ है। प्रारंभ में प्रकृति और समस्त जगत में दिव्य सौंदर्य और सुख का वातावरण था जिसका गुणगान देवता भी करते थे। किंतु मनुष्य के मन में उत्पन्न असंतोष मोह और अहंकार ने उसे उस स्वाभाविक आनंद से दूर कर दिया। मुख्य संदेश यह है कि संसार बाहर से सुंदर और आकर्षक दिखाई देता है लेकिन मनुष्य के भीतर अनेक दुख भय चिंताएँ और अधूरी इच्छाएँ छिपी रहती हैं। मानव जीवन की अधिकांश पीड़ा अपूर्ण इच्छाओं और मानसिक अशांति से उत्पन्न होती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, दोनों जीवन के आंनद में दिल के भीतर पड़ा है, #Dono Jivan Ke Aanand Men Dil Ke Bhitar Pada Hai , Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Dono Jivan Ke Aanand Men Dil Ke Bhitar Pada Hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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दुनियां बाहर से सुन्दर है अन्दर दुखों का पहाड़ खड़ा है
दोनों जीवन के आंनद में दिल के भीतर पड़ा है
कातर दिखवा दिल को धीरे धीरे अकुलाता
भय से मन को भर देता है जहां कहीं दौड़ता
मानव जीवन की पीड़ा एक अधूरी इच्छा है
सब कुछ पूर्ण हो जाए यही जीवन की दीक्षा है
भावभूमि की अजीब कहानी सृष्टि से सब मिलता
करुणा का आनन्द जहां है वहीं प्रेम जिगर का खिलता
दुनियां बाहर से सुन्दर है अन्दर दुखों का पहाड़ खड़ा है
दोनों जीवन के आंनद में दिल के भीतर पड़ा है
जब ये सृष्टि नई बनी थी तब तारे चमक रहे थे
वायुमंडल की परिवेश में ताजगी झलक रहे थे
सुन्दर सुन्दर रोशनी से भरा पड़ा आसमान था
देव लोक का स्वर्ग कहाता देवो का आसमान था
इस सृष्टि को देखकर सारी दुनियां खुश हुई
देवता भी प्रशंसा करते प्रेम में सब प्रेम हुई
गुण इसकी लोग गाते थे हरदम आस लगाते थे
चलता था जीवन इससे खुशियों को झूमाते थे
दुनियां बाहर से सुन्दर है अन्दर दुखों का पहाड़ खड़ा है
दोनों जीवन के आंनद में दिल के भीतर पड़ा है
देवता भी गाते थे गुरुवर सृष्टि का गुणगान
निर्मल आनन्द का वरदान मांगकर रहते थे खुशहाल
शुद्ध पवित्र आनन्द देता था सृष्टि सबको लाकर
देता था खुशियों को आत्मा में बैठा कर
ना जाने किसने क्यों इससे दुखी हुआ
जहां सभी को सुख मिलता था वहीं किसी को दुख हुआ
पीड़ा उसकी बोल पड़ी आंखों में पानी भरकर
दर्द भरी थी दिल में उसके आंखों से बोलकर
दुनियां बाहर से सुन्दर है अन्दर दुखों का पहाड़ खड़ा है
दोनों जीवन के आंनद में दिल के भीतर पड़ा है
गीत =} #दोनों जीवन के आंनद में दिल के भीतर पड़ा है
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