भय और चाहत मनुष्य को ईश्वर तक ले जा सकते हैं, लेकिन प्रेम, आत्मबोध और आसक्ति से मुक्ति उसे परम शांति और मुक्ति तक पहुँचाती है। यह गीत मानव मन की उस प्रवृत्ति का वर्णन करता है जो भय और चाहत के आधार पर जीवन जीती है। मनुष्य किसी वस्तु को पाने की इच्छा और उसे खोने के डर में उलझकर भटकता रहता है। इसी कारण उसकी भक्ति भी प्रायः स्वार्थ, भय या मनोकामना की पूर्ति से जुड़ी होती है। कवि आत्ममंथन करते हुए प्रश्न करता है कि क्या हमारी ईश्वर-भक्ति वास्तव में प्रेम और आत्मबोध पर आधारित है, या केवल भय और इच्छाओं का परिणाम है। सृष्टि का संदेश यह है कि भय और चाहत मनुष्य को ईश्वर की ओर ले जा सकते हैं, लेकिन सच्ची साधना तब प्राप्त होती है जब व्यक्ति इन दोनों बंधनों से मुक्त हो जाता है। धन संबंध और सांसारिक सुखों के मोह में मनुष्य स्वास्थ्य आत्मशांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है। संकट और दुःख के समय वह ईश्वर को याद करता है, परंतु सुख में उसे भुला देता है। आत्मबोध निस्वार्थ भक्ति और इच्छा-भय से मुक्ति ही सच्चे आध्यात्मिक जीवन का मार्ग है। जब मनुष्य स्वयं को पहचान लेता है तब उसे बाहरी उपलब्धियों से अधिक आंतरिक शांति और परम सत्य की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा #Chahat Pe Adharit Man Ko Kaise Ab Dikhalayega, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Chahat Pe Adharit Man Ko Kaise Ab Dikhalayega
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
दुनियां की कुछ बात छुपी है कैसे उसे बताएगा
चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
बहुत गहरी ये बात आध्यात्मिक मानव की सच्चाई है
व्यक्त करता है सत्य इबादत दहशत की रुसवाई है
खोने की डर ने मानव को इधर उधर भटकाया
पाने की चाहत ने उसको दरबदर अटकाया
दौड़ दौड़ कर सर नवाता ईश्वर के दरबारो में
पूजा पाठ अर्चना करता चाहत के स्वाभिमानों में
दुनियां की कुछ बात छुपी है कैसे उसे बताएगा
चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
सोच रहा है दिल मेरा अब उस मन की बातों को
मजबूर किया मुझे उस प्यासो ने जो याद आई मुझे रातों को
पूछ रहा है आत्मा मेरी दिल की बात वो सृष्टि से
क्या हमारी भक्ति भय चाहत पे आधारित है
समझ ना पाता प्रेम पत्थर को आत्मबोध कहा है
स्वयं को जान गया हूँ मैं स्वयं में अभिमान कहा है
भक्ति का वो भाव कहता है भय इच्छा से मुक्त हो जाओ
सच्ची साधना मिल जाएगी अपने से तुम खुश हो जाओ
दुनियां की कुछ बात छुपी है कैसे उसे बताएगा
चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
सृष्टि की इस दर्शन ने मुझे गहरी गहरी बात कही
सुनकर मैं अब चुप हुआ हूँ छुपी हुई सौगात कही
भय और चाहत इस दुनियां में ईश्वर तक ले जाते है
ले जाते ईश्वर से ऊपर मुक्ति यही बताती है
खोने की दहशत ने मुझको डरा दिया इस दुनियां में
पाने की चाहत ने मुझको कायर बना कमियां में
क्या लाया था इस दुनियां में जो खोने से मैं डरता था
चाहत की उस शक्ति पे मैं दरबदर भटकता था
दुनियां की कुछ बात छुपी है कैसे उसे बताएगा
चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
मन की ये प्रवृत्ति कैसी घायल कर देता है
जब छीन जाने का भय करता है जिन्दा मार देता है
जीवन की सब प्रिय वस्तु को बार बार दिखलाता
धन दौलत सम्बन्ध दिखाता जो काम कभी नहीं आता
स्वास्थ्य जीवन का मूल है सब कुछ कोई ना इसे पूछे
याद करे बीमार में रब को फिर दौलत पे जूझे
जब जब संकट आती है तब तब ईश्वर दिखता है
सुखिया में ना दिखता ईश्वर मानवता मर जाता है
दुनियां की कुछ बात छुपी है कैसे उसे बताएगा
चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
अजीब कहानी इस जीवन का समझ नहीं मुझे आता
खतरे भय की अदृश्य सहारा हरदम ढूंढते रहता
डर की ऐसी तूफान चली जो भगवन तक पहुंचाती
मोड़ देती है पथ को दिल से ईश्वर तक ले जाती
ऐसी इच्छा जागृत होती जो ढूंढने से मिलता ना
सफल सफलता की चाहत ईश्वर के पास निकलता
सुख समृद्धि कामना और संतान मिले
मनोकामना पूर्ति होती आत्मा को भगवान मिले
दुनियां की कुछ बात छुपी है कैसे उसे बताएगा
चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
गीत =} #चाहत पे आधारित मन को कैसे अब दिखलायेगा
#Chahat Pe Adharit Man Ko Kaise Ab Dikhalayega
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मे
री_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें