मातृ-भक्ति, समर्पण, आत्मानुभूति, दिव्य प्रेम और सर्वत्र माँ के दर्शन। यह गीत एक भक्त की उस गहन अनुभूति का वर्णन है जिसमें भक्त अपनी आराध्य माँ को अपनी आत्मा अपनी शक्ति और सम्पूर्ण सृष्टि के रूप में अनुभव करता है। माँ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा प्रेम और आत्मिक संबंध को व्यक्त किया है। कवि माँ को अपने जीवन का एकमात्र सहारा शक्ति ज्ञान और करुणा का स्रोत मानता है। उसके अनुसार माँ केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की रचयिता पालनकर्ता और आत्मा में निवास करने वाली दिव्य शक्ति हैं। भक्त अनुभव करता है कि जब भी वह माँ का स्मरण करता है माँ उसके निकट आकर उसे साहस शांति और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। भक्त मानता है कि संसार की हर वस्तु प्रकृति का प्रत्येक रूप और समस्त जीव-जगत उसी माँ के स्वरूप हैं। माँ का प्रेम इतना व्यापक और गहरा है कि उसका पूर्ण वर्णन शब्दों में संभव नहीं है। सच्ची भक्ति प्रेम और समर्पण के द्वारा भक्त अपनी आराध्य माँ की उपस्थिति को अपने हृदय और सम्पूर्ण जगत में अनुभव कर सकता है। माँ ही जीवन की आधारशिला आत्मा की शक्ति और परम आश्रय हैं। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #आ जाती है पास मेरे जब मैं तुझको याद करु, #Aa Jati Hai Pas Mere Jab Mai Tujhko Yad Karu, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Aa Jati Hai Pas Mere Jab Mai Tujhko Yad Karu
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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मेरा कोई नहीं हैं दुनियां में तूही मेरी प्रिय मईया
कहता हूँ मैं दिल से मईया तूही मेरी गर्व मईया
तेरे प्रेम की आत्मीयता ने मुझे भक्ति भाव दिया
व्यक्त करता है गर्व को मेरे मुझको छांव दीया
तन मन में रहती है माँ तू मेरे साथ में हरदम
देती है मुझे बल बुद्धि माँ विद्या की भरकम
जोड़ देती है मुझको मुझसे आत्मा की दर्शन में
मैं तेरा बालक हूँ मईया चलती है मेरे साथ सफर में
तेरा ही मैं पूजा करता तेरा ही मैं ध्यान करु
आ जाती है पास मेरे जब मैं तुझको याद करु
मेरा कोई नहीं हैं दुनियां में तूही मेरी प्रिए मईया
कहता हूँ मैं दिल के गर्व से तूही मेरी जीवन की पहिया
सब करती है तू माता मैं कुछ ना करता
सब जानते है मै करता हूँ प्रेम विरह प्याला
तू मेरी आत्मा की देवी तूही दुनिया सारा
मेरे मन में तू बसी हुई है तेरे प्यार की धारा
तू मेरी अपनी है माता ना कोई है अपना
हृदय हमारा कहता है तू ही मेरी विधाता
तू धरती है तू अम्बर है तूही सृष्टि सारा
पत्थर पानी पहाड़ बनकर ज्ञान भारती है प्यारा
आखों की तारा है तू माँ तूही सागर गंगा
तूही यमुना सरस्वती है तूही जलधारा
मेरा कोई नहीं हैं दुनियां में तूही मेरी प्रिए मईया
कहता हूँ मैं दिल के गर्व से तूही मेरी जीवन की पहिया
अदृश्य गहन में रहती है तू मेरे आत्मा के अन्दर
जैसे तेरी प्रेम अनुभव होता है याद समंदर
जब कोई पूछता है मुझसे बता नहीं मैं पाता
असमर्थ हूँ मैं इस दुनियां में बता नहीं मैं पाता
कैसे शब्दों से तेरी व्याख्या करु समझ नहीं मैं पाता
हर चीजों में बस्ती है तू देख नहीं मैं पाता
व्यक्त करना अब सम्भव ना मुझे मैं तो चुप हो जाता
याद करता मैं तुझको सब कुछ तुझे पेठाता
शक्ति की भावना है तू माँ सृष्टि की रचयिता
सब जीवों की माता है तू तूही बल बुद्धि ज्ञाता
मेरा कोई नहीं हैं दुनियां में तूही मेरी प्रिए मईया
कहता हूँ मैं दिल के गर्व से तूही मेरी जीवन की पहिया
मैं पूछूं अब तुमसे माता मुझको तुम बताओ आज
आया हूँ तेरे पास में मैं मुझको दिखाओ आज
शब्दों से परे है अनुभव दिल के आँख में सजकर
क्यों इतना गहरा है दिल में आत्मा में सिमट कर
वास्तव में मैं कहता हूँ माँ याद केवल तुझे करता हूँ
जब जब आती है तू तुझमें लिपटकर रहता हूँ
भावना की गहराई को मैं देखा जब भावना से
आँखें मेरी भर गई थी यादों की संभावना से
सब जगह तू दिखती जिधर जिधर मेरी नजरे जाती
हर वस्तु में दिखाती है तू जिधर मेरी अब आत्मा जाती
मेरा कोई नहीं हैं दुनियां में तूही मेरी प्रिए मईया
कहता हूँ मैं दिल के गर्व से तूही मेरी जीवन की पहिया
गीत =} #आ जाती है पास मेरे जब मैं तुझको याद करु
#Aa Jati Hai Pas Mere Jab Mai Tujhko Yad Karu
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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