यह गीत जीवन के गहरे रहस्य, उसकी अद्भुतता और अनिश्चितता को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से व्यक्त करता है। कवि अनुभव करता है कि जीवन कब और कैसे बीत जाता है, इसका आभास भी नहीं हो पाता। मनुष्य अपनी जीवन-यात्रा में अनेक रहस्यों, मोह, उलझनों और कठिनाइयों से गुजरता है, फिर भी जीवन की सुंदरता, आश्चर्य और चमत्कार हर क्षण विद्यमान रहते हैं। कवि के अनुसार माँ ही ईश्वर हैं, ईश्वर ही प्रकृति हैं और प्रकृति ही जीवन का मूल आधार तथा सच्ची मार्गदर्शक शक्ति है। माँ के स्नेह, ज्ञान और करुणामयी आश्रय में ही मनुष्य अपने अस्तित्व और जीवन के रहस्यों को समझने का प्रयास करता है। यह गीत श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश देता है। कवि मानता है कि भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से ही जीवन की गहनता, उसकी रहस्यमयता और उसकी अद्भुत अनुभूतियों को सही रूप में महसूस किया जा सकता है। जीवन वास्तव में एक अनसुलझा रहस्य है, जिसे पूर्णतः समझ पाना अत्यंत कठिन है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात , #Pata Naa Chala Hai Hamko Jivan Hai Agyat, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Pata Naa Chala Hai Hamko Jivan Hai Agyat
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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ये माई पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात
त कैसे जीवन निकल गया ना
कैसे जीवन निकल गया ना रे माई कैसे जीवन निकल गया ना
ये माई पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात
त कैसे जीवन निकल गया ना
अद्भुत है आश्चर्य है माता समझ नहीं मुझे आता है
छिपा है गहरा गुप्त रहो में प्रकट नहीं हो पाता है
कैसे इसको जानू मैं कुछ नहीं दिख पाता है
तेरे दर पे आया हूँ शीश चढ़ाने आया हूँ
देदो मुझको ज्ञान ध्यान माँ हृदय देखाने आया हूँ
मैं तेरा हूँ छोटा बालक तुझसे बिछड़ कर रोता हूँ
जहां देखूं मैं नारी को वही सिसक कर सोता हूँ
कुछ नहीं बोल पाता मैं आँखें मेरी बोल जाती
तू दिखती है चारों दिशा में पास नहीं कभी आती है
तड़प रहा हूँ देखकर जग को सबको अपनी माता है
मेरा ना कोई इस जगत में तूही माँ विधाता है
ये माई पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात
त कैसे जीवन निकल गया ना
ना जाना मैं इस दुनियां में कैसे कब मै आया हूँ
कैसे जन्म मैं पाया माता कैसे क्या दर्शाया हूँ
कुछ नहीं मुझे दिखता है माँ आँचल तेरी बुलाती है
यादों की सागर में मैया अब मुझे रुलाती है
अनजाना मेरी जीवन माता कब शुरू हुआ जानू ना
क्या छिपा है मेरे अन्दर में उसको मैं पहचानू ना
खींच मुझे ले जाती है साफ नहीं कर पाती है
सोच रहा उस शक्ति को कौन मुझे रुलाती है
लाया जो दुनियां में मुझको वो शक्ति कहा रहती है
ईश्वर है या कुदरत है जो मुझे अब खींचती है
समझ ना पाता इस रहस्य को कौन मुझे बुलाता है
आंखों में मेरे दर्द दिया दिल को अब रुलाता है
ये माई पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात
त कैसे जीवन निकल गया ना
जैसे कोमल कलिया माता इस जगत में आती है
गहरी रात की निशीथ पहर में एकाएक खिल जाती है
कोई ना जाने इनकी आगमन फूल बन मुस्काती है
चुपचाप आती है जग में सुन्दर रूप दिखाती है
मैं भी आया इस जगत में कुछ नहीं जान पाया हूँ
ढूंढते ढूंढते निकल गया मैं कुछ नहीं ढूंढ पाया हूँ
अनजान जीवन का राह अजब है मोह माया सब घेरा है
कोई नहीं है अपना माता सब जीवन का डोरा है
अदृश्य शक्ति अब मुझे बुलाती आसमा अम्बर की राहों में
धरती माँ मुझे गोद सुलाती ढाक देती कुदरत के घर में
ये जीवन है अदभुत माता कैसे इसको समझूं मैं
हर घटना रहस्यमय है कैसे इसको जानू मैं
ये माई पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात
त कैसे जीवन निकल गया ना
कैसे जीवन निकल गया ना रे माई कैसे जीवन निकल गया ना
ये माई पाता ना चला है हमको जीवन है अज्ञात
त कैसे जीवन निकल गया ना
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