कवि अपनी माँ को देवी के रूप में मानकर उससे ज्ञान शक्ति और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मांगता है। तो कवि माँ के प्रेम त्याग और महत्व को उजागर करता है और हमें सिखाता है कि हमें अपने माता-पिता की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना चाहिए। यह गीत एक निर्धन मुसाफिर के हृदय की गहरी भावनाओं को व्यक्त करता है जिसमें वह अपनी माँ से अपने दर्द प्रेम और जज़्बात को समझने की विनती करता है। कवि बताता है कि माँ ही वह होती है जो बच्चे के अनकहे दुख को भी समझ सकती है और माँ-बेटे के अटूट संबंध बचपन की यादें माँ का स्नेह और उसके बिना जीवन की पीड़ा को दर्शाया गया है। क्योंकि कवि यह भी कहता है कि जब वह दूर या इस दुनिया से चला जाएगा तब माँ को उसकी बहुत याद आएगी और केवल यादें ही शेष रह जाएंगी। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत रचना, #मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ, #Main Hoon Nirdhan Ek Musafir Meri Jazbaat Boojho Maa, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ
#Main Hoon Nirdhan Ek Musafir Meri Jazbaat Boojho Maa
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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केवल बोलने का आवाज ना मेरी बात बूझो माँ
मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ
महफूज करो उस बातों को मैं रोकर तुम्हे सुनाया जो
आँख भरी थी पानी से जो कहकर तुम्हे बताया जो
पहचान करो उस दिल को जो तुम्हे हँसाकर बोला
चला जाएगा छोड़के जब तो दिल तेरा रोएगा
सुनसान जमाना हंसेगी तुझपे सन्नाटा छाएगा
बिछड़े हुए आएंगे याद पर वापस नहीं आएगा
केवल बोलने का आवाज ना मेरी बात बूझो माँ
मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ
जो रौनक जो ऊर्जा तुझको अपनापन में मिलता था
छुप जाएगा मिट्टी में आँखो में याद आएगा
सुनी होगी वो गोद तेरी माँ किसको ढाक सुलाएगी
याद करेगी रो रो कर तू मुझको नहीं भुलाएंगी
तेरी आँचल का गुड्डा मैं था तेरी यादों की दुनियां
आँखो का तेरी तारा मैं था बातों का हरमुनिया
कितने प्यार जताती जब छोड़कर मुझको जाती थी
यादों में मुझे रखती थी तू छोड़ नहीं कभी पाती थी
केवल बोलने का आवाज ना मेरी बात बूझो माँ
मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ
जब जब याद आती है मुझको छुपकर मैं रो लेता हूँ
तेरी याद में डूबकर मईया धीरे से सो जाता हूं
कातिल ना ये रात अंधेरी मेरे साथ में रहती है
जितना दुःख मैं करता हूँ ये उतने दुःख को सहती है
साथी साथ निभाती धरती भारत माँ पोलहाती है
सौगंध है उस माता को जो रास्ता मुझे दिखाती है
पल पल याद करु मैं माँ हृदय की गहराई में
चांद सूरज के जैसा दर्शन देती मुझे उँघाई में
केवल बोलने का आवाज ना मेरी बात बूझो माँ
मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ
तेरी चरणों में रहता हूँ मै तेरी चरणों को पूजू
ऐसा ज्ञान तू दान में माँ जिसे कभी ना भूलू
तेरी सन्मार्ग पर चलना है मुझे कुमार्ग नहीं अपनाना
उत्साह बढ़ा दे दिल का मेरा हिम्मत मुझमें बढ़ाना
बल बुद्धि तू शक्ति दे माँ भर दे मुझमें प्रेरणा
धाम तेरे मैं आया हूँ तू भर दे मुझमें करुणा
जग दाता तू देवी है माँ सृष्टि की विधाता
काली दुर्गा लक्ष्मी है तू तूही वेद माता
केवल बोलने का आवाज ना मेरी बात बूझो माँ
मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ
गीत=} #मैं हूँ निर्धन एक मुसाफिर मेरी जज्बात बूझो माँ #Main Hoon Nirdhan Ek Musafir Meri Jazbaat Boojho Maa
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