धन से ज्यादा जरूरी संस्कारप्रेम और मानवता हैं इन्हें भूलने से ही दुनिया में संग्राम पैदा होता है यह गीत बताता है कि आज के समय में इंसान धन-दौलत के पीछे भागते हुए अपने संस्कार रिश्ते और मानवता को भूल गया है। इसी कारण दुनिया में अशांति और संघर्ष बढ़ रहे हैं। कवि कहते हैं कि जीवन में प्रेम और रिश्ते अब कमजोर हो गए हैं लोग एक-दूसरे का दिल तोड़ देते हैं। सच्चाई और अच्छाई अंधकार में छिपती जा रही है जबकि बुराई बढ़ती जा रही है। जीवन संघर्ष का नाम है और जैसे सोना आग में तपकर शुद्ध होता है वैसे ही इंसान भी कठिनाइयों से गुजरकर मजबूत बनता है। समाज में दया ममता और करुणा कम होती जा रही है और लोग अहंकार व पद के पीछे भाग रहे हैं। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,दिलवा धन दौलत का यार भुला संस्कार भगवन, #Dilwa Dhan Daulat Ka Yaar Bhula Sanskaar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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की अब तो होता है दुनियां में संग्राम भगवन
दिलवा धन दौलत का यार भुला संस्कार भगवन
जीवन ये अभागा भगवन जिसको तूने बनाई
तोड़ देता उस दिल को भगवन जिससे दिल लगाई
दीपों का कोई अर्थ नहीं प्रभु अधियारों की गलियों में
जलता सूरज छुप गया है बादल कलियों में
जब जब धधके तब तब तम का बादल छाता
घेर लेता है धूल आंधी से रोशनी को छुपाता
की अब तो होता है दुनियां में संग्राम भगवन
दिलवा धन दौलत का यार भुला संस्कार भगवन
दिखता ना अब सूरज भगवन दिखता ना अब ज्वाला
कुन्दन की कहानी दिखता सोने पर सुहागा
जीवन का संघर्ष चुनौती अजीब फसाना लाया
तोड़ दीया संकल्पों को वो कायर बन मुसकाया
जीवन का सब मूल्य छुपा है मौन की दीवारों में
सत्य उजागर करता है अब शासन दहलीजों पर
लड़ता दीपक बुझाता दीपक बार बार अब बोले
संघर्ष जीवन है इस दुनियां में संघर्ष बिना ना कुछ होवे
की अब तो होता है दुनियां में संग्राम भगवन
दिलवा धन दौलत का यार भुला संस्कार भगवन
बुनियादी उसूलों पर अब चलना है इस जीवन में
जैसे लड़ता दीप तमस से अंधियारों की गलियों में
जब तक सूरज लड़े ना तम से तब तक आभा ना देता
जलते जलते देता उजाला जग को जगमग करता
जो भी स्वयं को तपाता वहीं रोशनी लाता है
तेज से अपने जग को सींचे जग पूरा मुस्काता है
जैसे सोना आग में तपकर शुद्ध हों जाता
वैसे शुद्ध होता है तन मन जब स्वयं को खुद तपाता
की अब तो होता है दुनियां में संग्राम भगवन
दिलवा धन दौलत का यार भुला संस्कार भगवन
मेंहदी की रंगों ने भगवन अपना रूप दिखाया है
सुन्दर सुन्दर रंगों ने अब अपना रंग बिखराया है
उत्तम उत्कृष्ट की बातें जब मन के अंदर आई
श्रेष्ठ प्रधान महान की बातें दिल को दिल से हटाई
मर गई करुणा मर गई ममता रहम स्नेह की दया
मुख्य वरिष्ठ की उच्च पदों ने तोड़ दिया है काया
तन मन अंग की बात छोड़ो अब शिव के साथ हुआ था
बात बात की रंजिश ने दिल को तोड़ दिया था
की अब तो होता है दुनियां में संग्राम भगवन
दिलवा धन दौलत का यार भुला संस्कार भगवन
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