यह भजन माँ के प्रति अटूट श्रद्धा प्रेम और पूर्ण समर्पण की अभिव्यक्ति है। मैंने माँ को अपने जीवन की नैया की खेवैया अपना सहारा और जीवन की आधारशक्ति मानता है। मैं धन संपत्ति ऊँचा पद या संसार का सम्मान नहीं माँगता बल्कि केवल माँ का साथ उनकी शरण और चरणों में स्थान चाहता हूँ। भक्त के जीवन में जब दुःख भय अकेलापन और निराशा आती है तब माँ की कृपा उसे आशा साहस और आत्मिक शांति प्रदान करती है। माँ की गोद हमारे लिए सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है। माँ के शरण में आकर हमारे दुःख प्रेम में आँसू मोतियों में और अंधकार आशा के प्रकाश में बदल जाते हैं। भजन का मूल संदेश है कि सच्ची भक्ति में सांसारिक इच्छाओं से अधिक महत्व माँ की कृपा चरणों की शरण और हृदय में माँ नाम का है। मेरी की अंतिम अभिलाषा भी यही है कि जीवन की अंतिम साँस तक माँ का नाम मेरे मुख से निकलता रहे और उसे माँ के चरणों में स्थान मिले। क्योंकि यह भजन माँ की ममता कृपा करुणा और भक्त के पूर्ण आत्मसमर्पण का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,#तेरी कृपा से संकट मिटे तूही मेरी हैं पूजा माँ, #Teri Kripa Se Sankat Mite Tuhi Meri Hai Pooja Maa, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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तूही नैया तूही खेवैया तूही मेरी सहारा माँ
तेरी कृपा से संकट मिटे तूही मेरी हैं पूजा माँ
तेरे बिन मैं सुना सुना जीवन का हर किनारा
शक्ति सुरक्षा प्रेम है माँ तू तूही जीवन धारा
ना मांगू मैं अन धन मैया ना मांगू मैं ऊँचा पद
कोई जग का मान मुझे ना ना कोई सम्मान
बस इतना वरदान तू दे दे तेरे साथ रहूं मैं माँ
अन्त समय में नाम तुम्हारा मेरे मुख से निकले
चरणों में स्थान तू दे दे यहीं अरमान मेरा
तेरी गोद में मैं रखकर शीश क्या कहूं मेरी माँ
मिला है मुझको जो चैन कैसे उसका मान मैं गहूँ मेरी माँ
तेरी शरण में आके हर पीड़ा मुसकाई है
तेरी कृपा से जीवन नई प्रभा आई है
भटक रहा था मैं जीवन की इन रहो में
अपना कोई ना था जग की जहाओ में
चरणों की सहारा से डर मिट गया है
तेरी कृपा से माँ अब ये दिल गा रहा है
तेरी गोद में मैं रखकर शीश क्या कहूं मेरी माँ
मिला है मुझको जो चैन कैसे उसका मान मैं गहूँ मेरी माँ
बन गए आँसू अब प्रेम की वो मोती
मन की वीणा में गाती जीवन की ज्योति
जन्म जन्म तक माँ तूही मेरी स्वामी
तेरा ही गुण गान जाऊं बन जाओगी
तेरे धुन की मधुर स्वर ने मेरे सुध को लौटाई
नया जीवन देकर मुझको गोद में खिलाई
तेरी दया का कण जीवन धन बनाया
कृपा के छांव ने हर दुःख मिटाया
तेरी गोद में मैं रखकर शीश क्या कहूं मेरी माँ
मिला है मुझको जो चैन कैसे उसका मान मैं गहूँ मेरी माँ
तेरी शरण में जब मैं शीश को झुकाया
मन को ऐसा चैन मिला कह नहीं पाया
सूखे सूखे जीवन मेरा उपवन हुआ
प्रेम भक्ति का फूल माँ जगमग हुआ
करुणा की छाया पाकर दिल गुनगुनाया
हर दुःख की पीड़ा मिटा मन मुस्कुराया
अपना कोई भी ना था दुनियां संसार में
भटक रहा था जीवन कष्टों की बहार में
तेरी गोद में मैं रखकर शीश क्या कहूं मेरी माँ
मिला है मुझको जो चैन कैसे उसका मान मैं गहूँ मेरी माँ
तेरी चरणों की धूल को माथे पर लगाया मैं
मन में कोई भय ना रहा हृदय में घुलाया मैं
नाम से तुम्हारे मैं दीप रोज जलाता हूँ
जीवन के उज्ज्वल पथ पे आगे बढ़ते जाता हूँ
धो दीया संताप मेरा अमृत कृपा ने
हर लिया दुःख को मेरे तेरी दया ने
जब जब मन पे मेरे घोर अंधेरा छाई
आशा की दीपक माई दौड़ी चली आई
तेरी गोद में मैं रखकर शीश क्या कहूं मेरी माँ
मिला है मुझको जो चैन कैसे उसका मान मैं गहूँ मेरी माँ
गीत=} #तेरी कृपा से संकट मिटे तूही मेरी हैं पूजा माँ
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