समग्र रूप से यह गीत मनुष्य को सत्य दया त्याग करुणा शांति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इसका मूल संदेश है कि बुद्ध का ज्ञान मानव जीवन के सूखेपन को दूर करके उसमें नवजीवन आशा और मानवता की हरियाली भर सकता है। इस गीत में भगवान बुद्ध के महान व्यक्तित्व, उनके त्याग सत्य अहिंसा करुणा संयम सदाचार और मानवता के संदेश का सुंदर चित्रण किया गया है। बुद्ध ने सांसारिक मोह-माया और बंधनों का त्याग करके सत्य एवं ज्ञान की खोज की तथा अपने जीवन से संसार को शांति और करुणा का मार्ग दिखाया। गीत में बुद्ध के आगमन और उनके ज्ञान-संदेश को नवजीवन के जल और मुस्कुराती हरियाली के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैसे सूखी धरती पर वर्षा होने से जीवन फिर हरा-भरा हो जाता है, वैसे ही बुद्ध के विचारों से दुःखी और अशांत मानव जीवन में आशा, शांति और नई चेतना का संचार होता है। गीत में गोबर से लीपे आँगन हरियाली छोटे-छोटे पेड़ फुलवारी और सुंदर द्वार के माध्यम से भारतीय ग्रामीण संस्कृति प्रकृति की सुंदरता और पवित्रता को भी उकेरा गया है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई, ।#Ki Mai Re Hariyali Muskaaye Jaise Jaag Utha Navneer Re Mai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Ki Mai Re Hariyali Muskaaye Jaise Jaag Utha Navneer Re Mai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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जीवन का हर निर्णय बुद्ध सोच समझ करते थे
अनुशासन हालातों के अनुरूप में उचित निर्णय को लेते थे
अद्भुत क्षमता प्रकट करते थे मर्यादा के पालन में
सत्य अहिंसा करुणा संयम सदाचार दिखलाते थे
सबको प्रेरणा दिया बुद्ध ने आचरण सदैव विनम्र आदर्श
उनके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण विशेषता दिखती थी
समय समस्या के हालातों में स्पष्ट विवेक झलकती थी
तीनों कक्ष जब पार किए प्रभु बन गए गंभीर रे माई
की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
दुनियां की बन्धन को सब छोड़ दिए त्यागकर
पार किए अवस्था मोह का पा गए ज्ञान को
सत्य और ज्ञान की ओर जाते रहे ध्यान में
अनुभव के वैराग्य में मन चला तानकर
जानने की इच्छा जागी जीवन की उद्देश्य जो
बढ़ते गए आगे प्रभु मसला आया छानकर
तीनों कक्ष जब पार किए प्रभु बन गए गंभीर रे माई
की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
ऐसी संकल्प की प्रभु वीणा उठाए है
कोई रोता कोई गाता कोई शोक समाए है
समुचित प्रकृति में माई खुशियां है छाई
हरियाली मुस्काने लगी आँख भरी आई
सूखा पड़ा जीवन फिर नवजीवन जल भरता
अचरा से पोछे कोई कोई दृश्य में घुलता
मानवता आशा लेकर बुद्ध घर में आए हैं
शान्ति नवजीवन की सन्देश को पेठाए है
तीनों कक्ष जब पार किए प्रभु बन गए गंभीर रे माई
की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
गोबर से लीपा आँगन सुन्दर कितना लागे
भारतीय संस्कृति में गोमय शुद्ध जागे
मंगल का प्रतीक है ये प्रांगड़ घर की गरिमा
बढ़ जाता शोभा घर का लीपा घर अंगना
हरि भरी धरती पर धूल जब उग आते हैं
गोबर से लीपाया आंगन रत्न बन जाते है
कुदरत की सुंदरता कितना मनोहारी लागे
अनमोल आकर्षक लागे पवित्रता है जागे
तीनों कक्ष जब पार किए प्रभु बन गए गंभीर रे माई
की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
छोटे छोटे पेड़ सुन्दर लागे सारे द्वार पर
अंगना फुलवारी लागे शोभा बढे द्वार पर
बहुते मनोहर दिखता अंगना द्वार जी
सुन्दरता की अद्भुत धन दे गए कुबेर जी
तीनों त्रिलोक जैसा सजा है दरबार
फीका लागे कुबेर का दुनियां संसार
बहुते दुर्लभ से ऐसा सुंदर महल मिलते
करते प्रशंसा प्रभु द्वार जगमग खिलते
तीनों कक्ष जब पार किए प्रभु बन गए गंभीर रे माई
की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
शान्त करुणामय भगवन आगे बढ़ते जाते
अंगना द्वार पर सब शिक्षा देते जाते
कदमों में शान्ति प्रभु के मन करुणा था
अपने जीवन का सत्य दया और त्याग था
जीवन के मार्ग में प्रभु ज्ञान ढूंढने निकले
अपनी महान गुणों का सन्देश सबको देते
मधुर आवाज चारों ओर फैली गूंज कर
सदाचार मानवता का मार्ग दिए खोजकर
तीनों कक्ष जब पार किए प्रभु बन गए गंभीर रे माई
की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
गीत=} #की माई रे हरियाली मुस्काए जैसे जाग उठा नवनीर रे माई
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