धन नश्वर है परंतु सत्य चरित्र प्रेम और मानवता ही मनुष्य की वास्तविक संपत्ति हैं। इस गीत में कवि ने धन-संपत्ति मोह-माया और भौतिक वैभव की नश्वरता को समझाते हुए मानव जीवन में ज्ञान नैतिकता मानवता प्रेम करुणा और अहिंसा के महत्व को बताया है कि मनुष्य केवल धन और संपत्ति के पीछे भागता है वह जीवन के सच्चे मूल्यों और ज्ञान को खो देता है। धन महल और वैभव स्थायी नहीं हैं समय के साथ सब समाप्त हो जाते हैं। मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके श्रेष्ठ चरित्र अच्छे विचार दया और सद्व्यवहार से बनती है। भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेश का सुंदर चित्रण किया गया है। बुद्ध ने राजसी सुखों का त्याग करके सत्य करुणा और अहिंसा का मार्ग अपनाया तथा संसार को शांति और मानवता का संदेश दिया। कवि प्रकृति और सुंदर वातावरण के माध्यम से बुद्ध के शुद्ध विचारों की महिमा को प्रस्तुत करते हैं। अंततः गीत हमें यह शिक्षा देता है कि सच्चा सुख धन-दौलत में नहीं बल्कि सत्य प्रेम दया त्याग और मानवता में है। मनुष्य को भौतिक मोह से ऊपर उठकर अपने जीवन को अच्छे कर्मों और श्रेष्ठ विचारों से सुंदर बनाना चाहिए। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,#दिल तोड़कर दिल पे रोया आँख में पानी आई, #Dil Todkar Dil Pe Roya Aankhon mein Pani AaiWriter ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #दिल तोड़कर दिल पे रोया आँख में पानी आई
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धन संपत्ति के पीछे जिसने भागा उसने ज्ञान गंवाई
दिल तोड़कर दिल पे रोया आँख में पानी आई
जीवन में नैतिकता मानवता का स्थान है ऊपर जीवन स्वर्ग बनाता
अच्छे विचार सही गुण मानव को अमर यश दिखलाता
सच्ची शांति मिलति जीवन की राह बताती
सम्मान व्यवहार की गुण सौंपकर मानव उसे बनाती
ऊंचे ऊंचे महलों में जब गूंजा बुद्ध का आवाज गुरुवर
सुन्दर मनोहारी लागे लागे शुद्ध विचार गुरुवर
महल अटारियों के सुन्दर रंग में शोभे
जैसे आकाश बात करे इंद्र धनुष से
पेड़ की टहनियों पे बैठा तोता गाता है
गीत गुनगुनाकर तोता बुद्ध को सुनाता है
मैना की मधुर राग बड़ी चहचहाती है
लगता है मुझको अब अपनी प्रेम सुनाती है
ऊंचे ऊंचे महलों में जब गूंजा बुद्ध का आवाज गुरुवर
सुन्दर मनोहारी लागे लागे शुद्ध विचार गुरुवर
मानव निर्मित सुंदरता की झलक झलकती आंखो में
दृश्य दिखाता मनमोहक आवाज गूंजे है बागों में
सुन्दर दिव्य दृश्य को देखकर मन में शांति छाई
मन को ऐसा मोह लिया है जैसे उज्ज्वल लाली
रंग महल की सुन्दर उजला आसमा जैसा दिखाता
देख कतारों की लड़ियाँ रंग बिरंगी फूल लगता
स्वर्ग धरती पर आया है धरती को खूब सजाया है
अमरपुरी की जैसी शक्ति चारों ओर फैलाया है
ऊंचे ऊंचे महलों में जब गूंजा बुद्ध का आवाज गुरुवर
सुन्दर मनोहारी लागे लागे शुद्ध विचार गुरुवर
प्रेम शक्ति की दिव्य ज्योति आज महल में आई है
आनन्द मगन में खिला है मन आश्चर्य उभरकर आई है
लगा मेला दुनियां का जैसे धरती पे स्वर्ग आया
सुखद आनन्द की लड़ियों में सौंदर्य प्रेम दिखलाया
देख रही है आँखें सब कुछ मौन मुँह खड़ा है
सच्चा महान व्यक्ति कभी वैभव में नहीं पड़ा है
अपने ज्ञान त्याग सत्य करुणा से पहचान में आता
दुनियां को प्रेम शान्ति के मार्ग पर बुद्ध है ज्ञान बताता
ऊंचे ऊंचे महलों में जब गूंजा बुद्ध का आवाज गुरुवर
सुन्दर मनोहारी लागे लागे शुद्ध विचार गुरुवर
ईश्वर को कभी मोह माया से आकर्षण नहीं होता है
राजमहल के सुखों को वो कब से त्याग चुका है
भौतिक सुख सम्पत्ति की उनको नहीं जरूरत
उठ चुके है ऊपर इससे महान वैरागी भीतर
सत्य करुणा की ज्योति को फैलाने प्रभु आए
अहिंसा मानवता का सन्देश बताने आए
दुनियां के प्रिय है प्रभु अपनी ज्ञान की ज्योति से
हर लेते है दुःख को सबकी प्रेम करते है रोटी से
ऊंचे ऊंचे महलों में जब गूंजा बुद्ध का आवाज गुरुवर
सुन्दर मनोहारी लागे लागे शुद्ध विचार गुरुवर
शुद्ध बचन की बागों से प्रभु ने ज्ञान को लाया
धन दौलत स्थाई नहीं है समय के साथ नष्ट हो जाता
कहते है प्रभु दिल से मानव जीतना वैभव पा ले
छोड़ जाएगा अत्र तत्र में मृत्यु को पहचाने
समय बदलता धन बदलता इसका कोई महत्त्व ना
वास्तव में आभूषण है जीवन का सत्य सही
श्रेष्ठ चरित्र पाया जिसने उसमें गुण है जागी
दया भाव से ऊंचा उठकर मानवता है जागी
ऊंचे ऊंचे महलों में जब गूंजा बुद्ध का आवाज गुरुवर
सुन्दर मनोहारी लागे लागे शुद्ध विचार गुरुवर
गीत=} #दिल तोड़कर दिल पे रोया आँख में पानी आई
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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