यह रचना एक ऐसी प्रार्थना है, जिसमें कवि सांसारिक उपलब्धियों के बजाय सत्य कर्म, दृढ़ चरित्र, निष्काम सेवा, ज्ञान, करुणा और मानव-प्रेम को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है। कवि अपने गुरुवर से ऐसी शक्ति और आत्मबल की कामना करता है, जिससे उसका चरित्र विपरीत परिस्थितियों में भी अटल रहे और वह सत्य, प्रेम, सेवा, करुणा, विवेक तथा मानवता के मार्ग से कभी विचलित न हो। कवि प्रार्थना करता है कि संसार के किसी भी प्रलोभन—धन, पद, प्रतिष्ठा या स्वार्थ—के कारण वह अपने सत्य और सिद्धांतों से समझौता न करे। वह प्रेम, करुणा, ईमानदारी, निष्काम कर्म और स्वाभिमान को अपने जीवन का आधार बनाना चाहता है। उसकी इच्छा है कि वह दूसरों के दुःख में सहभागी बने, उनके सुख में प्रसन्न हो और कठिन परिस्थितियों में जरूरतमंदों का सहारा बने। इस गीत में ज्ञान, विज्ञान, धर्म, दर्शन और नीति के माध्यम से सत्य की खोज करने की भावना भी व्यक्त हुई है। कवि केवल किसी बात को मान लेने के बजाय उसे अपने अनुभव और विवेक की कसौटी पर परखना चाहता है। वह बाहरी रूप, जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता को सर्वोच्च धर्म मानता है। धरती और गंगा को कवि ऐसी माताओं के रूप में प्रस्तुत करता है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी का पालन-पोषण करती हैं। इस प्रकार रचना मनुष्य की समानता, एकता और भाईचारे का संदेश देती है। संपूर्ण गीत का मूल भाव यही है कि सच्चा और सार्थक जीवन धन या प्रतिष्ठा प्राप्त करने में नहीं, बल्कि सत्य के प्रति निष्ठावान रहते हुए प्रेम, सेवा, करुणा, विवेक और मानवता के मार्ग पर चलने में है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो #Pralobhan Men Bhatku Naa Mai Saty Karam Mujhe Dedo, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Pralobhan Men Bhatku Naa Mai Saty Karam Mujhe Dedo
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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हे गुरुवर गुरुदेव मेरे मुझे ऐसी दृढ़ता देदो
प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो
सबके साथ मैं प्रेम करु मुझे यहीं भक्ति तुम देदो
दुःख सुख में सहभागी बनजाऊँ ऐसी करुणा देदो
दुखियों का मैं सेवा करलू खुशियों के साथ हंस लूं
निष्काम भाव से चलते चलते इस जीवन को पार करु
ऐसी भर दो मुझमे जिसमें सिद्ध करने की क्षमता हो
ज्ञान विज्ञान धर्म दर्शन नीति की अपेक्षा हो
बल बुद्धि मुझे विद्या देदो देदो ज्ञान समझ
खोज निकालू उस सत्य को जहां भरम का ग़म
दर्शन का सब काम समस्त है अनुभव को गठित करु
कर विवेचन अनुभव का सत्य को ढूंढ निकालू
हे गुरुवर गुरुदेव मेरे मुझे ऐसी दृढ़ता देदो
प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो
लालच ना मुझको तुम देना धन पद प्रतिष्ठा स्वार्थ का
मैं अपने सिद्धांतों पर अडिग रहूं तेरे प्यार का
धर्म सत्य के मार्ग से विचलित न होऊं पाऊं
कर्तव्य करु ईमानदारी और स्वाभिमान से
हालात कैसी भी हो पर मेरा चरित्र अटल रहे
संकल्प हमारी दृढ़ता से फूलों जैसा चमक रहे
मैं अपने सुख का स्वार्थी ना होऊं पाऊं
सबको प्रेम और सहयोग करु
अपनत्व का भाव रखकर किसी से दूर ना रह पाऊं
कोई छूटे ना मुझसे अकेला सबके दुःख में हाथ बटाऊं
सबके साथ मैं मिलकर चल लू दुःख सुख को समझूं
ऐसा ज्ञान मुझे तुम देदो दिल में प्रेम भरू
हे गुरुवर गुरुदेव मेरे मुझे ऐसी दृढ़ता देदो
प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो
सच्ची मानवता और सेवा का लक्षण मुझमें भर दो
भोंगू साथ में सुख दुःख को ऐसी आशय दे दो
दूसरे की सुख में खुशियां बांटू प्रसन्न रहूं
दूसरे के दुःख में सहभागी बन जाऊ
कठिन समय में उनका सहारा बनकर मैं साथ रहूं
अच्छे समय में साथ रहकर जीवन का प्रेम बांटु
हे गुरुवर मैं शिष्य तुम्हारा तुझसे ज्ञान मांगू
शक्ति और विवेक मांगू आदर्शों का पालन मैं करु
इस जीवन का असल कहानी देखा मैं आत्मा से
धर्म जाती का मान नहीं है मानवता के प्यार में
बाहरी रूप और मानवीय गुणों को मिलती है समानता
केवल धार्मिक अस्तर पर भेदभाव है अनुचित
हे गुरुवर गुरुदेव मेरे मुझे ऐसी दृढ़ता देदो
प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो
ये कैसा जीवन है गुरुवर बाहरी रूप रंग बदलाव
मन में क्या धारण किया अलग अलग रूप दिखाए
तोते जैसी मुड़ी नाक तन की एक बनावट
रूप रंग से अलग किया है अपने को दिखावट
अलग व्यवहार दिखाते अलग अलग के रंग
कोई पूजे धरती को तो कोई पूजे सतरंग
तरह तरह के लोग यहां है तरह तरह की बुद्धि
सब का तन मन एक समान कैसा है ये शुद्धि
सबका मालिक एक है धरती अन्न को देती
गंगा देती जल को सबकी प्यास बुझाती
ये सृष्टि पालन पोषण करता कभी नहीं बतलाता
आँचल ढाक सुलाती धरती माँ कभी नहीं हटाती
हे गुरुवर गुरुदेव मेरे मुझे ऐसी दृढ़ता देदो
प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो
गीत=} #प्रलोभन में भटकूं ना मैं सत्य करम मुझे देदो
#Pralobhan Men Bhatku Naa Mai Saty Karam Mujhe Dedo
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