इस गीत का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए धैर्य त्याग सेवा और मातृभक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। यही जीवन को सार्थक और महान बनाता है। यह गीत जीवन के संघर्ष आत्मस्वीकार मातृभक्ति और त्याग का मार्मिक चित्रण करता है। कवि अपने जीवन में आए दुःखों का दोष किसी अन्य को नहीं देता बल्कि उन्हें अपने कर्मों और अपने चुने हुए मार्ग का परिणाम मानकर स्वीकार करता है। वह अपनी माँ से विनती करता है कि उसके कष्टों को देखकर व्याकुल न हों और धैर्य तथा संयम बनाए रखें। कवि अपने संघर्षों को जीवन का दंड मानते हुए उन्हें साहसपूर्वक सहने का संकल्प व्यक्त करता है। वह बताता है कि संसार में धैर्य संयम और सेवा ही सबसे बड़ी शक्ति हैं। अंततः वह सांसारिक मोह-माया का त्याग कर स्वयं को माँ के चरणों में समर्पित कर देता है और अपने जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य उनकी सेवा भक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण को मानता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई, #Maine Khud Hi Bulaya Hai Dukh Ki Harjai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Maine Khud Hi Bulaya Hai Dukh Ki Harjai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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काहे को चिन्ता में व्याकुल है तेरा मन माई
मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई
पूरे जीवन भर मैं सजा में बिताऊंगा
उम्र कैद की दंड को आँखो से सजाऊंगा
जैसे निकाल देता राजा राज्य से अपराधी को
वैसे निर्वासित हूँ मैं जिन्दगी की राती को
छोटी मोटी घटना से विचलित ना होवों
बहने ना दो आँसू को सिसकर ना रोवो
सपनों में रोती हो तो दिल मेरा सोता ना
तेरी यादों में डूबकर तुझसे दूर अब होता ना
काहे को चिन्ता में व्याकुल है तेरा मन माई
मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई
मेरे निर्वासन को माँ याद ना करों तुम
विनती करता हूँ तुमसे दंड ना देखो तुम
तन मन की रोम रोम में दुःख ना भरो
ना जलो तुम आग में केवल देखती रहो
धैर्य से बड़ा कोई सीख नाहीं दुनियां में
संयम की शिक्षा दुख को जार देती करुणा में
चँचल मन बेचैन होता आंसुओं की धारा में
रुक रुक रुलाता है मन की व्याध में
घर हो या देश हो सबको छोड़ कर जाना है
जीवन भर का दंड माई यहीं पर निभाना है
काहे को चिन्ता में व्याकुल है तेरा मन माई
मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई
मेरी उद्देश्य माँ तेरे पास आने को
छोड़ कर चला हूँ अब दर्शन पाने को
आँसू भरी आँखों से रोक देता यहां लोग
दिखता नाराज मुझे यहां सब लोग
करते है क्रोध लोग दिखते उदास हैं
दिखता स्पष्ट ना डर का स्वभाव है
सब है हितैषी यहां कोई ना कोई ना मदद है
दूर दूर की चिन्ता दिखता कहर है
दिखता जो सच वो सत्य नाही होता
माई बिना बेटा तड़पें बेटा छोड़ जाता
काहे को चिन्ता में व्याकुल है तेरा मन माई
मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई
भावुक भावनाओं को छोड़ दिया मैने
भूल गया बंधनों को जो गुलाम समझे
ममता भुलाया मैने करुणा भुलाया
मातृभूमि की चरणों में अपने को पेठाया
तेरी चरणों की धूल को माथे पर सजाना है
यहीं अभिलाषा है माँ तुझी में मिट जाना है
सब कुछ को त्यागा मै माँ भावना जगा कर
मोह माया छोड़ आया तुझमें भुलाकर
सेवा तेरी करऊंगा मैं भोग को लगाऊंगा
तुझको खिलाकर माता भूखा रह जाऊंगा
काहे को चिन्ता में व्याकुल है तेरा मन माई
मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई
गीत =} #मैंने खुद ही बुलाया है दुःख की हरजाई
#Maine Khud Hi Bulaya Hai Dukh Ki Harjai
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