इस गीत का मुख्य संदेश है कि मनुष्य की महानता धन-दौलत, शान-शौकत या दिखावे में नहीं बल्कि उसके अच्छे कर्म विनम्रता प्रेम संघर्ष स्वाभिमान और मानवता में होती है। गीत में गरीबी में बीते बचपन जीवन के अभावों और कठिन संघर्षों का चित्रण किया गया है। इन परिस्थितियों ने मनुष्य को कमजोर नहीं बनाया बल्कि मेहनत धैर्य और साहस के साथ जीवन का सामना करना सिखाया। गीत में धनवान और अहंकारी लोगों का झूठा गुणगान करने के बजाय श्रम, कर्म और आत्मसम्मान को महत्व देने की प्रेरणा दी गई है। समाज में व्याप्त स्वार्थ असमानता और दिखावे के बीच गरीब और श्रमिक वर्ग को अपने कर्म और साहस पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। साथ ही माँ को प्रथम गुरु मानते हुए उनके दिए संस्कारों विनम्रता प्रेम सम्मान और मानवता को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया गया है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना, #Main Pala Bada Hoon, Nirdhan Din Gareeb Mein Na,
गीत=} #मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
#Main Pala Bada Hoon, Nirdhan Din Gareeb Mein Na
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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मुझसे झूठी ना कराओ गुणगान उनकी
मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
कैसे मैं गुणगान करु तड़प रहा था किल्लत में
ठाट बाट में बैठे थे वो निरंकुश की जिल्लत में
अहंकार दिखावे दिख रहा था बादल जैसा गरज गरज कर
तड़प रही थी दुनियां सारी आँख में आँसू भर भर कर
ना कोई असमानता था ना कोई सामाजिक
गुण दोष क्षीणी लड़ाई मारे जाते निर्धन
सीधे साधे लोग यहां के श्रमिक वर्ग की भावना है
कर्मों पे विश्वास रखते है जीवन जंग की खेवना है
मुझसे झूठी ना कराओ गुणगान उनकी
मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
दर्द नहीं मुझे होता है देख कर तेरी वैभव को
दर्द होता है देख कर तेरी झूठी गुण प्रशंसा को
अपने शान शौकत की बातें करते करते हो दिखावा
ना होती है हानि हमको देखकर तेरी छावां
कैसे करु प्रशंसा तेरी कैसे करु गुणगान
देखा है मैं सुख सुविधा को ऐश्वर्य नहीं अभिमान
जन्म मेरा गरीब हुआ था गरीब मेरा परिवार
देखा ना उस वैभव को जहां सजते है ताज
ना मैं अनुभव रखता ना मैं रखता इच्छा
ना करु मैं झूठी प्रशंसा ना वैभव की समीक्षा
मुझसे झूठी ना कराओ गुणगान उनकी
मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
बचपन से हमने तो किल्लत में जिया है
मुश्किल दिक्कत बाधा अड़चन संकट में खड़ा है
दबी हुई दूब के जैसा जीवन था मेरा
हरा होता तो चार जाते थे पशुओं की मेला
ये दुनियां स्वार्थी है स्वार्थ में जीती मरती
अपने लाभ की आशा में लोभ जिगर में रखती
जीवन का हर पल संघर्ष है बितते पल का राही
साहस और धैर्य ना छूटे खाली पड़ी जिंदगानी
स्वार्थ भरा है दुनियां में स्वार्थी बने पुजारी
देख उन्नत को रोक देते है संकेत होता है भारी
मुझसे झूठी ना कराओ गुणगान उनकी
मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
मेरे प्रतिभा के अंदर गुरुवर मेरी माता रहती
वरदान दिया है मुझको मेरे दिल से कहती
कुदरत और दुनियां की शोभा कितना सुन्दर जग है
नम्र विनम्र की कुदरत में अहंकार का घर ना है
ना मैं श्रेष्ठ ना मैं ऊंचा ना मैं धनवान
दिख रहा जो प्रेम की नगरी उसका मैं रखवार
देखा है इस दुनियां में मैं कितने लोग धनी है
घमंड नहीं है उसको जो नम्र विनम्र रहा है
सबका आदर करता है जो नम्र विनम्र होता
मिलता है सम्मान दुनियां में जिसको प्रेम होता
मुझसे झूठी ना कराओ गुणगान उनकी
मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
गीत=} #मैं पला बड़ा हूँ निर्धन दिन गरीब में ना
#Main Pala Bada Hoon, Nirdhan Din Gareeb Mein Na
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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