इस गीत में कवि बदलते हुए समाज और मनुष्य की अंधानुकरण करने वाली प्रवृत्ति पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करता है। कवि का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को आँख मूंदकर किसी का अनुसरण नहीं करना चाहिए, बल्कि सत्य-असत्य, उचित-अनुचित तथा लाभ-हानि का विचार करके विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।कवि कहता है कि आज बहुत से लोग बिना सोचे-विचारे दूसरों के पीछे चलते रहते हैं। वे यह विचार नहीं करते कि जिस मार्ग का वे अनुसरण कर रहे हैं, वह सत्य, उचित और कल्याणकारी है या नहीं। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में गुरु, ज्ञान और विवेक को मार्गदर्शक बनाकर सही दिशा का चुनाव करना चाहिए।गीत में कवि परंपराओं और पूर्वजों के संस्कारों का सम्मान करता है, लेकिन साथ ही यह भी समझाता है कि प्रत्येक पुरानी परंपरा को केवल पुराना होने के कारण स्वीकार करना उचित नहीं है। जो परंपराएँ उपयोगी, उचित और समाज के कल्याणकारी हैं, उन्हें अपनाना चाहिए; लेकिन जो परंपराएँ समय के साथ अनुचित या अनुपयोगी हो गई हैं, उन्हें विवेक और साहस के साथ बदलने का प्रयास करना चाहिए।कवि मनुष्य की बढ़ती इच्छाओं, धन-दौलत की चाह, चिंता और मानसिक अशांति का भी चित्रण करता है। केवल भौतिक सुख और इच्छाओं की पूर्ति के पीछे भागने से जीवन में वास्तविक शांति प्राप्त नहीं होती। इसके लिए संतुलित विचार, अच्छे कर्म, संयम और सही जीवन-दृष्टि आवश्यक है।गीत में जीवन की नश्वरता और संघर्षों का भी सुंदर चित्रण मिलता है। संसार में अज्ञान का अंधकार भी है और ज्ञान का प्रकाश भी। जीवन में कठिनाइयाँ, अन्याय, बाधाएँ और भय आते रहते हैं, लेकिन मनुष्य यदि चिंतन, साहस, ज्ञान और विवेक का सहारा ले तो इन परिस्थितियों का सामना कर सकता है।अतः इस गीत का मूल संदेश यही है कि मनुष्य को अंधानुकरण छोड़कर विवेकपूर्ण जीवन जीना चाहिए। परंपरा का सम्मान करते हुए सत्य को पहचानना, अनुचित का विरोध करना, कठिनाइयों का साहस से सामना करना और गुरु-ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ना ही श्रेष्ठ एवं सार्थक जीवन का आधार है। #लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है #Logwa Aankh Moond Kar Kare Anusaran, Bas Chalte Jaata Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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गुरुवर देख जमाना कैसे अब बदलता जाता है
लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
पीछे पीछे चलता है नकल जिगर से करता है
नियम हो या आज्ञा हो आँख में आँसू भरता है
कैसे मिलता उसको साहस विवेकहीन है उसकी आदत
दृढ़ निश्चय के साथ ना चलता सत्य का मार्ग ना ढूंढता
हालात कठिन जब आती है बुद्धि को दहलाती
कर्मों का सब फल दिखाकर मन में द्वेष जगाती है
गुरुवर देख जमाना कैसे अब बदलता जाता है
लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
मन की ऐसी धारणा गुरुवर मन में घर बनाई है
बाप दादा जो करते आए उसमें मन लगाई है
कभी कभी होता है ऐसा मन आत्मा का विरोध करता
पूर्वज जो करते आए है कैसे छोड़े उसका रास्ता
कौन ऐसी है परम्परा जो उचित आवश्यक होती है
ना करो तो युद्ध करो मन के घर में सोती है
ना कोई विचार करता है ना बुद्धि विवेक दिखाता
चलते चलते चलता है जिस राह पे पूर्वज राह दिखाता
गुरुवर देख जमाना कैसे अब बदलता जाता है
लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
रीति पुरानी गलत ना होती समझ हमारी समझ ना होती
अनुपयोगी को उपयोग करते साहस ना बदलने की
ईश्वर गुरु से करते प्रार्थना मनत कितने मांगते है
काम पूरा हो जाने पर धन दौलत को भरते हैं
शाम जिगर में आती है जब कितने इच्छा प्रकट होते
कैसे धन दौलत को पाएं प्रश्न मस्तिष्क में रहती है
नीद ना आती रातों को जब अवौषधी पिस कर पीते है
डॉक्टर वैद रोग बताते टेंशन बोल के खोते हैं
गुरुवर देख जमाना कैसे अब बदलता जाता है
लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
देखा है इस दुनियां में मैं लोग आते लोग जाते है
कोई ना चलता सृष्टि के साथ सब छोड़कर चलते हैं
इस जीवन के मार्ग निराली सब कुछ ईहां मिलता है
मुश्किल दिक्कत बाधा के साथ भय जिगर को ढूंढता है
अज्ञानरुपी अंधकार यहां है ज्ञान की भरमार यहां है
कौन किसे कब पाता है दुनियां की प्रयास यहां है
कोई पीछे हटता है तो कोई आगे बढ़ता
सहसा पूर्वक सामना करता आगे बढ़ते जाता
गुरुवर देख जमाना कैसे अब बदलता जाता है
लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
निराशा का अंधकार यहां है आशा का आश यहां
अन्याय कठिनाई अज्ञान यहां है पानी जैसा न्याय यहां है
चीर चले जो बाधा को साहस का साथ यहां है
चिन्तन साहस सन्देश यहां है सुख की डोरी शाम यहा है
कोई विरोधी कोई अनुसरण सबका साथ सहारा है
विवेकपूर्ण का सोच समर्थन कही लाल कही हरा है
भूत बैताल की नगरी तो शिव शंकर की टोली है
राम कृष्ण की महाभारत में दुर्योधन जैसा डगरी है
गुरुवर देख जमाना कैसे अब बदलता जाता है
लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
गीत=} #लोगवा आँख मूंद कर करे अनुसरण बस चलते जाता है
#Logwa Aankh Moond Kar Kare Anusaran, Bas Chalte Jaata Hai
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