इस गीत में रचनात्मक कर्म परिश्रम सद्गुण प्रेम सत्य न्याय और मानवीय मूल्यों का सुंदर संदेश दिया गया है। कवि के अनुसार मनुष्य का वास्तविक गौरव अपने लिए कुछ प्राप्त करने में नहीं बल्कि अपने गुणों और कर्मों से संसार को सुंदर बनाने में है। कवि ने सूर्य को कर्म प्रकाश और त्याग का प्रतीक माना है। जिस प्रकार सूर्य निरंतर अपनी किरणों से संसार को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने अच्छे विचारों, ज्ञान प्रेम और सद्कर्मों से समाज में प्रकाश फैलाना चाहिए। बुनकर के धागों की तरह अच्छे कर्म और सद्गुण मिलकर एक सुंदर और आदर्श समाज का निर्माण करते हैं। कवि स्वार्थ अन्याय और सामाजिक मूल्यों के पतन पर चिंता व्यक्त करता है। वह चाहता है कि मनुष्य अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, संस्कृति और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे। मनुष्य को निरंतर रचनात्मक कर्म करते हुए अपने सद्गुणों और प्रेम का प्रकाश दूसरों तक पहुँचाना चाहिए। यही जीवन की सच्ची सार्थकता और मानवता की वास्तविक विजय है। अंत में कवि माँ से बल, बुद्धि, विद्या और सद्मार्ग पर चलने की शक्ति माँगता है। उसे विश्वास है कि एक दिन सत्य, समानता, संस्कृति और न्याय की विजय अवश्य होगी। पाप और अन्याय का अंत होगा तथा संसार में फिर से नैतिकता, प्रेम और मानवता का प्रकाश फैलेगा। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना, #करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते, #Karte Rachnatamk Karu Apni Gun Barsate, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मैने देखा है दुनियां में कितने गर्व कमाते
करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते
अपने परिश्रम से प्रेम को जगाते है
दुनियां संसार को सुन्दर बनाते है
सूर्य को देखा है मैने सृष्टि को सजाते
बुनकर के जैसा अपने रोशनी से जगाते
पशु पक्षी दुनियां को ज्योति पैठाते है
मानवीय गुणों की क्रिया रोज बरसाते है
मैने देखा है दुनियां में कितने गर्व कमाते
करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते
बहुतें कुशलता से सूर्य अपना काम करते
बुनकर के धागे जैसा ज्योति बुनकर भरते
अपनी सुनहरी किरण से दुनियां को बुनते
प्रकाश की सौंदर्य जाली दुनियां में फैलाते
कितने सीखे हैं सूरज से कैसे ज्योति जागे
प्रेरणादायक शक्ति की कैसे भक्ति जागे
जीवन की अन्तिम क्षण तक रचना से ढूंढते है
तन मन मिटाकर ऋषि ज्योति जाली बुनते है
मैने देखा है दुनियां में कितने गर्व कमाते
करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते
अच्छे विचारों से वो सूरज को दिखाते
रोशनी की राहों को सबको बताते
ऐसा सिख देते है जो रोशनी जगाती
कर्मों से प्रेम जागे सृष्टि को जगाती
मानव जीवन के अन्त तक नई रचना करते हैं
सूर्य कि किरणों सद्गुण रोशनी बुनते
कर्मशिला प्रयासों मानव गुण जागते है
जीवन को सुन्दर राह में जिगर को उतारते हैं
मैने देखा है दुनियां में कितने गर्व कमाते
करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते
देखने में आया है जो देखकर व्याकुल है लोग
न्याय पे आधारित सपने टूटकर बिखरता अब
कितने है स्वार्थी लोग स्वार्थ में लुटाए मान
अपनी निज हितों के लिए सब कुछ बिगड़ा
स्वार्थों के खेल में खेल ऐसा खेले
टूट गई आशा सबकी निराशा में है रोए
दुनियां समाज की संस्कृति ही धरोहर है
रक्षा सम्मान जिम्मेदारी ही सरोवर है
मैने देखा है दुनियां में कितने गर्व कमाते
करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते
ममता की वेद माँ से मांगे दुनियां शक्ति
बल बुद्धि विद्या देदो देदो तन में शक्ति
आज ना तो कल माँ आयेगा वो कल
मान सम्मान न्याय देगा आवश्य
एकदिन ऐसा आएगा जब सत्य संस्कृति खिल जाएगा
आदर्शों का सम्मान पुनः वापस आजाएगा
सत्य समानता संस्कृति की विजय होगी
पाप का पराजय होगा न्याय राग सुनाएगी
मैने देखा है दुनियां में कितने गर्व कमाते
करते रचनात्मक कार्य अपनी गुण बरसाते
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