इस रचना का मूल संदेश है कि संवेदनशील हृदय दूसरे के दुःख को अपना दुःख समझता है। करुणा मनुष्य को भीतर से जोड़ती है और सच्ची अनुभूति ही मार्मिक साहित्य को जन्म देती है। इसलिए किसी की पीड़ा देखकर हमारा रो पड़ना कमजोरी नहीं, बल्कि हमारे भीतर जीवित मानवीय संवेदना और प्रेम का प्रमाण है। क्योंकि इस गीत में कवि ने करुणा संवेदना और सह-अनुभूति को व्यक्त किया है। कवि पूछता है कि दूसरों की पीड़ा देखकर हमारी आँखों में आँसू क्यों आ जाते हैं। कालिदास के विरही यक्ष और रति के विलाप के माध्यम से वह बताता है कि सच्चा रचनाकार अपने पात्रों के दुःख को केवल लिखता नहीं बल्कि उसे हृदय से महसूस करता है। जब किसी के दुःख को हम अपना दुःख समझने लगते हैं तभी सच्ची करुणा जन्म लेती है। दूसरे की पीड़ा में आँसू बहाना कमजोरी नहीं बल्कि जीवित और संवेदनशील हृदय की पहचान है। देखकर लीला भगवन का आँसू क्यों पी लेते है, #Dekhakar Lila Bhagawan Kaa Aanshu Kyo Pi Lete Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Dekhakar Lila Bhagawan Kaa Aanshu Kyo Pi Lete Hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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एक बात हमें बतलाना गुरुवर हम भी क्यों रो देते
देखकर लीला भगवन का आँसू क्यों पी लेते है
कैसे उनका वर्णन करते सुख दुख की बातों को
अनुभव होता दिल के अन्दर याद आता है रातों को
कवियों की कुछ टोली ने वर्णित किया है दुःख को
कोई जिया है दिल से तो कोई महसूस किया है खुद को
जिसने वर्णन किया है दुःख को वो बाहर से जिया
कैसा पात्र का पीड़ा गुरुवर कैसा करुणा का संघर्ष
कैसे विरह में जलता मानव कैसे टूटा है दिल
घटनाओं की दुनियां में मौन हुआ है मंजिल
काली दास देखा जब मैं आत्मा की गहराई से
विरही यक्ष की वेदना लिख दिए लिख दिए रुलाई में
लगता है मुझे ऐसा गुरुवर जैसे विरह को भोगा
चित्र चरित्र का चित्रण किया स्वयं को आह में झोंका
कैसी अनुभव आपकी गुरुवर समझ नहीं मैं पाता हूँ
पढ़ लेता हूँ आँखो से मैं दिल से मैं रो देता हूँ
दूसरे की पीड़ा को कैसे अनुभव आप कर लेते
लिख देते है दिल की बातें आखों को भर देते
जब रति की दिल में पीड़ा हुई तो कैसे आप जान लेते
क्या जी लेते उस पीड़ा को या हृदय में भर लेते
दिल को मेरे छू लेता है गहरी दर्द की पीड़ा
दुःख करुणा के अनुभव मन करता लीला
जब रति रोई थी शोक पीड़ा में क्या आप भी रोए थे
रोदन की करुणा की आग क्यो आप भी जले थे
मार्मिक चित्रण कर देते है स्वयं भी भावुक हो कर
रो देता है दिल मेरा जब पड़ लेता हूँ सोचकर
जब शिव की तीसरी आँख से अग्नि निकली
भस्म किया वो कामदेव महज्वाला बिखरी
काम देव की पत्नी जब करुणा विलाप में तड़पी
कैसे सामना किये दुःख का या रति के जैसा तड़पे
जब जब मेरी ध्यान जाती उस जीवन को देखने
पूछता है मेरी आत्मा आंसूओं से आँखें कैसे धोए
ना समझूं मैं रति के दुःख को ना समझूं मैं आपको
संवेदनशील हृदय था आपका या दुःख में विलाप किए थे
प्रेम करुणा दृष्टि में जब संवेदनशील उजागर होता है
रो देता है दुनियां सारी जैसे दिल रो देता है
करुणा के उस क्षण को गुरुवर कैसे आपने देखा
गहरे भाव से लिखा ग्रंथ को किस भावों से जिया
गीत =} #देखकर लीला भगवन का आँसू क्यों पी लेते है
#Dekhakar Lila Bhagawan Kaa Aanshu Kyo Pi Lete Hai
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