इस गीत में कवि ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन किया है। वीर सैनिकों ने अपने सुख परिवार और अधूरे सपनों की चिंता किए बिना राष्ट्रहित में सर्वोच्च बलिदान दिया और अपने जीवन को अमर कर दिया। यह गीत शहीदों की माताओं और परिवारों के दर्द को भी व्यक्त करता है। जिस माँ ने अपने पुत्र को जन्म देकर पाला-पोसा वही माँ उसके बलिदान के बाद तिरंगे को देखकर उसकी स्मृतियों में आँसू बहाती है। गीत समाज द्वारा वीरों के योगदान को भूल जाने की पीड़ा भी प्रकट करता है। जीवन की अनिश्चितता की ओर संकेत करते हुए कहता है कि युद्ध दुर्घटना बीमारी और अन्य अप्रत्याशित घटनाएँ किसी भी मनुष्य का जीवन समाप्त कर सकती हैं। इसलिए हमें अपने जीवन को सार्थक बनाते हुए राष्ट्र मानवता और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए।शहीदों का बलिदान अमूल्य है। वीरों और उनके परिवारों का सदैव सम्मान होना चाहिए। राष्ट्रहित और मानवता के लिए किया गया त्याग जीवन को अमर बना देता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल देश भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया, #Bharat Maa Ki Raksha Mein Apna Praan Nyochhawar Kiya, Writer ✍️ #Halendra Prasad
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प्रणाम करु मैं उन वीरों को जिसने बलिदान दिया
भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया
बलिदान अमूल्य है उन वीरों का जिसने कुर्बान किया है
प्राणत्याग कर दिया शहादत जीवन दान दिया
अर्पण समर्पण आहुति दिया आत्मबलिदान दिया
सो गया माता के गोद में अपने को अमर किया
भुला दिया इस दुनियां ने उन वीरों को जो प्राणों की बाजी लगाई
सर्वोच्च बलिदान को देकर जिसने अपने को मिटाई
प्रणाम करु मैं उन वीरों को जिसने बलिदान दिया
भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया
हंसते हंसते चढ़ गए फांसी अपनी कार्य पूरा कर पाए ना
सपने अधूरे जीवन अधूरे फिर भी प्राण दिया
प्राण दिया जब राष्ट्रहित में तिरंगा को लहराया
सीने पर गोली खाकर भारत का सर्वस्व दिखाया
कोई नहीं अब याद करता है उस योगदान की यादों को
सम्मान स्मरण की याद आया मुझे देख बिलखती माता को
जिसने अपना गोद दिया था जिसने पाला पोसा था
याद करती है देख तिरंगा जिसने आँचल ढाक सुलाया था
प्रणाम करु मैं उन वीरों को जिसने बलिदान दिया
भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया
जिसके जीवन का अंत दुखद है उससे जाकर पूछो
बड़ी विडंबना व्यक्ति करती आँख में आँसू जूझे
कभी कभी होता है ऐसा प्रतिभा भी मिट जाती है
पराक्रम ज्ञान तपस्या होते हुए भी सफल नहीं मिल पाती है
अद्भुत बुद्धि साहस कठोर परिश्रम का धनी दिखाया
मानवता के महत्वपूर्ण कार्य अपने को तपाया
पश्चाताप करते है लोग मन ही मन से कहते है
गौरवपूर्ण सुखद हो जीवन जो दुनियां के लिए जलते है
प्रणाम करु मैं उन वीरों को जिसने बलिदान दिया
भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया
वास्तविक जीवन में ऐसा होता नहीं हमेशा
कभी युद्ध कभी दुर्घटना कभी बीमारी समाप्त करता
उन वीरों को बुला लेती माँ अपेक्षा से पहले
अपने गोद में सुला लेती है अप्रत्याशित घटनाओं के जरिय
यहीं जीवन का अजीब विडंबना समझ में कुछ आता ना
महान सफल होने पर भी हालत नियंत्रण होता ना
मानव का गुण पुरुषार्थ कितना महत्वपूर्ण है
जीवन में घटनाओं का आना जाना कसूर है
प्रणाम करु मैं उन वीरों को जिसने बलिदान दिया
भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया
गीत =} #भारत माँ की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर है किया
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