यह गीत नारी सम्मान नारी शक्ति और समाज में उसके महत्वपूर्ण योगदान का प्रेरणादायक संदेश देता है। नारी वास्तव में जीवन की प्रेरणा, शक्ति और पथ-प्रदर्शक है। नारी केवल प्रेम ममता और त्याग की प्रतिमूर्ति ही नहीं बल्कि साहस ज्ञान बुद्धि और संघर्ष की प्रतीक भी है। कवि ने नारी को जीवन की मार्गदर्शक शक्ति बताया है जो परिवार और समाज को सही दिशा प्रदान करती है। जैसे अंधकार में तारा राह दिखाता है वैसे ही नारी अपने संस्कार, प्रेम और प्रेरणा से मानव जीवन को प्रकाश प्रदान करती है। नारी को कमजोर समझना उचित नहीं है। युगों से अनेक बंधनों और चुनौतियों का सामना करने के बाद आज नारी अपनी क्षमता को पहचानकर सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही है। उसके भीतर प्रेम, करुणा साहस और बुद्धिमत्ता जैसे दिव्य गुण विद्यमान हैं। इस गीत में कवि ने नारी की शक्ति महत्ता और गरिमा का सुंदर चित्रण करते हुए यह संदेश दिया है कि नारी का सम्मान और उत्थान ही समाज की वास्तविक प्रगति का आधार है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया, #Ki Maiya Re Kaahe Mein Bhatakti Naari Ab Sashakt Maiya, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत=} #की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
#Ki Maiya Re Kaahe Mein Bhatakti Naari Ab Sashakt Maiya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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उसकी महत्ता है स्पष्ट प्रेरणादायक पथ-प्रदर्शक मईया
की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
केवल स्वयं में जीना चाहे केवल स्वयं में रहना
तोड़ देती दिल को जब तो कैसे दिल में बसना
कितने युगों से नारी पूजमान बनी थी
तोड़ दिया बन्धन सारा काहे अब लड़ी थी
सुना है मैने उसको समाज की स्पष्टता के आंखों से
प्रकाश पुंज की जैसी होती चमकती आसमा में
उसकी महत्ता है स्पष्ट प्रेरणादायक पथ-प्रदर्शक मईया
की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
नारी शक्ति की महत्ता छिपी नहीं वस्तु जैसा
प्रत्यक्ष में प्रभावी होती दिन की उजाला जैसा
शक्तिशाली बलशाली ओजस्वी तेजस्वी है
मार्मिक दिलों को छूने वाली देवी सरस्वती है
नारी की व्यक्तित्व सुन्दर एक आकर्षण था
स्वाभाविक रूपो का आकर्षित की क्षमता था
बल बुद्धि बुद्धिमान थी नारी ना थी छलने वाली
पराक्रम की ऊर्जा नारी ताकत भरने वाली
उसकी महत्ता है स्पष्ट प्रेरणादायक पथ-प्रदर्शक मईया
की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
नारी में वो शक्ति माता कोई ना जान पाता है
पहचान ना पाता उसके गुणों से आचरण कहते जाता है
सभा समाज में विशेष स्थान है भीतर निहित गुण विद्यमान हैं
प्रेम करुणा और साहस का बुद्धिमत्ता आपार है
जो उसे विशिष्ट बनाता है वो उसके आचरण कहते हैं
पानी को भी पत्थर करदे पत्थर पानी बरसते है
आग हवा सब उसमें निहित आधी और तूफान
प्रेम की आग में प्रेम की नैया क्यों जलती पतवार
उसकी महत्ता है स्पष्ट प्रेरणादायक पथ-प्रदर्शक मईया
की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
नारी का स्वरूप केवल व्यक्तिगत महत्ता ना
दूसरे का मार्गदर्शक होती चट्टान जैसा सशक्त ना
जैसे तारा राह दिखाता रात को अंधेरों में
वैसे नारी राह दिखाती जीवन की सवेरो में
नारी की गुणों से माता सही दिशा मिल जाती थी
खिल जाता था बाग में फूल जब वो मुस्काती थी
जब भटक जाता था मानव तो राह दिखाने आती
अपनी प्रेरणा देकर नारी सही मार्ग दिखाती
उसकी महत्ता है स्पष्ट प्रेरणादायक पथ-प्रदर्शक मईया
की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
गीत=} #की मईया रे काहे में भटकती नारी अब सशक्त मईया
#Ki Maiya Re Kaahe Mein Bhatakti Naari Ab Sashakt Maiya
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