यह गीत वर्तमान समाज में पिता के त्याग, संघर्ष और निस्वार्थ समर्पण का मार्मिक चित्रण करता है। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाला पिता अक्सर स्वयं उपेक्षा का पात्र बन जाता है। गीत में उसके मौन प्रेम कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। साथ ही श्रीराम और भरत के आदर्श भाईचारे के माध्यम से प्रेम त्याग श्रद्धा विनम्रता और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया गया है। यह रचना समाज को पिता के सम्मान पारिवारिक एकता और भारतीय जीवन-मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,केवल घर चलाने वाले उस बाप को भी दूर किया रे, #Keval Ghar Chalane Wale Us Baap Ko Bhi Door Kiya Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Keval Ghar Chalane Wale Us Baap Ko Bhi Door Kiya Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
भगवन देख तमाशा दुनियां का बड़ी मजबूर किया रे
केवल घर चलाने वाले उस बाप को भी दूर किया रे
कहते है लोग यहाँ कैसी गुण गाते है
घर की जिम्मेदारी को अब बाप पर बरसाते है
ऐसा प्रतोख देते जैसे सब कुछ बाप हो
नींव हो परिवार का मजबूत उसके हाथ हो
त्यागी हो मेहनती हो और संस्कारी हो
सबके जीवन का वो पालन त्रिपुरारी हो
सबको सब कुछ दे दे मांगे जो भी उससे
बन जाएं जीवन सफल त्याग करे अपने
भगवन देख तमाशा दुनियां का बड़ी मजबूर किया रे
केवल घर चलाने वाले उस बाप को भी दूर किया रे
आदर्श पिता का ज्ञान सुनाते गुणों की बौछारों से
कह देते है सब कुछ उनको कर्मों के जिमवारो पे
जिम्मेवार पिता होता है सबके भरण पोषण का ज़िम्मा
अपने प्रेम को व्यक्त ना करता संघर्ष करता है दीन्हा
अनुशासन सुरक्षा होता होता सबकी शक्ति
प्रेरणा का आधार होता होता सबकी बुद्धि
ना जाने कोई उनको ना जाने कोई बाप को
पत्थर उसको कह देते है जो जंग लड़ा था आपको
सारी दुनियां भ्रम में जाती बाप को कोई ना पड़ता
को पड़ता है बाप को वे कभी विचलित ना होता
भगवन देख तमाशा दुनियां का बड़ी मजबूर किया रे
केवल घर चलाने वाले उस बाप को भी दूर किया रे
भाई से भाई नफरत करता भाई को ना जाने
भाई प्रेम का सर्वोच्च आदर्श है उसको ना पहचाने
राम भरत के बीच में प्रेम था कितना प्यारा भाईचारा
करते थे वो प्रेम भाई से दिखता था आदर्श वहां
जब राम बनवास गए तब भरत स्वीकार किए ना सिंहासन
राजमहल में रहते तपस्वी जैसा काटे अपना जीवन
त्यागपूर्ण का जीवन था भाई भक्ति की शक्ति
रख खड़ाऊँ सिंहासन पर पूजा करते थे भक्ति
अटूट श्रद्धा का परिचय मिलता त्याग विनम्रता के जीवन में
करुणा और आदर्श का जीवन गूंज रहा था महलों में
भगवन देख तमाशा दुनियां का बड़ी मजबूर किया रे
केवल घर चलाने वाले उस बाप को भी दूर किया रे
गीत=} #केवल घर चलाने वाले उस बाप को भी दूर किया रे
#Keval Ghar Chalane Wale Us Baap Ko Bhi Door Kiya Re
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