यह गीत मनुष्य के अंतर्मन की उस व्याकुल पुकार को व्यक्त करता है जो संसार के मोह माया छल और भ्रम के बीच सत्य की खोज में भटक रहा है। कवि माँ आदिशक्ति से प्रार्थना करता है कि वह उसे जीवन का वास्तविक सत्य सही मार्ग और विवेक प्रदान करें। गीत में संसार को भ्रम के जाल के रूप में चित्रित किया गया है, जहाँ आकर्षण स्वार्थ और असत्य के कारण मनुष्य सत्य से दूर होता जाता है। रचनाकार अनुभव करता है कि झूठ और छल कई बार सफल दिखाई देते हैं जबकि सत्य ईमानदारी और जिम्मेदारी का मार्ग कठिन प्रतीत होता है। फिर भी वही मार्ग अंततः आत्मसम्मान विश्वास शांति और स्थायी सुख का आधार बनता है। माँ का सान्निध्य आत्मबल ज्ञान और करुणा का प्रतीक है, जबकि उनसे दूर होने पर मन भ्रम दुख और अस्थिरता में भटकने लगता है। यह गीत केवल देवी-स्तुति नहीं बल्कि गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक चिंतन भी है। इसका मूल संदेश है कि जीवन के मायाजाल से मुक्ति केवल विवेक सत्य ईश्वर-भक्ति और आत्मज्ञान से संभव है। जो मनुष्य माँ की कृपा से सत्य का मार्ग अपनाता है वही भ्रम के अंधकार से निकलकर आत्मिक प्रकाश शांति और जीवन के वास्तविक सार को प्राप्त करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,#की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया, #Kee Miya Re Hamra Ke Dikhade Sach Ka Sar Miya, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Kee Miya Re Hamra Ke Dikhade Sach Ka Sar Miya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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फैला चारों ओर भरम का जंजाल मईया
की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
जीवन की जटिलता मुझको समझ में आता ना
माया की शक्ति मईया दिल को दुखता क्या
कैसे पहचानूं सच को लगता कठिन है
जानना आसान ना माँ बहुते जटिल है
भ्रम की जालो ने माता मुझको भरमाया
दिल की धड़कन को धीरे धीर आग में जलाया
फैला चारों ओर भरम का जंजाल मईया
की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
तूने जो बनाई दुनियां उसमें कल छल है
चारों ओर से घेरकर छाई है जीवन बेघर है
अद्भुत है छलजाल माई अद्भुत तेरी सृष्टि
माया जाल की भरम जाल है देखता मेरी दृष्टि
सीधा साधा दुनियां ना है मोह से भरा है
आकर्षण के भरम में कितने दिल जला है
दिखता ना सत्य हमको कैसे देख पाऊं मैं
भ्रम के जालों से कैसे निकल पाऊं मैं
फैला चारों ओर भरम का जंजाल मईया
की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
दुनियां की मायाजाल में दिल मेरा भटके
दिखे ना सच मुझको दर दर खटके
करता है भ्रमित मन को रास्ता ना बताता
दिलवो को तोड़ देता आँख को रुलाता
जब तक रहती है तू पास नहीं आता है
तेरे जाने पर मईया मुझको दुखाता है
काहे चली जाती है तू मुझको अब छोड़ के
लगता ना दिल मेरा दिलवे में घुल के
फैला चारों ओर भरम का जंजाल मईया
की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
झूठ बोलने वाला माई धोखा नाही खाता है
बच जाता परेशानी से माँ फूल जैसा खिल जाता है
कितने को देखा हूँ मैं लाभ को कमाते
जिम्मेदारियों से भागते वो बनाकर बहाने
पल भर की खुशियां माई पल के लिए आती है
दे देती हैं सब कुछ माई दिल ना रुलाती है
समझे ना जमाना इसको कितना दुख दाई है
झूठ की दीवारों का माई बिखरा जमाना है
फैला चारों ओर भरम का जंजाल मईया
की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
कितना कठोर है सच ईमानदारी और जिम्मेदारी का
बड़ी कठिन लगता है माँ इसकी पहचानी का
देता है सम्मान सबको सद्बुद्धि विश्वास को
खुशियां सजाकर लाता दिल की उजास को
प्राण का भी प्रेमी है जीवन का भी साथी
प्रकृति की खुशबू है प्रेम की आबादी
जरा दुख होता है माँ जरासी जोखिम
देता है सब कुछ माँ जब टिकता है साथी
फैला चारों ओर भरम का जंजाल मईया
की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
गीत=} #की मईया रे हमरा के दिखादे सच का सार मईया
#Kee Miya Re Hamra Ke Dikhade Sach Ka Sar Miya
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