इस गीत का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को सत्य ईमानदारी विवेक प्रेम और अच्छे कर्मों का पालन करना चाहिए तथा गुरु के मार्गदर्शन में अज्ञान छल और अंधविश्वास से दूर रहकर एक श्रेष्ठ संतुलित और सार्थक जीवन जीना चाहिए। क्योंकी इस गीत में समाज में फैले झूठ भ्रम और अंधविश्वास पर चिंता व्यक्त की गई है तथा ज्ञान विवेक प्रेम धैर्य साहस और अच्छे संस्कारों को जीवन का आधार बताया गया है। कवि गुरु को जीवन का सच्चा मार्गदर्शक मानते हुए उनकी तुलना माँ से करता है क्योंकि गुरु भी अपने शिष्यों को ज्ञान अनुशासन सद्बुद्धि और सही दिशा प्रदान करते हैं। इस गीत में कवि ने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए जीवन के महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर जानने की इच्छा प्रकट की है। कवि गुरु से पूछता है कि विश्वास ईमानदारी बेईमानी छल कपट और अंधविश्वास की सही पहचान क्या है। वह चाहता है कि गुरु उसे सत्य और असत्य का अंतर समझाएँ ताकि वह भ्रम और धोखे से बचकर सही मार्ग पर चल सके। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #कैसा होता है बेईमानी कैसा होता चालबाज गुरुजी, #Kaisa Hota Hai Beimani Kaisa Hota Chbaj Guruji, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Kaisa Hota Hai Beimani Kaisa Hota Chbaj Guruji
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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कैसा होता है भरोसा कैसा होता विश्वास गुरुजी
कैसा होता है बेईमानी कैसा होता चालबाज गुरुजी
मिथ्या कल्पित ढोंगी कैसा धोखेबाज है
कैसा ठग ढोंगी है कैसा मक्कार है
रूप रंग बता दो मुझको सेहरा दिखा दो
कैसा होता है मिथ्या एक झलक झलका दो
झूठे भरम का जग में क्यों बोल बाला है
काल्पनिक गलतफहमी में लोग क्यों इतना प्यारा है
जीवन को कठिन जब बनाता झूठ विश्वास
सही सोच अच्छे कर्म कैसे जगाता है आसान
कैसा होता है भरोसा कैसा होता विश्वास गुरुजी
कैसा होता है बेईमानी कैसा होता चालबाज गुरुजी
दुनियां में झूठों का ये जाल क्यों फैला है
चारों ओर अंध विश्वास का भ्रम क्यों फैला है
कैसे फंस जाते हैं लोग गलत की धारणा में
कैसे उलझ जाते हैं लोग भरम की दिशाओं में
कैसे सही काम करें बुद्धि को जगाकर
कैसे समझदारी लाएं मन को मानकर
भ्रमों की जाल से बचालो जग सारा
आया हूँ मैं तेरे पास जला दो रोशनी प्यारा
कोई हंसे कोई रोवै कोई मुस्काता
सबकी अपनी जीवन है कैसे जगमगाता
कैसा होता है भरोसा कैसा होता विश्वास गुरुजी
कैसा होता है बेईमानी कैसा होता चालबाज गुरुजी
प्रेम धैर्य साहस का संस्कार कैसे आता
कैसे आता सही में जीना कैसे शिक्षा पाता
जीना सिखादो हमको सही तरीके में
जीवन की पहली शिक्षा आप हो कबीले में
मार्गदर्शक प्रेरणा गुरुवर आप ही शिक्षक हो
जीवन की सीढ़ियों का आप ही गिरवर हो
आप ही हो ज्ञान गुरुवर आप ही हो चेतना
जिन्दगी की भूमिका में महत्व आपका आत्मा
व्यक्ति में व्यक्तिव्त का निर्माण करने वाला हो
जीवन भर का साथ देकर प्रेम करने वाला हो
कैसा होता है भरोसा कैसा होता विश्वास गुरुजी
कैसा होता है बेईमानी कैसा होता चालबाज गुरुजी
जैसे माँ का रूप शक्ति रक्षा की प्रतीक है
वैसे आपका रूप गुरुवर शिक्षा का प्रतीक है
अपने शिष्यों को शिक्षा देते आप अनुशासन में
जैसे संकट हरती माता बनकर विधाता में
दुष्टों का विनाश करती नेतृत्व करती है
वैसे गुरु शिक्षा देते अनुशंसा सिखाते है
करुणा की संरक्षण माँ तो आप सद्बुद्धि है
सुख शान्ति पढ़ाने वाले आप ही गुरुवर है
जीवन का ऐश्वर्य आप आप ही संतुलित
ज्ञान विज्ञान आप आप ही है अतुलित
कैसा होता है भरोसा कैसा होता विश्वास गुरुजी
कैसा होता है बेईमानी कैसा होता चालबाज गुरुजी
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