यह गीत मानव के बाहरी रूप और उसके आंतरिक चरित्र के अंतर को उजागर करता है। क्योंकि कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके चेहरे पहनावे या मीठी बातों से नहीं बल्कि उसके हृदय स्वभाव और कर्मों से होती है। संसार में अनेक लोग बाहर से अच्छे दिखाई देते हैं पर उनके मन में छल कपट और स्वार्थ छिपा होता है। वहीं कुछ लोग स्वभाव से कठोर या स्पष्टवादी प्रतीत होते हैं किंतु उनका हृदय निर्मल सच्चा और निष्कपट होता है। गीत यह संदेश देता है कि सत्य ईमानदारी प्रेम और विश्वास ही मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान हैं। इसलिए किसी का मूल्यांकन केवल बाहरी व्यवहार से नहीं बल्कि उसके आचरण और चरित्र से करना चाहिए। अंततः सच्चा निष्कपट और पवित्र हृदय वाला व्यक्ति ही वास्तविक अर्थों में श्रेष्ठ और आदर्श इंसान कहलाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,#जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता, #Jiska Dil Hai Na Achha Wo Ab Bachcha Na Hota., Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Jiska Dil Hai Na Achha Wo Ab Bachcha Na Hota.
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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दिखता बाहर से जो अच्छा वो अब अच्छा ना होता
जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
चेहरे की बनावट से ना मन को पढ़ा जाता
बाहरी रवैया से ना उसको जाना जाता
अजीब कहानी इस दुनियां का कैसे उसे पहचाने
कौन कैसा है इस दुनियां में कैसे उसको जाने
सच्चा को ढूंढे ये दुनियाएं आंगन दीप जलाकर
मिलता ना सच्चाई उसमें हृदय बीच बसाकर
दिखता बाहर से जो अच्छा वो अब अच्छा ना होता
जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
कहता है लोग इस दुनियां में ऐसी बात पेठाकर
जिसका दिल स्वभाव है अच्छा उसको लाओ बुलाकर
जो मानव अन्दर से सच्चा वो बाहर से कड़वी होता है
साफ सुथरा है दिल उसका अन्दर से सच्चा होता
आगे चलकर सच्चाई को समझ जाता है दिल से
सच्ची बातें कहता है वो सच्चाई में रहके
चाहे कोई समझे या ना समझे अब उसको
दिल का सच्चा दिल का अच्छा प्रेम करे वो जग को
दिखता बाहर से जो अच्छा वो अब अच्छा ना होता
जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
जिसका मन अन्दर से साफ ना उसमें छलवा बस्ती
ना जीता सच्चाई पे वो उसमें धोखा रहती
उज्ज्वल दिल ना होता है ना होता है निर्मल
बाहर से वो दिखता निर्मल अन्दर से होता है बुझदिल
ना उलझे ना सुलझे सीधा साधा दिखता
अन्दर से वो कपटी होता बाहर से अच्छा दिखाता
समझ ना पाते इस दुनियां में ऐसे लोग की चाल को
फंस जाते बातों में उसके भटक जाते हैं राह को
दिखता बाहर से जो अच्छा वो अब अच्छा ना होता
जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
जिसका मन साफ ना होता उसके मन में कोर कपट
सच्चाई से भाग जाता है जिसके मन में पाखंड का घर
मानव की पहचान होती है उसके दिल की आहट से
बाहरी रूप दिखावा करता जीवन की घबराहट से
जो मानव अन्दर से निर्मल बाहर कठोर दिखता
सच्चाई के मार्ग पे चलता सच्चाई में जीता
अंतरात्मा साफ सुथरा है मन को पवित्र रखता
विश्वास सच्चाई भरके मन को साफ रखता
दिखता बाहर से जो अच्छा वो अब अच्छा ना होता
जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
अन्दर से निष्कपट जो होता बाहर से कड़वा होता
अन्दर की सच्चाई अब बाहर से ना दिख पाता
अजीब व्यवहार है इस दुनियां की उसका मजा उड़ाते लोग
देख ना पाते अच्छे दिल को दिल में आग लगाते लोग
गलत समझते सच्चाई को अच्छाई ना दिखती
जान ना पाते सत्य की छाया अन्त में भटकती
जिसका मन है शुद्ध में रहता वो सच्चाई इंसान है
धरती माँ पुत्र कहाता वास्तव में बुद्धिमान है
दिखता बाहर से जो अच्छा वो अब अच्छा ना होता
जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
गीत=} #जिसका दिल है ना अच्छा वो अब बच्चा ना होता
#Jiska Dil Hai Na Achha Wo Ab Bachcha Na Hota.
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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