सच्चे कर्म, संतोष, प्रेम और आत्मिक शांति ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं, और जिसने जीवन को सत्यता से जी लिया, उसे किसी प्रकार का पछतावा नहीं रहता क्योंकि यह गीत जीवन के गहरे अनुभव, संतोष, कर्मनिष्ठा और आत्मिक शांति का भावपूर्ण वर्णन है। कवि कहते हैं कि जीवन के सुख-दुःख को हमने निकट से देखा और अनुभव किया है, इसलिए अब हमे किसी बात का पछतावा नहीं है। उन्होंने अपने सभी कर्म ईमानदारी, सच्चाई और नैतिकता के साथ निभाए तथा प्रेम, त्याग और सेवा को जीवन का आधार माना। गीत में यह भावना भी प्रकट होती है कि बाहरी धन-दौलत से अधिक मूल्यवान आत्मिक प्रेम और संतोष है। कवि मृत्यु को अंत नहीं बल्कि एक नई यात्रा मानते हैं और उसे शांत मन से स्वीकार करने के लिए तैयार दिखाई देते हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुँचकर वे संतुलन, शांति और आत्मिक प्रकाश का अनुभव करते हैं।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के, #Hum To Ji Liye Hai Dukh Sukh Ko Anubhav Se Dekh ke, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Hum To Ji Liye Hai Dukh Sukh Ko Anubhav Se Dekh ke
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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अब पछतावा ना चाहत है इस जीवन में हमको
हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
जीवन के हर कर्मों को मैं निष्ठा से निभाया
नैतिकता के निष्ठा पर मैं अपने को जलाया
समर्पण किया था कर्मों पर मन को खूब लगाकर
कर्मों को मैं करता था आत्मा को बरसा कर
सच्चाई से करता था मैं जो भी काम मिलता था
विश्वास जगाकर कर्म करता मैं कर्मों पे अब चलता था
अब पछतावा ना चाहत है इस जीवन में हमको
हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
संतोष जागर करता था मैं जो भी मुझको मिलता था
सुख शान्ति से चलता था मैं जैसे पानी बरसता था
डर ना लगता मुझको अब इस दुनियां को छोड़ने में
लगता है स्वाभाविक क्रिया दुनियां को अब देखने में
अंत नहीं है मौत यहां सबको एक दिन जाना है
एक नई है यात्रा मौत एक दिन गले लगाना है
संतुष्टि से कहता हूँ मैं शान्ति से अब कहता हूँ
यही अवस्था सन्तुलन है आत्मा से मैं कहता हूँ
अब पछतावा ना चाहत है इस जीवन में हमको
हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
मन मेरा कहता है मुझसे जहां जीवन का अन्त है
नहीं बनावट नहीं दिखावट खुशियों का वो संत है
स्वीकार किया जब आत्मा मेरी खुशियों में मन दौड़ गया
नम्र विनम्र में भाव जगाकर मुक्त के मार्ग पर चल दिया
जीवन के अब अंतिम छड़ में गहरी पड़ाव आया जब
शान्त संतुलित भावना खुशियों को बरसाया तब
जग जो लुटाया मैने उसे ज्यादा कमाया है
जीवन भर की कर्मों में मैं सच्चा दिल जलाया है
अब पछतावा ना चाहत है इस जीवन हमको
हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
ममता की माया में मैने माता को पुकारा था
प्रेम त्याग और सेवा में मैं अपने को निखारा था
इस जीवन में ज्याद मुझको अनुभव और सन्तोष दिया
बाहरी धन दौलत से ज्यादा आत्मिक मुझको प्रेम मिला
जीवन रूपी खेल को मैने देखा अपने अनुभव से
माँग रहा है तन मन मेरा छुट्टी अब इस दौलत से
जीवन के कर्मों से छुटकर अन्तिम पथ पर आया हूँ
तैयार खड़ा विश्राम खातिर मैं मृत्यु को प्रेम बनाया हूँ
अब पछतावा ना चाहत है इस जीवन हमको
हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
जीवन का अंधेरा अब जीवन से खत्म हो जाएगा
अज्ञान जीवन अन्त रात है मिट्टी में सो जाएगा
नई उज्ज्वल की आत्मिक शान्ति आएगी ले जाने जब
खुशियों से मैं चला जाऊंगा आएगी बुलाने जब
इस जीवन में सारे सुख दुःख माया का जंजाल है
कोई नहीं है किसी का यहां सबके अपना अपना प्यार है
जब नई सुबह आयेगी मुझको ले जाने को
मैं तैयार बैठा हूँ जाने को उसको गले लगाने को
अब पछतावा ना चाहत है इस जीवन में हमको
हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
गीत =} #हम तो जी लिए है दुख सुख को अनुभव से देख के
#Hum To Ji Liye Hai Dukh Sukh Ko Anubhav Se Dekh ke
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