लोभ और भय मनुष्य की आत्मिक शक्ति को नष्ट कर देते हैं जबकि प्रेम साहस और समर्पण ही जीवन का सच्चा आधार हैं।यह गीत मानव जीवन की आध्यात्मिक भावनात्मक और नैतिक गिरावट का मार्मिक चित्रण करता है क्योंकि मनुष्य के भीतर प्रेम, साहस, दृढ़ता और समर्पण था, जिससे वह हर कठिनाई का सामना निडर होकर करता था। लेकिन आज लोभ, धन, स्वार्थ और भय ने मनुष्य के हृदय को कमजोर कर दिया है संसार का मार्ग संघर्षों और परीक्षाओं से भरा है। जो व्यक्ति प्रेम, गुरु मार्ग और सत्य के पथ पर चलता है, उसे दुख-सुख दोनों सहने पड़ते हैं। परंतु वही मार्ग आत्मा को मजबूत बनाता है क्योंकि कवि वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हैं कि लोग अब प्रेम और कर्तव्य छोड़कर धन, डर और स्वार्थ में उलझ गए हैं। आध्यात्मिकता और त्याग का भाव कम होता जा रहा है !आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा, #Chhaya Lobh Ka Khumaar Dil Ka Toot Gaya Sab Khisa, Writer ✍️ #Halendra Prasad
आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन रचना
गीत =} #छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
#Chhaya Lobh Ka Khumaar Dil Ka Toot Gaya Sab Khisa
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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कहा गई वो साहस गुरुवर कहा गई वो दृढ़ता
छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
गहरा प्रेम समर्पण था निर्णय पर सब चलता था
बाधा हो या खतरा हो भयभीत कभी ना पड़ता था
मर गई साहस मर गई निर्णय मर गई प्रेम की दुनिया
टूट गया दृढ़ता का बन्धन यार मांगे धन धनियां
प्रेम नहीं अब पावन है महत्वपूर्ण जीवन अब घायल है
मर गई साहस दौलत पे सावन जेठ का तावन है
कहा गई वो साहस गुरुवर कहा गई वो दृढ़ता
छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
जीवन के इस मार्ग में गुरुवर बाधा और विपदा है
दुख सुख की रोटी है गुरुवर अपना ना कोई है
खतरे बहुत आते है गुरुजी कठीन समय को लाते है
जलता हृदय को पानी ना पत्थर ही बरसाते है
भय कायरता आ गई है डर की डोली सजा गई है
तोड़ गई विश्वास चुनौती सामना की तैयारी है
मन मंदिर में गूंजा सौतन जब सारी बातें भूल गया
तोड़ दिया बन्धन को दुनियां अन्त जीवन का रंग दिया
कहा गई वो साहस गुरुवर कहा गई वो दृढ़ता
छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
जीवन का मार्ग ऐसा है जहां दुनियां सारी लड़ती है
साहस प्रेम की चाहत में दरबदर में रहती है
भूल जाता उस दिन को दुनियां जिस दिन पहना माला को
धारण किया था छोड़कर सब कुछ जीवन की अफसाना को
प्रेम की दुनियां उसे ना भाती जिसने प्रेम को जाना ना
धन दौलत का किया सवारी जिसने यार को जाना ना
करती है स्वीकार ये दुनियां चलती ना उस पथ पे
जहां होती है पल पल परीक्षा निकल जाती वो कल से
कहा गई वो साहस गुरुवर कहा गई वो दृढ़ता
छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
छोड़ दिया उस मार्गो को लोग गैरिक वस्त्र सजा के
हट गए उस मार्गों से जो धारण किए थे अपनाके
जीवन के इस मार्ग पे जो चलता है उसको दुख सुख मिलते है
करते है मजबूत जीवन को पानी पीकर रहते है
देख बाधा को डरे है लोग कोट कचहरी खड़े है लोग
प्रेम कर्तव्य को छोड़कर अब जंग मैदान में खड़े है लोग
कौन कहता है खतरा ना देख डगर कोई अपना ना
खड़ी है लेकर हाथ तलवार कोई किसी का सपना ना
कहा गई वो साहस गुरुवर कहा गई वो दृढ़ता
छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
गीत =} #छाया लोभ का खुमार दिल का टूट गया सब खिसा
#Chhaya Lobh Ka Khumaar Dil Ka Toot Gaya Sab Khisa
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