यह गीत करुणा, वात्सल्य, त्याग और संवेदनशीलता का अत्यंत मार्मिक चित्रण है। क्योंकि इस गीत में कवि ने अपने कोमल और भावुक हृदय की पीड़ा को व्यक्त किया है। कवि माँ से कहता है कि उसने ऐसा संवेदनशील दिल दिया है जो दूसरों का दुःख देखकर अपना दुःख भूल जाता है। कवि का हृदय प्रेम, करुणा, नम्रता और त्याग से भरा है, लेकिन संसार की कठोरता उसे बार-बार आहत करती है। गीत में माँ के प्रति गहरा प्रेम, जीवन की पीड़ा, स्मृतियों का दर्द और भावनात्मक संघर्ष दिखाई देता है। कवि स्वार्थ से दूर रहकर प्रेम और मानवता के मार्ग पर चलना चाहता है। अंत में कवि माँ से शक्ति और मुक्ति की कामना करता है ताकि वह दुखों और जीवन के बंधनों से ऊपर उठ सके। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना, #Bada Najuk Hai Ye Bujh Jata Dukh Apna, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
#Bada Najuk Hai Ye Bujh Jata Dukh Apna
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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कैसे दिल तू बनाई माँ कोमल इतना
बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
कितना अच्छा दिल दिया है तूने माँ बनाकर
हो जाता है भाऊक मईया दूसरे का अपना कर
मैं ना बोलूं मन बोला है हल्की हल्की यादों में
किया शिकायत तुझसे माता दिलवा को लगाने में
अच्छा ना नसीब मिला है हल्की हल्की दर्द उठे
जब जब याद आवे मेरी मैया दिल में मेरी कहर उठे
कैसे दिल तू बनाई माँ कोमल इतना
बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
कोमल कोमल सच्चा दिल बनाया तूने मेरा माँ
भावुक दिल दीया है जुड़ जाता किसी से माँ
जैसा तूने दिल बनाया वैसा दिया तू आहे
नसीबों को तोड़ दिया तू बांध कर इसकी बाहें
बहुत अच्छा मेरा दिल है पर जीवन है सड़क पे
ना जाने कब कुचला जाए मिट जाए ये मुखड़े
खुशियां तूने बनाई माँ पर मुझे दिया तू गम
याद करे मेरा तुझको जैसे रुला देता सितम
कैसे दिल तू बनाई माँ कोमल इतना
बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
त्याग दिया अब दिल मेरा माँ अपनी सारी सुख को
झुक जाता है मधुर वचन देख सबके दुख को
मांग रहा है जीवन माता नम्रता और विनम्रता
मधुर वाणी व्यवहार मांगा है देख दुनियां का कटुता
कोई इसे दंबाता मईया कोई इसे हराता है
कोई दिल का हत्या करे तो कोई मार देता है
चलता है कर्मों के बोझ में अपने को छुपाकर
कैसा है ये दिल का दरिया रह जाता कुम्हला कर
कैसे दिल तू बनाई माँ कोमल इतना
बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
जीना चाहे स्वार्थ से हटकर तेरी याद की दुनियां में
जिम्मेदारियों का बन्धन ढोए रात दिन एक समन्दर में
मुक्त होना अब चाहे माता दर्दों की दुनियां से
दर्द उठे रह रह के मईया यादों की रहमतमे
अपनी सुख सुविधा को त्याग दिया है दिल मेरा
बन्धन से अब मुक्त होकर चल रहा है सफर यह
दिल की बात समझती माँ तू तूने दिल बनाया
कैसे कैसे याद बनाई कैसा तू मुश्काया
कैसे दिल तू बनाई माँ कोमल इतना
बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
गीत =} #बड़ा नाजुक है ये बुझ जाता दुःख अपना
#Bada Najuk Hai Ye Bujh Jata Dukh Apna
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