यह गीत यह संदेश देता है कि धन-दौलत जीवन का अंतिम सत्य नहीं है। सच्चा सुख प्रेम, विश्वास, आत्मविश्वास, मानवता और अच्छे कर्मों में है। मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है, इसलिए जीवन में मानवीय मूल्यों और आत्मिक शान्ति को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए। जहाँ लोग आशा, विश्वास, प्रेम, करुणा और अपनापन छोड़कर केवल धन-संपत्ति और भौतिक सुखों के पीछे भाग रहे हैं। रिश्तों में स्वार्थ बढ़ गया है, मानसिक शान्ति कम हो गई है और इंसान अपने ही दुःख, अहंकार तथा इच्छाओं में उलझ गया है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है, #Aasha Aur Vishwas Ko Chhodkar Bhautik Dhan Sampatti Chalti Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad ,
गीत =} #आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
#Aasha Aur Vishwas Ko Chhodkar Bhautik Dhan Sampatti Chalti Hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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जीवन की इस यात्रा में माँ ये कैसी चलन है
आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
जीवन की दिशा में कोई देनेवाला शक्ति ना
कौन करता खुश मन को कोई उत्साहित ना
दुःख के समन्दर में डूबा है दुनियां सारी
आशा आत्मविश्वास कौन देगा हमारी
स्नेह अपनापन को लोग छोड़ देते प्रेम में
करते ना अनुभव अब खुशियां आनन्द में
जीवन की इस यात्रा में माँ ये कैसी चलन है
आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
जो मिला है उसका कभी आभार ना होता
आशा और भविष्य पर कभी विश्वास ना होता
करुणा से दुःख समझ जाते लोग मदद कौन अब करता
हक बना है अंधा तो न्याय कौन अब करता
अपने आप पे भरोसा ना है दूसरे पे कैसे करेंगे
मन में दुख है चाहत की तो आत्मा कैसे देखेंगे
मानसिक शान्ति नहीं मिलेगा जब तक हक और अधिकार है
जल जायेंगे पाने में जिनके सर अभिमान हो
जीवन की इस यात्रा में माँ ये कैसी चलन है
आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
चिन्ता कम ना होती माँ बढ़ती जाती तनाव में
तन मन रोगी बन गया चाहत की वो छांव में
संग सम्बन्ध सब उलझ गए है रिश्ते नाते बिखर गए हैं
हम की बोली चली जबान से तुम भी अब सिहर गए है
सोना चांदी का जमाना दौलत वैभव का लाया है
आँख में भरकर पानी अब मन्दिर से खजाना मांगा है
लक्ष्य ऐसा है जहां दौलत की बोल बाला है
ना मिले तो सारी दुनियां मतलब यार जमाना है
जीवन की इस यात्रा में माँ ये कैसी चलन है
आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
कौन पढ़े अब अच्छे विचार को कौन पढ़े गुरु वाणी
भारत माँ की धरती पर अब रेंग रहा जुआरी
छोटी छोटी खुशियां दुःख है बड़ा नहीं मिल पाता
महसूस करे अब खुशी को कौन दिल में बसा धमाका
देख ना पाता सूरज कोई कैसे रोशनी लाता है
अधियारा को दूर करता है जब खुद ही जल जाता है
खाली हाथ आए थे खाली हाथ जायेगे
धन दौलत सब यही रहेगा देख नहीं पाएंगे
जीवन की इस यात्रा में माँ ये कैसी चलन है
आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
गीत =} #आशा और विश्वास को छोड़कर भौतिक धन संपत्ति चलती है
#Aasha Aur Vishwas Ko Chhodkar Bhautik Dhan Sampatti Chalti Hai
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