यह रचना संसार के दुखों से ऊपर उठकर ईश्वर की शरण में जाकर शांति सत्य और मोक्ष प्राप्त करने की भावना को व्यक्त करती है क्योंकि यह गीत जीवन के दुख मोह-माया और भेदभाव अपना-पराया से थके हुए मन की पुकार है कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उसे ऐसे दिव्य लोक में पहुँचा दें जहाँ कोई दुख पीड़ा या अशांति न हो केवल सुख शांति और प्रेम हो कवि इस संसार की नश्वरताअन्याय और भ्रम से निराश होकर मुक्ति मोक्ष की कामना करता है। वह एक ऐसी अवस्था चाहता है जहाँ आत्मा अमर और शाश्वत हो जहाँ जन्म-मरण का चक्र समाप्त हो जाए। कवि ईश्वर से विनती करता है कि उसके जीवन को पवित्र और सार्थक बनाएं उसे सच्चा ज्ञान दें और अपने में समाहित कर लें। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता, #Mukti Mil Jaati Hai Jeevan Se, Apna Paraya Ka Jazbaat Na Rehta, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता
#Mukti Mil Jaati Hai Jeevan Se, Apna Paraya Ka Jazbaat Na Rehta.
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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मुझको पहुंचा दो उस लोक में जहां दुखों का कोई बात ना होता
मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता
आशा और आनन्द की सुंदरता मिलती रहती है
दुःख और आशु की कोई जगह नहीं रहती है
सुख शान्ति शाश्वत मिलते मिलता है सब प्रेम
जीवन कि जंगो को हर कर पोंछ देता लोर
सुख शान्ति कि गिनती ना है चारों ओर सुकून है
चांद सूरज सब रहते है कितना प्यारा देश है
मुझको पहुंचा दो उस लोक में जहां दुखों का कोई बात ना होता
मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता
आत्मा को पहुंचा दो मेरे अमृत नदी के तट पे
दीर्घायु की अमर कहानी लिख दो मेरे दिल पे
शाश्वत लम्बी आयु मिलेगा अविनाशी की दुनिया में
नाश ना होगा जीवन मेरा साथ रहे अनश्वर में
अक्षय अक्षर नित्य नाश रहित है अन्नत अमर हो जाते
मिट ना पाते उस दुनियां से जहां पताका फहराते
कोई अंत आरम्भ ना हो सदा विद्यमान रहता हो
नष्ट ना हो उस दुनियां से सदा स्थाई रहता हो
मुझको पहुंचा दो उस लोक में जहां दुखों का कोई बात ना होता
मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता
देख देखकर दिल मेरा अब थक गया इस दुनियां में
आँखो में है आशु तो दुःख बजे है हरमुनिया में
आदर्शों का मान नहीं अब इस दुनियां की महफिल में
चारों ओर घेरा है दुःख दुनियां की सब कस्ती में
रोज कल्पना करता हूँ मैं ढूंढू ध्यान लगाकर
इतने प्रश्न आते है सामने टाल देते भरमाकर
भूत भविष्य वर्तमान हो तुम सब कुछ में विद्यमान हो
देख रहे हो सत्य न्याय को सत्य कहां छुपाए हो
मुझको पहुंचा दो उस लोक में जहां दुखों का कोई बात ना होता
मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता
मैं करु निवेदन तुमसे भगवन अपने में मिलालो तुम
सार्थक जीवन बना दो मेरा सत्य को समझा दो तुम
तेरी कृपा से सब कुछ होगा सजता जाएगा
अधूरेपन समाप्त होगे सच्चा ज्ञान मिल जाएगा
मेरी चाहत यह है ये जीवन त्रुटिहीन हो जाए
दोष रहित होकर के अपन अंतिम रूप दिखाए
स्पर्श करो मेरे दिल तुम पवित्र बना दो इसको
दुनियां की रहस्यों को सच्चाई दिखा दो इसको
मुझको पहुंचा दो उस लोक में जहां दुखों का कोई बात ना होता
मुक्ति मिल जाती है जीवन से अपना पराया का जज्बात ना रहता
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