सुप्रभात का दिव्य आशीर्वाद आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम, Suprabhaat Ka Divy Aasheervaad Aapake Charanon Mein Koti-Koti Pranaam, #Halendra Prasad
सुप्रभात का दिव्य आशीर्वाद आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम, Suprabhaat Ka Divy Aasheervaad Aapake Charanon Mein Koti-Koti Pranaam, Halendra Prasad,
सच्ची भक्ति वह है जिसमें कोई इच्छा या अपेक्षा न हो, केवल समर्पण और प्रेम हो। जीवन बच्चों की तरह सरल, निष्कपट और रंग-बिरंगा है। जब हम सादगी और निस्वार्थ भाव से जीते हैं, तभी सच्चा आनंद और शांति मिलती है।
सच्ची भक्ति का स्वरूप यह है कि मनुष्य जब ईश्वर के द्वार पर जाता है तो अक्सर उसकी झोली इच्छाओं से भरी होती है। वह भक्ति तो करता है पर उसके भीतर कहीं न कहीं कोई कामना छिपी होती है। जब इच्छाएँ पूर्ण नहीं होतीं तो उसका विश्वास डगमगा जाता है। इसका कारण यह है कि उसकी भक्ति निस्वार्थ नहीं बल्कि अपेक्षाओं से बंधी होती है।
सच्ची भक्ति वह है जिसमें पाने की चाह नहीं बल्कि स्वयं को समर्पित कर देने का भाव हो। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि अपने अहंकार को त्यागने के लिए उनके पास जाना ही सच्चा मार्ग है। जहाँ अपेक्षा समाप्त होती है वहीं से शांति आरंभ होती है।
यह जीवन बच्चों की रंग-बिरंगी दुनिया है जीवन किसी बोझिल संघर्ष का नाम नहीं है। यह तो बच्चों के खेल जैसा आनंदमय और रंगीन है। जैसे बच्चों को रंग-बिरंगे खिलौने प्रिय होते हैं वैसे ही जीवन में विविध अनुभव भावनाएँ और परिस्थितियाँ हमारे लिए रंगों की तरह हैं।
यदि हम जीवन को बाल-मन से देखें निष्कपट सरल और सहज दृष्टि से तो यह हमें प्रेम करना और हँसते हुए जीना सिखाता है। बच्चों की मुस्कान में ईश्वर की झलक मिलती है। उनकी हँसी स्वाभाविक होती है उसमें दिखावा नहीं होता। इसी कारण वह सीधे हृदय को छू लेती है।
रंगों का दर्शन और जीवन का सामंजस्य यह है कि जैसे इंद्रधनुष अनेक रंगों से मिलकर बनता है वैसे ही जीवन विविध अनुभवों से मिलकर पूर्ण होता है। यदि केवल एक ही रंग हो तो सृष्टि की सुंदरता अधूरी रह जाएगी। जीवन का सौंदर्य भिन्नताओं में नहीं बल्कि उनके सामंजस्य में है।
सादगी जीवन का सबसे बड़ा श्रृंगार है। बिना आडंबर के सरल हृदय से जिया गया जीवन ही सबसे सुंदर होता है। बच्चों की मुस्कान यही सिखाती है कि आनंद तर्क से नहीं अनुभूति से आता है।
इस दुनियां में बच्चे ही जीवन के सच्चे गुरु बच्चों की दुनिया में छल-कपट नहीं होता। उनकी निष्कपटता और सहजता ही उनका सौंदर्य है। वे हमें सिखाते हैं कि प्रेम बाँटना सरल रहना और छोटी-छोटी बातों में खुश होना ही सच्चा जीवन है यदि हम बच्चों से सीख लें तो जीवन की जटिलताएँ स्वयं सरल हो जाएँ वे हमें याद दिलाते हैं कि जीवन एक रंग-बिरंगा खेल है जिसे गंभीरता से नहीं आनंद से खेलना चाहिए।
हे देव तुम्हारे द्वार पर असंख्य लोग आते हैं लेकिन उनका उद्देश्य सच्ची भक्ति या आत्मिक शांति नहीं बल्कि किसी सांसारिक वस्तु को पाने की चाह होती है। वे मन में इच्छाएँ मांगने और अपेक्षाएँ लेकर आते हैं क्योंकि मानव अपनी कामनाओं को लेकर ईश्वर-भक्ति करता सच्ची है पर कड़वी है!
इस दुनियां में भक्ति तो लोग करते है पर भक्ति निस्वार्थ नहीं होता क्योंकि जब मानव की मनोकामनाएँ पूरी नहीं होतीं, तो वे निराश और हत-उत्साहित होकर लौट जाते हैं। उनका उत्साह, श्रद्धा और विश्वास सब क्षीण हो जाता है। इसका कारण यह है कि उनकी भक्ति निस्वार्थ नहीं बल्कि स्वार्थ से प्रेरित होती है।
जो व्यक्ति ईश्वर के द्वार पर केवल पाने की भावना से आता है, वह निराश ही होता है। सच्ची भक्ति वह है जिसमें अपेक्षा नहीं, समर्पण हो। ईश्वर को पाने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं को खो देने के भाव से उनके पास जाना ही सच्ची भक्ति है।
ये जीवन बच्चों की दुनिया की जैसी है जैसे बच्चों को रंग-बिरंगे खिलौने बहुत प्रिय है वैसे ही ये जीवन बाल-सुलभ आनंद, निष्कपट प्रेम और सहजता जैसा जीवन का असली सौन्दर्य है पर इस जीवन में स्वार्थ आकर इसे उलझन में डाल देता है!
इस जीवन को और रंग-बिरंगे खिलौनों के माध्यम से समझाता है। गुरुजनों ने बाल-सुलभ आनंद, निष्कपट प्रेम और सहजता को जीवन का असली सौंदर्य बताया है।
ये जीवन किसी बोझिल संघर्ष का नाम नहीं, बल्कि यह बच्चों के खेल जैसा आनंदमय और रंगीन है जब हम जीवन को निर्मल दृष्टि से देखते हैं तो वह हमें प्रेम करना सिखाता है और रंग-बिरंगा खेल की तरह खेलने का प्रेरणा देता है!
बच्चों की मासूमियत में रब की झलक है उनकी हँसी उनका खेल दिल को स्वतः प्रसन्न कर देता है क्योंकि पिता को पालक और बच्चे को ईश्वर का रूप माना गया है।
जब आप बच्चों के लिए खिलौने लाते हैं तो उनकी खुशी देखकर स्वयं का हृदय भी बच्चा बन जाता है बच्चे कि खुशी आपको सच्चा सुख देने लगता है क्योंकि बच्चों की खुशी सच्चा आनंद तर्क नहीं ये जीवन दर्शन भी उसी तरह है!
रंग अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे से जुड़े होते हैं जैसे जीवन में बहुत विविधता है पर मूल भाव एक है और यहीं भाव यही रंग सृजन सौंदर्य और रोशनी का प्रतीक हैं रंगों का दर्शन रंगों का सौंदर्य उनकी भिन्नता में नहीं है बल्कि उनके सामंजस्य में है। यदि केवल एक ही रंग हो, तो सृष्टि की लय और रस नष्ट हो जाए। इंद्रधनुष की छटा इसलिए मोहक है कि प्रत्येक रंग अपनी विशिष्टता बनाए रखते हुए भी एक व्यापक एकता का अंग है।
बच्चों की दुनिया में निष्कपटता और सहजता है क्योंकि बच्चों की दुनिया में छल नहीं कपट नहीं दिखावा नहीं यही कारण है कि वहाँ आनंद स्वाभाविक है क्योंकि जीवन की जटिलता तो तर्क से आती है सरलता से नहीं सरलता से आनंद मिलता है!
इस जीवन में सादगी सबसे बड़ा श्रृंगार है क्योंकि बिना सजावट का ये जीवन जितना सुंदर है उतना सुन्दर कुछ भी नहीं यह बात बच्चों की मुस्कान सिखाती है कला जीवन का एक रंग है जो सब कुछ उस मुस्कान में छुपा है जिसमें सारे रंग दिखते और बिखरते है!
इस जीवन को जब बाल-मन से देखा जाता है तो प्रेम सादगी और सहजता दिखता है तर्क कम पर अनुभूति संवेदना अधिक दिखते हैं इस जीवन का सच्चा गुरु बच्चे है यदि बच्चों से सीखा जाए तो वही बच्चे सच्चे गुरु हैं जो अपनी मुस्कान से हमें खिलखिला कर कभी हंसा देते तो कभी रुला देते है।
सच्चा आनंद प्रेम और सौंदर्य बच्चों की निष्कपट मुस्कान सरलता और सहजता में छिपा है। जीवन की जटिलताएँ तर्क और छल से आती हैं जबकि सादगी, भोलापन और प्रेम से जीवन रंगीन बनता है। बच्चों से हमें निःस्वार्थ प्रेम खुशी बाँटना और सरल जीवन जीना सीखना चाहिए क्योंकि यह जीवन को बच्चों की रंग-बिरंगी खिलौनों की दुनिया के रूप में मिला है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें