यह गीत माँ के आध्यात्मिक स्वरूप की वंदना है। कवि माँ को केवल दैहिक जन्म देने वाली माता नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर निवास करने वाली दिव्य शक्ति के रूप में देखते हैं। वह माँ मन को शुद्ध करती है, करुणा भरती है और अज्ञान को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देती है। माँ को यहाँ देवी स्वरूप जैसे दुर्गा और काली के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है, जो ममता और शक्ति दोनों की प्रतीक हैं। वह बाहर दिखाई नहीं देती, पर हृदय और आत्मा में सदैव उपस्थित रहती है। जीवन के सुख-दुःख, जन्म-मृत्यु के बीच वही मार्गदर्शन करती है और ज्ञान का प्रकाश देती है। यह गीत माँ को करुणा, ज्ञान, शक्ति और आत्मजागरण की दिव्य ऊर्जा के रूप में प्रस्तुत करता है, जो साधक के भीतर रहकर उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे #Rahati Aatama Ke Bheetar Tu Jagathi Hai Mujhe, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Rahati Aatama Ke Bheetar Tu Jagathi Hai Mujhe
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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देखूं तुझको मैं सपनों में तू बुलाती है मुझे
रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे
सूक्ष्म शुद्ध पवित्र अनुभूति निर्मलता को लाती
पावन पुनीत से मन को धोती संवेदना पैठाती
आत्मा की गहराईयों में विलीन हो जाती
जैसे सत्ता भाव को दूर करे
भर दे करुणा दिल के अन्दर दुर्बुद्धि को धुर करे
हे ममता की माता तू दुनियां की दाता है
भोली भाली दुर्गा काली तूही जीवन विधाता है
देखूं तुझको मैं सपनों में तू बुलाती है मुझे
रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे
दिखती ना बाहर में माँ तू मन के भीतर वाश तेरा
आत्मा की अनुभव में रहती दिलके बीच में प्यास तेरा
सांसारिक ना दैहिक माता कुदरत में विलीन रहे
आँखों से वोझल होकर हृदय के समीप रहे
मौजूद ना हो पाती है माँ तू ना कोई तेरी मूरत
हरदम पास में रहती मेरे बनके दिल की सूरत
घुल मिल जाती जैसे दीपक जलता है
दिल के अन्दर भाव तेरी माँ हरदम याद में रहती है
देखूं तुझको मैं सपनों में तू बुलाती है मुझे
रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे
जैसी तेरी दुआ है माँ वैसे तेरी साथ मिला
मन आंगन में फूल खिले है जीवन का अनुराग मिला
धरती अम्बर सब गाते है वेद पुराण बताते है
जग जननी है वेद भवानी वेद माँ तुझे बताते है
शब्दों से तू व्यक्त ना होती भाव तेरे अनमोल है
गंगा की लहरों की जैसी ज्ञान तेरी अमोलक है
मूल्य बहुत है जिसकी कोई मोल नहीं
मिलता ना आसानी से माँ जिसका कोई तोड़ नहीं
देखूं तुझको मैं सपनों में तू बुलाती है मुझे
रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे
ज्ञान प्रभाव की अद्भुत वाणी अद्भुत है संचालन
जीवन दिशा को अर्थ देता है क्षणिक नहीं अभिमानी
साथ साथ चलता है माँ कभी नष्ट नहीं होता
भावना की अनुभूति में माँ ज्ञान तेरा स्पष्ट होता
हम बदले या जीवन बदले या बदले ये दुनियां
सुख दुख जन्म मृत्यु पर रहती तेरी विद्या की दुनियां
रहती हरदम आत्मा में तू चलती फिरती मेरे साथ
मार्ग दिखाती जीवन को तू अदभुत है वरदान
देखूं तुझको मैं सपनों में तू बुलाती है मुझे
रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे
गीत=} #रहती आत्मा के भीतर तू जगाती है मुझे
#Rahati Aatama Ke Bheetar Tu Jagathi Hai Mujhe
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