यह गीत एक भक्त के हृदय की विनम्र पुकार है, जिसमें वह स्वयं को अज्ञानी और असहाय बालक मानकर माँ ईश्वर से करुणा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है। वह माँ से बल, बुद्धि, ज्ञान और सद्गुणों की याचना करता है तथा जीवन में सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना करता है। भक्त समाज की वास्तविकता पर भी प्रश्न उठाता है लोग धन, मान-सम्मान और शोहरत के पीछे क्यों भागते हैं, जबकि अंततः सबको मिट्टी में मिल जाना है। वह मानवता के पतन, स्वार्थपूर्ण प्रेम, माता-पिता की उपेक्षा और नैतिक मूल्यों के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करता है। अंततः गीत का मूल संदेश यह है कि सच्चा सुख धन में नहीं, बल्कि प्रेम, सत्य, विनम्रता और माँ ईश्वर की कृपा में है। मनुष्य को अहंकार और स्वार्थ छोड़कर सच्चे मानव धर्म का पालन करना चाहिए। आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे, #Main Hoon Anapadh Anaadee Too Rulaana Jani Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
#Main Hoon Anapadh Anaadee Too Rulaana Jani Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
मईया पूछूं मैं एक बात तू भुलाना जनि रे
मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
तेरी दुआ की शक्ति मांगे जग सारा
बल बुद्धि ज्ञान मांगे धन का पिटारा
नम्र निवेदन करे विनती पेठा ता है
हाथ जोड़ी अर्ध देता तुझको बुलाता है
सुशील शालीन सभ्य शिष्य मृदुभाषी रे
याचना करता है मईया तुझसे दिन राती रे
अपनी क्षमता को देखी शक्ति तुझसे मांगता
भरदे सबकी झोली मईया तेरे द्वार पर झांकता
मईया पूछूं मैं एक बात तू भुलाना जनि रे
मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
दिल के स्वाभिमान से लोग हारा क्यों जीवन में
गरिमा के मूल्यों पर क्यों बिक गया तेवर में
चित्र चरित्र गौरव इज्जत को बनाया क्यों
मिलने वाले आदर को सलाखों पे सजाया क्यों
मान सम्मान शोहरत ख्याति क्यों चाहे लोग
मिल जाना है मीठी में तो दौलत क्यों चाहे लोग
जीवन का कानून बनाया कर्मों के लोग खेती से
करते करते थक गया तो सो गया इस मिट्टी में
कौन अमर है इस जीवन में किसको मौत बुलाए ना
जलता सूरज ढल जाता इसको क्यों समझाया ना
मईया पूछूं मैं एक बात तू भुलाना जनि रे
मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
मांग रही है खुशियां दुनियां दुखियां कहा जायेगी
सच्चाई में सत्य छुपा तो सत्य क्यों मुरझाई रे
खुशियों की दामन को भरकर कौन अमर बन जाएगा
चाहत की हथकड़ियों को कैसे तोड़ा जाएगा
निः स्वार्थ प्रेम पागल दुनियां पत्थर पूज रही है
मात पिता को भोजन ना दे कंकड़ चुन रही है
प्रेम बनाने वालों से मैं पूछ रहा परिभाषा
सबके अपने अपने मतलब दिखते प्रेम बड़ा दिलवाला
दुनियां की कमाना को देखा चाहत अजीब बयार है
रो रही है धरती माता रोता बाघ सियार है
मईया पूछूं मैं एक बात तू भुलाना जनि रे
मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
दुनियां वाले कहते है माँ शुभचिंतक वो मेरा है
स्नेह देता है मुझको सुख का दामन मेरा है
कैसी खुशियां होती है माँ मुझको जरा बतादे तू
आग लगा दे मन को मेरी गोदी साट सुलाले तू
तेरी चरणों को पूज रहा हूँ मुझको समझ में आता ना
कैसी नियम बनाई तूने कानून जिगर को भाता ना
हर दिन देख रहा हूँ मैं कितने लोग बदलते है
धन दौलत के चक्कर में माँ पत्थर से पत्थर तोड़ते है
अजीब कहानी दिखती है माँ तेरी सृष्टि की चोला में
लड़ रहा हूं है भूख में मानव मानवता के झोरा में
मईया पूछूं मैं एक बात तू भुलाना जनि रे
मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
गीत=} #मैं हूँ अनपढ़ अनाड़ी तू रुलाना जनि रे
#Main Hoon Anapadh Anaadee Too Rulaana Jani Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी
_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें