यह गीत मानव जीवन की जटिल परिस्थितियों, आंतरिक संघर्ष और अवसरों की निरंतर खोज को दर्शाता है। मनुष्य अक्सर संदेह, भय, अहंकार और भ्रम के कारण अपने ही चुने मार्ग से भटक जाता है। शोर, उथल-पुथल और अव्यवस्था से भरा जीवन बाहरी गति तो देता है, पर भीतर की शांति छीन लेता है।समय और परिस्थितियाँ कभी तूफान बनकर जीवन को झकझोरती हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता। ऐसे में जीवन की सच्ची समझ वही पाता है जो प्रकृति और परिस्थितियों को स्वीकार कर स्वयं को ढाल लेता है। सरल मन, संतुलन और स्वीकार की भावना से ही मनुष्य जीवन-सागर को पार कर पाता है।यह गीत सिखाता है कि जीवन अवसरों के पीछे भागने से नहीं, बल्कि सही दृष्टि, विश्वास और आत्मबोध से सार्थक बनता है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला, Soorat e-Haal Mauka Chala To Chala Avasar Ko Dhoondhata Chala, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत=} #सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
#Soorat e-Haal Mauka Chala To Chala Avasar Ko Dhoondhata Chala
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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हम चले जिस डगर पे वो विपरीत चला
सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
शक संदेह लेकर दुविधा में चलता
खोकर विश्वास वो असमंजस से जूझता
झिझक की हिचकिचाहटों ने मार्ग को छुड़ाया
खो दिया स्पष्ट को जब शंका ने रुलाया
लाज शर्म की भावना ने घमंडी बनाया
घमंड ने घमंड से सब कुछ छुड़ाया
हम चले जिस डगर पे वो विपरीत चला
सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
उथल-पुथल जीवन में हंगामा लेकर आता है
हलचल मचाकर दिल में तहलका मचाता है
बात है पुरानी पर कोई अब इसे समझे ना
गड़बड़ी अवस्था को क्रम वार पकड़े ना
शोरगुल का जीवन लेकर बादशाह बन जात है
हिलने डुलने वाले चीज से यूंही टकराता है
बहुत शोर शराबा से जीवन शान्त ना होता
करता व्यस्था भंग शान्ति संग में रहता ना
हम चले जिस डगर पे वो विपरीत चला
सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
खलबली मचाता जब वक्त का परिंदा
बदल देता जीवन को जो दिखता था ढीला
भरम भाव डर भय सब होनी लेकर आता
जो होता है होनी उसे को ना रोका
गति इतनी तेज थी उत्तेजना की अंगों की
जला दे तन मन को जो रोके उस लहरों को
भूकम्पी विद्रोही अशांति भरा था
क्रांति बगावत तूफ़ान ले खड़ा था
हम चले जिस डगर पे वो विपरीत चला
सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
अजीब है जीवन ये अजीब है कहानी
समझता कोई ना इसको करता नादानी
बच्चों जैस मन है सरल निष्कपट है
जीवन के सागर में अन्नत ये किनार है
ऊपर आकाश अचल नीचे उग्र जलराशि
फैला चारों है बेचैन है प्यास माझी
मानव जीवन का कष्ट इसी बीच में चलता
शोर करते करते नृत्य गाते चलता
हम चले जिस डगर पे वो विपरीत चला
सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
जिसने जीवन जाना है उसने जीवन जिया
कुदरत के विपरीत ना कुदरत को पिया
जो भी आता आने से स्वीकार कर लेता
अपने को बदलकर वो उजियार कर लेता
सागर हो समुन्द्र चाहे आंधी तूफान हो
पावन पवित्र धरती सबकी है स्थान
सृष्टि विधाता सबका सब मेहमान है
अपनी जीवन है सबकी सब लोग महान है
हम चले जिस डगर पे वो विपरीत चला
सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
गीत=} #सूरत ए-हाल मौका चला तो चला अवसर को ढूंढता चला
Soorat e-Haal Mauka Chala To Chala Avasar Ko Dhoondhata Chala
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