यह रचना यह सिखाती है कि जीवन संगीत और गीता समान है हर क्षण नया अवसर नया सृजन और नई ऊर्जा लेकर आता है। अकेलापन भी आत्मबोध का मार्ग बन सकता है और छोटा जीवन भी संसार को सुंदर बनाने की क्षमता रखता है।यह गीत कुदरत और जीवन के गूढ़ दर्शन को सरल और भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करता है। कवि कुदरत को एक अलौकिक मेला मानते हैं जहाँ जीवन क्षणभंगुर होते हुए भी निरंतर चलता रहता है। घास के छोटे अंकुर के माध्यम से संघर्ष पुनर्जन्म और निरंतरता का संदेश दिया गया है कटने के बाद भी जीवन फिर से उग आता है। गीत बताता है कि प्रकृति बिना थके संसार को हरियाली, ताजगी और सौंदर्य प्रदान करती है। मनुष्य तुलना, अनुमान और भ्रम में उलझकर जीवन की सच्ची सुंदरता को भूल जाता है, जबकि प्रकृति निःस्वार्थ गुरु बनकर मौन शिक्षा देती रहती है। यह रचना यह सिखाती है कि जीवन संगीत और गीता समान है हर क्षण नया अवसर नया सृजन और नई ऊर्जा लेकर आता है। अकेलापन भी आत्मबोध का मार्ग बन सकता है और छोटा जीवन भी संसार को सुंदर बनाने की क्षमता रखता है।भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी, #Kee Dekha Kudarat Ka Mela Dadee Alabela Gurujee, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत=} #की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
#Kee Dekha Kudarat Ka Mela Dadee Alabela Gurujee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
चलता जीवन हमेशा दिल अकेला गुरुजी
छोटे छोटे अंकुर को मैं देखा जब ध्यान से
घास की अंगड़ाई देखा आँखो से निहार के
बार बार जन्म इनका बार बार विनाश है
काट दिए जाते है जैसे कोई प्यास है
हौसला बुलन्द इनका बार बार उगते
सूरज के प्रकाश से खिलकर सबको खुश करते
की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
चलता जीवन हमेशा दिल अकेला गुरुजी
अंतर
खुशियों की ताजगी से हरापन फैलाते है
जग को हरियाली करके जिन्दगी सजाते है
हरा भरा रूप इनका हरि भरी दुनियां
चमके निर्मलता इनकी फूलों जैसी कलियां
करते निर्माण ये नयापन के फूलों से
ताजा ताजा भाव इनका गुण के दिल्लीजो पे
समय के विचारों में ये भाव को दर्शाते
कभी कुम्हलाते तो कभी मुस्कुराते
की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
चलता जीवन हमेशा दिल अकेला गुरुजी
बड़ा है विचित्र ये अनूठे कुछ भाव
अतुल अनुपम को दर्शाता है अभाव
किसको किसने जोड़ा गुरुवर किसने किसको तोड़ा
कौन किसका तुलना किया कौन है विद्वान
उपमा दिखाते अब लोग चीजों को परखकर
सुन्दर से सुन्दर जीवन देखते है खासकर
तौलते वजन पर लोग अनुमान को लगाकर
अटकल है मन की भावना कल्पना सजाकर
की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
चलता जीवन हमेशा दिल अकेला गुरुजी
धरती की आनन्द को ये भरता नवीन से
नित नूतन जन्म जीवन देता रंग से
छोटा सा जीवन ये गुलजार करे दुनियां को
सुन्दर सुन्दर सृजन अलंकार करे सृष्टि को
कली फूल बदल जाते पत्तों की लहरों में
ताजा ताजा ताजगी फैलाते वन के शहरों में
प्रकृति को सुशोभित करते शोभा बढ़ाते है
लता और बेलों से खुशबू महकाते है
की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
चलता जीवन हमेशा दिल अकेला गुरुजी
बार बार अवसर नया आते है जीवन में
देता है अटूट जीवन कुदरत के अखण्डन
घास के अंकुर के जैसा धरती पर जीवन है
ऊर्जा की शुरुआत में ये आती जाती है
लेती है जन्म बार बार सृष्टि के घर में
हरि भरी सुन्दर करती जीवन के सफर में
गीता संगीत के जैसा आती गुनगुनाती
मधुर मधुर गुण को मधुर गुण से गाती
की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
चलता जीवन हमेशा दिल अकेला गुरुजी
गीत=} #की देखा कुदरत का मेला बड़ी अलबेला गुरुजी
#Kee Dekha Kudarat Ka Mela Dadee Alabela Gurujee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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