यह गीत जीवन और मृत्यु के शाश्वत चक्र पर आधारित एक गहन दार्शनिक रचना है। कवि जीवन को सागर और झूले के रूपक से समझाते हैं जहाँ जन्म और मृत्यु निरंतर आते जाते रहते हैं। आत्मा इस चक्र में बंधी हुई सुख दुख लाभ हानि सफलता असफलता का अनुभव करती है।रचना यह स्पष्ट करती है कि परिवर्तन जीवन का स्वभाव है, उसे रोका नहीं जा सकता। जीवन निरंतर गतिमान है और कर्म के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। कोई भी इस प्रकृति के विधान से बच नहीं सकता।कवि आत्मा की जिज्ञासा के माध्यम से गुरु से सत्य, स्थिरता और जीवन-बोध की शिक्षा चाहता है। अंत में यह संदेश मिलता है कि गुरु-कृपा और कर्म-बोध से ही जीवन के रहस्य को समझा जा सकता है तथा मानव अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन उदास ग़म खुशी गीत, जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी, #Jeevan Chakr Mein Ulajha Hai Ye Toofaan Gurujee, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Jeevan Chakr Mein Ulajha Hai Ye Toofaan Gurujee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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सागर जैसा है जन्म और मौत का विधान गुरुजी
जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी
जिन्दगी का मोल क्या है जिन्दगी से पूछा
जीव का अनंत चक्र जीवों में ही जूझा
झूल रहा झूले जैसा आता जाता गाता है
कभी जन्म लेता है तो कभी मौत पाता है
बच ना पाता है कोई इसके संविधान से
पालना में हिलता डुलता आत्मा कमाल के
सागर जैसा है जन्म और मौत का विधान गुरुजी
जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी
सुख का सफलता सुख है उन्नति विकास का
कष्ट असफलता दुख है विनाश और विध्वंश का
जीवन का नाम लिखा जीवन का विधाता
हेर फेर उच नीच लाभ हानी दाता
होता है परिवर्तन रुक नहीं पाता है
चलता है निरन्तर ये झुक नहीं पाता है
खंड ना विखंड इसकी हिस्सा ना बंटवारा
होता ना विभाजन इसकी हरदम चलते जाता
सागर जैसा है जन्म और मौत का विधान गुरुजी
जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी
जैसे झूला झूलता है ऊपर नीचे आता जाता
वैसे जीवन है गुरुवर कभी मौत कभी जन्म आते रहता
आत्मा कहता है मेरा तुझसे मैं पुछु
सत्य की कहानी क्या है तुझसे मैं सीखू
जीवन को जीवन बनाया कैसे जाएगा
स्थिर ना मन का भाव ठहराया कैसे जाएगा
ज्ञानी विद्वान तू है तूही है सृष्टि
मुझको पढ़ा दे मुझे जीवन की दृष्टि
सागर जैसा है जन्म और मौत का विधान गुरुजी
जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी
मृत्यु की स्थिरता आत्मा बताता मुझे
देखकर तालाब को चुप हो जाता हूं सोझे
गति है जीवन तो गति क्या होती है
चलती निरन्तर क्यों रुक क्यों ना जाती है
अटल अनिवार्य अपनी बदले स्वरूप क्यों ना
करती है परिवर्तन हरदम देखती है जुग क्यों ना
समझ ना पाता हूँ मैं इसकी गति को
खो जाता हूँ नभ में मैं हंसकर सही हो
सागर जैसा है जन्म और मौत का विधान गुरुजी
जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी
कैसा सुन्दर है ये विधि का विधान
आनेवाला प्यार है जानेवाला ज्ञान
वास्तविक का सच है क्या कैसा है सब बोल
कौन यहां राजा है कौन यहां चोर
कौन इसे समझे गुरुवर कौन करे शोर
कौन कारगार में कैसा जीवन डोर
कुदरत की समझ अब कुदरत बताएगा
जो जैसा वैसा फल उसको चलाएगा
सागर जैसा है जन्म और मौत का विधान गुरुजी
जीवन चक्र में उलझा है ये तूफ़ान गुरुजी
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#Jeevan Chakr Mein Ulajha Hai Ye Toofaan Gurujee
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