यह गीत गुरु की महिमा और जीवन में संतुलन के महत्व को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। गुरु को कवि ने उस सूर्य के रूप में देखा है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्मा को प्रकाशित करता है। गुरु जीवन की सही दृष्टि देते हैं, छिपे हुए दुःख और भ्रम को उजागर कर मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाते हैं। गीत का मूल संदेश यह है कि जीवन की सभी समस्याओं का समाधान संतुलन, सहजता और सही माप में है। जब तन, मन और भावनाएँ सामंजस्य में होती हैं, तब जीवन बिना बोझ के सहज रूप से चलता है। गुरु अपने उपदेश, कथाओं और आशीर्वादों से मनुष्य को सही मार्ग दिखाते हैं और जीवन को सुंदर, सरल व सार्थक बनाते हैं। अंततः कवि गुरु को देव और परमात्मा का साकार रूप मानते हुए कृतज्ञता व्यक्त करता है, क्योंकि गुरु की कृपा से जीवन प्रकाशमय और अर्थपूर्ण बन जाता है, भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गुरु भक्ति गीत, दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता, #Dikhata Roshanee Ka Raushan Ik Ajooba See Khabar Dikhe, Writer ✍️ #Halendra Prasad

 गीत =} #दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता  

#Dikhata Roshanee Ka Raushan Ik Ajooba See Khabar Dikhe

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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         गुरुवर तेरी बाड़ी में मुझे अजब का सूरज दिखता 

     दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता 

            जीवन की दृष्टि को दिखाया तूने आत्मा में

             छिपी हुई दर्द को दिखाया तूने अपना में

            चीजों की जानकारी तूने दिया तन मन से 

          जगह की ठिकाना को बताया दिल की धन से

               जैसा उपदेश तेरा वैसे सृष्टि चलती है

           भावनाओं के भ्रम में कितने घर बिखरती है 

             समझे ना कोई इसको सबको मलाल है 

             जलता है आग जैसा दिए का इंतजार है

        गुरुवर तेरी बाड़ी में मुझे अजब का सूरज दिखता 

    दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता 


               तेरी कहानियों को पढ़ा मैं जिगर से

             बहुत सूक्ष्म गहरी थी जीवन के डगर पे

          चीजों की अनुपालन मुझे तुम्हीं ने सिखाया

             जीवन की दृष्टि को तू सामने दर्शाया 

            छिपी हुई दर्शन को अब देख मैं पाता हूँ 

           तेरी दर्शन से गुरुवर हृदय को समझाता हूँ 

           समझ जाता मन मेरा समझ जाता दिल है

            करता ना ढिठाई मुझसे गड़ता ना कील है

              अपनी जगह पे जो चीज़ ठीक होता

             बोझ ना दबाव आता सहज सब होता

       गुरुवर तेरी बाड़ी में मुझे अजब का सूरज दिखता 

    दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता 

 

          ना ढीला ना कसावट फिट जब हो जाता है

           एहसास ना कराता मन दिल भी भुलाता है

             मौजूद होने का जब मौजूदगी जताता 

           मन को भरम में डालकर दिल को दुखता

              विधि व्यवस्था सही सही सामंजस्य 

         देती ना तकलीफ तन को तालमेल का संगत 

          बहुत ऐसी चीजें है जो जीवन को भरमाए 

            सुन्दर सुन्दरता को दिखाकर जलाएं 

          जब अवस्था सही हो तो एहसास ना होता

           सहजता से जीते है हम महसूसों ना होता

        गुरुवर तेरी बाड़ी में मुझे अजब का सूरज दिखता 

   दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता


           तन की परेशानी गुरुवर मन की परेशानी है 

            सही है सलामत तन तो मन की रवानी है

             दिल मेरा कहता है दिल में तूही रहता है

          तूही बोलता है गुरुवर तूही सब कुछ करता है

              सही माप हर चीज संतुलित रखती है

              बनकर आवश्यक जीवन निखारती है

            तेरे आशीर्वादों से मैं कुशल इस जहां में हुं 

           तू बनकर आया है देव मैं परमात्मा कहता हूँ 

                 संतुलन बनाया तूने रास्ता दिखाया 

               सहज की डगर पे तूने मुझको दौड़ाया 

          गुरुवर तेरी बाड़ी में मुझे अजब का सूरज दिखता 

      दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता

गीत =} #दिखता रोशनी का रौशन इक अजूबा सी खबर दिखता  

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           Writer ✍️ #Halendra

 Prasad 

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