यह गीत जीवन की उस कठिन आंतरिक यात्रा का चित्रण करता है, जहाँ सच्चा प्रेम संवेदना और सृजन बाहरी संसार द्वारा समझा नहीं जाता। कवि बताता है कि जीवन में आने वाला अंधकार खालीपन और संघर्ष ही सृजन की वास्तविक भूमि है। शून्यता पीड़ा और अकेलापन आत्मा को जाग्रत करते हैं और वहीं से नई दृष्टि शक्ति और आशा का जन्म होता है। गीत में आत्मा और मन के संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि समस्याओं की जड़ बाहर नहीं बल्कि भीतर होती है। जब व्यक्ति आत्मचिंतन करता है तब उसे भीतर ही प्रकाश समाधान और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। सूरज प्रकाश और नाव जैसे प्रतीक जीवन में चेतना ज्ञान और साहस के रूपक हैं।अंततः यह गीत सिखाता है कि सीमित साधनों कठिन परिस्थितियों और अंधकार के बीच भी आनंद सौंदर्य और सृजन संभव है। जीवन की सबसे बड़ी शक्ति आत्मा है और वही कठिन डगर पर चलने का मार्ग दिखाती है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर, #Badi Katin Hai Dagariya Koina Samjhe Dil Ke Pyar Ko Gurvar, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
#Badi Katin Hai Dagariya Koina Samjhe Dil Ke Pyar Ko Gurvar
Writer ✍️ #Halendra Prasad =}
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
की सृजन होता है दुनियां में अन्धकार से गुरुवर
बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
अन्दर के खालीपन को कोई नाहीं जाने
लड़ता लड़ाई जीवन होत ही बहाने
बड़ा ही नीरस है जीवन जीवन का उत्साह
कमी है अभाव है खाली रिक्त स्थान
कोई नहीं रहता उसमें सुन सना जगह है
कोई ना आवाज वहां कोई ना सफर है
शून्यता का सूनापन निर्वस निर्जनता
पड़ा बिरना है बंजर खामोशी भावना
की सृजन होता है दुनियां में अन्धकार से गुरुवर
बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
आत्मा देखता है मेरा जहां जहां जाके
मन पीछे पीछे चलता रास्ता भुलाके
टूटन से भी मिलता है मनोहर दिल की दौलत
बड़ा है सुन्दर वो आकर्षण दिल का वैभव
रूप शानदार है भव्य मोहने वाला
खींच लेता अपने ओर चमक शक्ति वाला
देखने में सुन्दर सुन्दर सुखद चमकदार है
सूरज के जैसा दिखता प्रकाश का भरमार है
रूप रंग चमकता रहता शान्ति दिखाता है
मोह लेता जलवा उसकी मुझको बुलाता है
की सृजन होता है दुनियां में अन्धकार से गुरुवर
बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
असम्भव को सम्भव करता सब कुछ दिखाता है
जीवन की गहराइयों को धारा में बहाता है
कभी हंसता हूँ मैं कभी ढूंढता हूँ
चलने की साधना को आराधना करता हूँ
सुशील सरलता मुझे देता ये मासूमियत से
करता है रचना मुझमें विचारों के सृजन से
सुन्दर बनाता ये तन मन सृष्टि को
नया क्षमता का खोज देता है दृष्टि को
बालसुलभ दिव्यता का करता है प्रशंसा
सृजनशक्ति का आशा गढ़ता है क्षमता
की सृजन होता है दुनियां में अन्धकार से गुरुवर
बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
बंद आँखो से जब मैं देखा सूरज को
ज्योति बताती रही मेरे कसक को
मुश्किल परेशानी बाधा अज्ञात का संकट है
समस्या का जड़ तेरे भीतर का शहर है
कितने रुकावट है कितने अड़चन
तकलीफों की जड़ तेरी असुविधा की मर्दन
धुंधला धूमिल तू उदासी में जीता
निराशा में घिर कर निराशा को पिता
निश्छल अंधेरा को तुम देखो आत्मा से
तमस के तिमिर को तुम देखो सीधा से
की सृजन होता है दुनियां में अन्धकार से गुरुवर
बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
मेरा आत्मा ही मुझसे बार बार बोले
मार्ग है अंधेरा में तेरा कहा कहा ढूंढे
सृजन संभव है तेरा तू देख आत्मा से
मार्ग ढूंढ रहा है तुझे अंधियारा की गली में
आनन्द की वो सृजन शक्ति खालीपन में दिखती
सुन्दर भीतर से वो मोहित रचना करती
हंसते हुवे नाविकों को देख तू अब दिल से
टूटे फूटे पत्तो से बनाया नवा रच के
जीवन की यात्रा नाव तैयार कर अंधेरा में
सीमित साधनों का क्षमता बढ़ जाएगा जीवन में
की सृजन होता है दुनियां में अन्धकार से गुरुवर
बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
गीत =} #बड़ी कठिन है डगरिया कोइना समझे दिलके प्यार को गुरुवर
#Badi Katin Hai Dagariya Koina Samjhe Dil Ke Pyar Ko Gurvar
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=}
🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें