आध्यात्मिक दृष्टिकोण अमूल्य अनमोल रचना आध्यात्मिक गुरु वाणी, अंधकार में आशा का दीप मन के सूने घर में गुरु का प्रकाश Andhakaar Mein Aasha Ka Deep Man Ke Soone Ghar Mein Guru Ka Prakaash, #Halendra Prasad,
अंधकार में आशा का दीप मन के सूने घर में गुरु का प्रकाशAndhakaar Mein Aasha Ka Deep Man Ke Soone Ghar Mein Guru Ka Prakaash
जब चारों ओर निराशा अकेलापन और असहायता का वातावरण फैल जाता है तो मन अंधकार से घिरा जाता है क्योंकि ये जीवन एक विरान सूना घर के समान है जहाँ हृदय को कोई सहारा नहीं मिलता जो भी मिलता हुआ केवल दिखावा मिलता है!
जब इस जीवन में अज्ञान दुख और निराशा का असीम अंधकार फैला जाता है तो उसे दूर करने के लिए प्रकाश की अत्यंत आवश्यकता पड़ती है और वह प्रकाश ज्ञान प्रेम आशा मार्गदर्शन का रास्ता देता है जो दीपक अपने प्रकाश से देता है और उस प्रकाश के लिए याचना करनी पड़ती है केवल जलाना ही नहीं!
विरान घर में न चहल-पहल होती है न अपनापन होता है न ही सुरक्षा का भाव होता है और जीवन में भी सुख शान्ति आशा प्रेम और सहारे का अभाव हो जाता है। जीवन की आंतरिक अवस्था को दर्शाती है। सूना घर इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य जीवन का हृदय अकेलापन निराशा और वेदना से भरा हुआ है।
मनुष्य जीवन अर्थहीन और नीरस तब प्रतीत होता है। जब जीवन में न कोई मार्गदर्शन देने वाला है न प्रेरणा देने वाला है और न ही ऐसा कोई तत्व है जो मन को शक्ति दे सके तब मनुष्य जीवन अर्थहीन और नीरस प्रतीत होने लगता है।
प्रकाश ज्ञान प्रेम ईश्वर और आशा के बिना जीवन खाली और उजड़ा हुआ होता है ठीक वैसे ही जैसे बिना निवासियों के घर विरान हो जाता है। जीवन की निराशापन और अकेलापन तथा आशा ज्ञान और ईश्वरीय प्रकाश की प्रार्थना ही जीवन बन जाती है!
पात्र का रुकना केवल शारीरिक नहीं बल्कि मन का ठहराव है। वह किसी भाव स्मृति या निर्णय पर विचार कर रहा होता है। क्योंकि क्षणिक ठहराव का मतलब देह का रुकना नहीं बल्कि किसी गहन अनुभूतियों का एक कोमल मन आत्मिक शान्ति प्रिय किसी कार्य की विश्लेषण है जहां मन सत्य को ढूंढता है!
अंधकार बाहरी भी हो सकता है और आंतरिक भी अंधकार में ध्यान देखने मतलब केवल आँखों से देखना नहीं है बल्कि मन और आत्मा से पहचानना है अंधकार खालीपन कालिमा और अंधेरा का प्रतीक है!
जब आत्मिक श्रद्धा प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हो तब दीपोत्सव खुशी प्रकाश आशा और उल्लास का प्रतीक बन जाता है क्योंकि मान मर्यादा गौरव मान सम्मान का संकेत मिलता है संकेत का आगमन केवल औपचारिक नहीं है बल्कि आत्मिक श्रद्धा प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा है!
अंधकार और संशय के बीच का विचार संवेदना और प्रकाश का मार्ग खोलता रहता है। दीप केवल दीपक नहीं बल्कि आशा खुशी प्रोत्साहन आत्मसम्मान और जीवन के उजास का प्रतीक है। क्योंकि मन चेतना निष्क्रिय नहीं है बल्कि सक्रिय रूप से किसी न किसी विषय पर सोच रहा होता है।
जब मन यह सोचता है कि मैं ऐसा क्यों महसूस कर रहा हूँ? या मेरे इस भावना का कारण क्या है? तब वह भाव पर विचार कर रहा होता है। की मेरे भाव में खुशी दुख सुख क्रोध भय डर की क्या कारण है जो मुझे अपने कार्यों में सफल के बजाए विफल कर देता है!
जब मन बिता हुआ किसी घटना, अनुभव या व्यक्ति को याद कर रहा होता है और उसका विश्लेषण करता है तब वह स्मृति पर विचार कर रहा होता है कि पीछे जो घटना घटी थी उसका कारण क्या है और भविष्य जो घटना घटेगी उसकी कारण क्या होगा और उससे कैसे बचा जा सकता है!
जब मन किसी कार्य को करने या न करने की सही गलत को चुनकर भविष्य से जुड़े विकल्पों पर सोचता है विचार करता है तब वह निर्णय पर विचार कर रहा होता है। की क्या सही निर्णय है! क्योंकि मन चेतना की मूल विशेषता सोचना समझना और विश्लेषण करना है। मन भावनाओं यादों और निर्णयों के माध्यम से हमारे अनुभवों को अर्थ देता है।
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