यह रचना जीवन के उत्सव, प्रेम और समाज के दिखावे के पीछे छिपे मृत्यु और पीड़ा के सत्य को उजागर करती है। प्रेम त्याग और वेदना से मनुष्य को तोड़ता भी है और परिपक्व भी बनाता है। संसार नश्वर है, संबंध बदलते हैं, पर आत्मा अमर है। जब सब साथ छोड़ देते हैं तब माँ परमात्मा ही अंतिम शरण बनती हैं, जो मृत्यु के भय से मुक्त कर आत्मा को शांति और मोक्ष की ओर ले जाती हैं। आध्यात्मिक और वेदना से भरी रचना, उत्सव के वस्त्रों में छिपी मृत्यु और माँ की शरण Adhyatmik Vedna Se Bhari Rachna, Utsav Ke Vastro Mein Chhipee Maut Aur Maa Kee Sharan,
यह रचना जीवन के उत्सव, प्रेम और समाज के दिखावे के पीछे छिपे मृत्यु और पीड़ा के सत्य को उजागर करती है। प्रेम त्याग और वेदना से मनुष्य को तोड़ता भी है और परिपक्व भी बनाता है। संसार नश्वर है, संबंध बदलते हैं, पर आत्मा अमर है। जब सब साथ छोड़ देते हैं तब माँ परमात्मा ही अंतिम शरण बनती हैं, जो मृत्यु के भय से मुक्त कर आत्मा को शांति और मोक्ष की ओर ले जाती हैं।
खुशी के वस्त्रों में छिपा हुआ मृत्यु का सत्य दिखाई देता है। हर वस्त्रों में मंगल नहीं होता कुछ वस्त्रों में पीड़ा त्याग और उलझन होता है दुनियां को मंगल दिखाई देने वाले वस्त्रों में भी मृत्यु का सत्य छिपा होता है जो उत्सव प्रेम और कफ़न का प्रति है?
जब साधक आत्मा में उतर जाता है तो उसकी अंतिम शरण माँ ईश्वर के चरण होता है मृत्यु में इतनी शक्ति नहीं कि वह आत्मा को नष्ट कर दे आत्मा अमर है मृत्यु से निर्भय है आत्मा जिसे माँ परमात्मा का आश्रय मिल जाए उसे मृत्यु भी पराजित नहीं कर सकती।
कसक प्रेम त्याग जलन प्रतीक्षा और टूटन का प्रेम है क्योंकि प्रेम हमेशा शीतल नहीं होता कभी-कभी वही प्रेम जीवन को जला कर मजबूत बनाता है।
जिस समाज को रोशनी चाहिए वही दीपक के जलने की पीड़ा नहीं समझता बेरुख़ी उपदेश गवाही अपमान दीपक को बुझा देता है अंत आशा का होते ही तोड़कर चट्टान बना देता है!
न आकाश स्थायी है न चाँद न सूरज न सृष्टि स्थायी केवल यात्रा है जब आंधी आती है तो कुछ न कुछ असर छोड़ जाती है निर्मलता को भी कड़क कर जाती है क्योंकि से साँसों का अंतर ही जीवन है जीवन के अंतर सांसे नहीं !
माँ वह शक्ति है जिसकी व्याख्या करना सहज नहीं जो टूटे हुए को भी चलना सिखा देती है। जब सब पराए हो जाते हैं जब संसार ठहरने नहीं देता तब माँ उँगली थाम लेती है आँसू छुपा लेती है माँ माँ होती है जीवन की शिखर होती है!
इस जीवन में प्रेम भी है मृत्यु भी है उत्सव भी है कफ़न भी पिता का त्याग है समाज की कठोरता है और माँ का चरणामृत भी है लाल जोड़ा संसार का मोह है कफ़न अंतिम सत्य है और माँ मोक्ष का द्वार है!
जो मनुष्य प्रेम से टूटता है समाज से ठुकराया जाता है वो मृत्यु को देख लेता है और अंततः माँ की गोद में अमर हो जाता है।
प्रेम की दुनिया में केवल सुख नहीं बल्कि गहरी कसक और त्याग वेदना है। जहाँ समाज लाल जोड़े और सेहरे में खुशी सुख देखता है वहीं कफ़न है जो विरह सत्य का प्रतीक है क्योंकि जीवन की कठोर सच्चाइयों में प्रेम की पीड़ा संसार की नश्वरता का घर है!
मृत्यु से भयभीत नहीं होती है क्योंकि मृत्यु आत्मिक साधना में स्थित है और उसकी अंतिम शरण माँ के चरण हैं। प्रेम, समय और परिस्थितियाँ मनुष्य को भीतर से जला देती हैं पर वही जलन उसे परिपक्व और मजबूत भी बनाती है।
पिता का त्याग समाज की बेरुख़ी और रिश्तों का बदलना जीवन की सच्चाई है संसार की अस्थिरता है और कोई स्थायी नहीं है सबको एक दिन जाना ही है जब हर संबंध टूट जाता है तब माँ परमात्मा ही वह शक्ति है जो आँसू पोंछकर सहारा देती है और जीवन-पथ पर आगे बढ़ने का साहस देती है।अंतत जीवन में सुख-दुख प्रेम-मृत्यु सब आते-जाते हैं पर माँ का प्रेम ही वह सत्य है जो मनुष्य को टूटने से बचाकर उसे आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है।
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