यह गीत आदि-अनादि युग की ज्ञान और संस्कार की धरोहर का महत्त्व बताती है। इसमें कहा गया है कि जीवन में अनुभव, नैतिकता, प्रयास, और सच्चे गुण ही असली मूल्य हैं। सृष्टि और धरती से जुड़ी ममता और प्रेम हमें जीवन के उच्च आदर्श और आत्म-सम्मान सिखाते हैं। इस गीत का संदेश है कि संस्कार, ज्ञान और प्रेम हमारे स्थायी खजाने हैं, जो समय की परख में भी अमिट रहते हैं।भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी, #Aadi Anaadi Yug Kee Apanee Dharohar Gyaan Sanskaar Apanee, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत=} #आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
#Aadi Anaadi Yug Kee Apanee Dharohar Gyaan Sanskaar Apanee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
चलते चलते आ रहा है कई कालों से अनुभव की अनुभूति अपनी
मिला है जो जीवन में मूल्यवान गुण का अनुभव
नैतिक संस्कार जिसका अपना है प्रतिभा
करतब कारनामा से सफलता जो दिलाता है
विजय के सिद्धि वो अहसास को कराता है
प्रयासों के पांवों से विफल ना होता है
सफल हो जाता है हंसिल कर लेता है
आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
चलते चलते आ रहा है कई कालों से अनुभव की अनुभूति अपनी
पूरा करता है लक्ष्य को जब करतब दिखाता
सार्थक गंभीरता से प्रभाव को जमाता
सबसे ऊपर चलता है ये महत्ता उत्कृष्ट है
बड़ा है विशिष्ट उच्चतम भाव भी गंभीर है
जैसे जरूरी जो है वही जग में लाता
गहरा प्रभाव डालकर उद्देश्य को दिखाता
बहुत असरदार है परिणाम इसकी तय है
ध्यान में जो लिया इसको उसका जीवन जय है
आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
चलते चलते आ रहा है कई कालों से अनुभव की अनुभूति अपनी
कैसे समझाऊं जग को कैसे मैं बताऊं
धरती का पीड़ा मैं कैसे दिखाऊं
रोज रोज सुलाती मुझे आँचल में छुपा के
थपकी लगती जैसे सिने से लगा के
कितना विशाल गहरा पवित्र उसके गर्व है
भरा है सब जीवों का दुलार कैसा कर्म है
जीवन-सम्पदा से धरती खूब जगमगाती
अपने रहती आँसू में दूसरे को हंसाती
आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
चलते चलते आ रहा है कई कालों से अनुभव की अनुभूति अपनी
नभ को जब देखा मैं दृष्टि घूमकर
सूरज चांद सब दिखे आसमान में आकर
बरस रही आँखों से मैं बात कर रहा था
ममता की आह में मैं भीतर भीतर जल रहा था
स्वरों के वो गूंज से आकाश मुझसे बोला
कितना मजबूत है तू सम्पन्न हो कर खुला
गुण का जो भाव है वो नम्र कर देती है
आत्मा जगाकर वो विनम्र कर देती है
आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
चलते चलते आ रहा है कई कालों से अनुभव की अनुभूति अपनी
सृष्टि का विशाल गर्व केवल व्यक्तिगत ना
ऊंचा है उदात्त अनुभव व्यापक सबका
गर्व का पवित्र इसमें अहंकार ना घमंड है
अपनी अच्छाइयों का नैतिक सामर्थ्य है
सच्चा शुद्ध भाव इसके ज्योति जैसा जलता
जीवन की श्रेष्ठता को सलाखों ऊपर रखता
अंतर्मन को भर देता आत्मसम्मान से
ऊंचे आदर्शों को जोड़ देता प्रेम से
आदि अनादि युग की अपनी धरोहर ज्ञान संस्कार अपनी
चलते चलते आ रहा है कई कालों से अनुभव की अनुभूति अपनी
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